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तंत्र एवं संबंधित सामग्री (1 व्यूस)

तंत्र शिव की अजेय शक्ति है। जब कोई व्यक्ति भगवान की निष्काम भक्ति करने लगता है तो प्रभु की माया उसका इम्तहान लेती है। आठों सिद्धियां और नवों निधियां उसके द्वार पर हाथ जोड़े खड़ी रहती है। लेकिन सच्चा भक्त उनकी ओर आंख उठाकर भी नहीं देखता। लेकिन जिसकी आस्था अस्थिर होती है वह किसी एक सिद्धि के प्राप्त होने पर ही अपने पथ से विचलित हो जाता है और लोगों को उस सिद्धि के माध्यम से चमत्कार दिखाना शुरु कर देता है और तांत्रिक प्रयोगों द्वारा लोगों को विस्मृत करता है। बिना पूजा पाठ व विशेष परिश्रम के द्वारा जो लोग अपना कार्य सिद्ध करना चाहते हैं वे तंत्र का सहारा लेते हैं।


ज्योतिष में संपूर्ण ज्ञान होते हुए भी तबतक वह अधूरा है जबतक कि उसके उपाय न मालूम हो। यह ठीक उसी तरह ...देखे

आप ज्योतिष क्षेत्र में रूचि रखते हैं लेकिन सीखने का माध्यम अभी तक प्राप्त नहीं हुआ था या ज्योतिष में...देखे

रुद्राक्ष को भगवान शिव का अश्रु कहा गया है। शास्त्रों में रुद्राक्ष सिद्धिदायकए पापनाशकए पुण्यवर्धकए...देखे

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