अंकशास्त्र की उपयोगिता जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में लक्षित होती है। जातक का स्वभाव, वाहन, मकान व लॉटरी के नंबर, कंपनी का चयन, मेलापक, शेयर बाजार आदि सभी में अंकों की उपयोगिता सर्वोपरि होती है। आपके मूलांक में ही वे सभी योग्यताएं, प्रभाव और स्वास्थ्य सन्निहित है जो आपका मार्गदर्शन करते हैं।
Read Moreवैसे तो अंक ज्योतिष और हस्तरेखा ज्योतिष की दो एक दम अलग विधाएं हैं लेकिन दोनों के संगम बिंदु भी हैं जो एक दूसरे के पूरक हैं। कैसे, आइए, जानें इस लेख से।
Read Moreअंकों का संसार बहुत ही विचित्र एवं रहस्यमय है। हम अपने जन्म से लेकर मृत्यु तक इन अंकों के मायाजाल में उलझे रहते हैं। जैसे-जैसे जीवन गुजरता है इन अंकों का संबंध हमसे और भी अधिक गहरा होता चला जाता है। अंकों के बिना हम जीवन की कल्पना भी नहीं कर सकते। काल गणना में भी हमारे ऋषियों ने अंकों का सहारा लिया। भगवत गीता में 18 अध्याय, महाभारत में 18 पर्व, पुराणों की संखया 18 ही क्यों? आइए जानें अंकशास्त्र के पीछे छिपे वैज्ञानिक आधार को इस लेख द्वारा ....
Read MoreThis artical answers the question like- Who Am I? Everybody wants to know their future or their present.Numerology can be used as a practical medium of understanding one's nature, talents, life goals, hidden characteristics, opportunities and challenges. It offers guidance in career, romance and prosperity.Numerology enables us to be aware of ourselves and the talents hidden in us and shows us the path to use our abilities correctly. Numerology generally deals with the numbers 1 to 9 and master numbers – 11, 22 and 33.
Read Moreअंकों की गणना और उसके मानव जीवन पर प्रभाव को अंक शास्त्र के नाम से जाना जाता है। जीवन के सभी क्षेत्रों में इसकी उपयोगिता हमेशा रहती है। अंकों के आधार पर ही हमने 27 नक्षत्रों, 12 राशियों और 9 ग्रहों को पहचाना है। किसी भी कुंडली में 13 राशियां या भाव नहीं हो सकते उसी तरह (1-9) को छोड़ कर कोई नया अंक नहीं हो सकता ना तो ज्योतिष बदली है और ना ही अंकों का रहस्य। अंकों के महत्वपूर्ण नियम होते हैं जिससे हम अपने जीवन में उसका प्रभाव देखते हैं इसमें मूलांक, भाग्यांक और नामांक मुखय है। इसमें सबसे महत्वपूर्ण है मूलांक यह हमारी जन्म तिथि है। वह कोई भी संखया हो सकती है जो हमें पूरी तरह प्रभावित करती है। अगर किसी की जन्म तारीख 3 मार्च 2010 है तो उसका मूलांक उसकी जन्म तिथि होगी जैसे 3 मूलांक इस जातक के जीवन पर इस अंक का प्रभाव तथा इसके गुण अवगुण पूरे जीवन काल में प्रभावित करते रहेंगे। यदि जन्म तारीख 12 मार्च 2010 है तो भी मूलांक 1+2=3 ही होगा।
Read Moreआचार्य मनीषी बेकन ने कहा कि संसार सार में मनुष्य अद्भुत प्राणी है और उससे भी अनूठा है उसका मस्तिष्क-ज्योतिष ग्रह सभी कुछ क्रम, संतुलन नियम एवं लयबद्ध कार्य कलाप से संचालित होते हैं। फलदायक गणना का क्रम भी निश्चित सिद्धांत और गुणा से अपना कार्य करता है। अंक शास्त्री भी अपना कार्य करता है। अंक शास्त्री भी अपना कार्य कुछ नियम से ही करता है नौ के अंक के स्वामी मंगल है। संसार सागर वसुंधरा पृथ्वी का पर्यायवाची है। चराचर पृथ्वी मां पर आधार लेकर अपनी गति निर्धारित करते हैं।
Read Moreकुछ जातकों के पास न तोजन्म तिथि होती है और नही जन्म का समय। तो ऐसे जातक अपने व्यवसाय का चयन कैसे करें? अधिकांश व्यक्ति इन सूचनाओं के अभाव में बिना सोचे समझे व्यवसाय शुरू कर देते हैं और सफलता न मिलने पर निराश हो जाते हैं और नौकरी करना शुरू कर देते हैं। क्योंकि उनकाव्यवसाय उनके नामांक से मेल नहीं खाता और व्यापार में सफल नहीं हो पाते। नामांक में दैवीय शक्ति होती है। तो फिर किस नाम का नामांक बनाएं? शास्त्रों में कहा गया है कि सोता हुआ व्यक्ति जिस नाम से जाग जाए वही नाम उसके लिए शुभ होता है।
Read Moreब्रह्मा द्वारा रचित इस सृष्टि में सूक्ष्म से सूक्ष्मतर सभी किसी न किसी रूप में सामंजस्य रखते हैं। हमारी भारतीय आध्यात्मिक परंपराएं, अंकों के शुभ-अशुभ फलों का समन्वय जहां विश्व के अन्य धर्मों के साहित्य एवं मान्यताओं से समानता रखता है वहीं हस्त, ज्योतिष, वास्तु एवं फलित ज्योतिष सभी में अंक शास्त्र का प्रभाव देखा जा सकता है। आइए जानें अंकशास्त्र का विभिन्न ज्योतिषीय विद्याओं के साथ आपसी संबंध...
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