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रत्न धारण विधि (698 व्यूस)

जब कोई व्यक्ति बहुत सी परेशानियों या बीमारियों से ग्रसित होता है तो उसे नवग्रह के नवरत्न धारण करने के लिए कहा जाता है। नौ रत्न जड़ी अंगूठी में सब प्रकार के रत्नों का वजन एक जैसा रखा जाता है। यह नौ रत्न सोने या चांदी की अंगूठी में जड़वा कर यथाविधि पूजन करवा कर शुभ मुहुर्Ÿा में अनामिका उंगली में धारण करनी चाहिए। नवरत्न का लाॅकेट भी बनवाया जा सकता है। इसमें रत्नों की स्थिति नवग्रह यंत्र की तरह ही रखी जाती हैः


ज्योतिष में संपूर्ण ज्ञान होते हुए भी तबतक वह अधूरा है जबतक कि उसके उपाय न मालूम हो। यह ठीक उसी तरह ...देखे

आप ज्योतिष क्षेत्र में रूचि रखते हैं लेकिन सीखने का माध्यम अभी तक प्राप्त नहीं हुआ था या ज्योतिष में...देखे

रुद्राक्ष को भगवान शिव का अश्रु कहा गया है। शास्त्रों में रुद्राक्ष सिद्धिदायकए पापनाशकए पुण्यवर्धकए...देखे

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