सुप्रजनन पद्धति की देन: तथागत अवतार तुलसी

सुप्रजनन पद्धति की देन: तथागत अवतार तुलसी  

बिहार के एक निम्न मध्यमवर्गीय परिवार में नौ सिंतंबर 1987 को जन्मे तथागत अवतार तुलसी अपने माता-पिता की विलक्षण संतान हैं। उन्होंने नौ साल की उम्र में दसवीं पास की। 12 वर्ष दो महीने व 19 दिन में पटना यूनीवर्सिटी से 70.5 प्रतिशत अंकों के साथ एम. एस. सीकी परीक्षा उत्तीर्ण की। इस उपलब्धि ने उन्हें गिनीज बुक आफ वल्र्ड रिकार्ड में स्थान दिलाया और 21वं साल में इंडियन स्कूल आफ साइंस, बंगलूरू से क्वांटम कंप्यूटरिंग में डायरेक्टर की उपाधि उनके हाथों में थी। अपने 22वें वर्ष से वे मुंबई आई. आईटी. में बतौर असिस्टेंट प्रोफेसर पढ़ा रहे हैं। 2001 में जर्मनी में नोबेल पुरस्कार विजेताओं की कान्फ्रैंस में तुलसी को झूठा मेधावी करार किया गया था। परंतु अपनी मेहनत से तुलसी ने खुद को साबित किया और एक बार फिर से चर्चा में आ गए जब उन्होंने देश में सबसे कम उम्र में पी. एच. डी. की डिग्री 21 साल की उम्र में हासिल कर ली। आज आई. आई टी. में फिजिक्स पढ़ा रहे हैं। तथागत के फिजिक्स में अबतक करीब एक दर्जन लेख विभिन्न जर्नल में छप चुके हैं। उनकी प्रबल ईच्छा है कि उनकी उपलब्धियों के लिए उन्हें नोबेल पुरस्कार मिले। तथागत के पिता तुलसी नारायण प्रसाद का दावा है कि उनकी तीन संतानों में सबसे छोटी संतान तुलसी के विलक्षण प्रतिभा के बारे में उन्हें पूर्वानुमान था क्योंकि ऐसे बच्चे का जन्म कोई आकस्मिक नहीं बल्कि पूर्व निर्धारित और सुनियोजित था। सुप्रजनन पद्धति का उपयोग करने के लिए माता-पिता को पांच वर्ष तक घोर परिश्रम करना पड़ा जिसमें खान-पान को नियंत्रित करना प्रमुख था। श्री प्रसाद इसकी तुलना फसल उगाने की इस पद्धति से करते हैं, जब कड़ी मेहनत के बाद बंजर जमीन को ऊर्वरा बना कर उसमें बीज रोपण करते हैं फिर जैसे अच्छी फसल के बारे में कोई संदेह नहीं रह जाता ठीक उसी तरह वे पहले से ही तुलसी की विलक्षण बुद्धि के लिए आश्वस्त थे। महात्मा बुद्ध के शरीर पर पाये जाने वाले चिह्नों को लेकर तुलसी ने जन्म लिया। शिशु तुलसी की उंगलियों के पोर चक्रों से चिह्नित थे और कान भी अपेक्षाकृत बड़े थे इसीलिए उन्होंने उसका नाम तथागत अवतार तुलसी रखा। उन्हें पूरा विश्वास है कि गौतम बुद्ध के अवतार ने उनके परिवार में जन्म लिया है। तथागत ने अपने जीवन में कठिन परिश्रम किया है और उसके अनुसार एक छात्र के लिए विश्लेषण, कल्पना और स्मरण की क्षमता उसकी मूल पूंजी है और जिसने भी अपने जीवन में इनका सही निवेश किया, सफलता उसके कदम चूमती रहेगी। अक्सर कहा जाता है कि बुद्धि जन्मजात होती है, ज्ञान अर्जित। लेकिन क्वांटम सर्च ऐल्गरिज्म पर अपना सिद्धांत प्रस्तुत करने वाले तथागत अवतार तुलसी बुद्धि और ज्ञान के अदभुत संयोग हंै और तुलसी की यही ईच्छा है कि उन्हें नोबेल पुरस्कार मिले। तथागत के लिए हमारी शुभकामनाएं उनके साथ हैं। आइये करें तथागत की जन्मकुंडली का आकलन ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चतुर्थ भाव से विद्या तथा द्वितीय भाव से विद्या में निपुणता एवं पंचम भाव व पंचमेश से बुद्धि का एवं दशम भाव से विद्याजनित यश, सफलता का विशेष विचार होता है। इसके अतिरिक्त बुध ग्रह एवं शुक्र ग्रह से भी विद्वत्ता, पांडित्य व बुद्धि का विचार किया जाता है। बृहस्पति ग्रह भी विद्या तथा विद्या के विकास का कारक होता है। अतः तुलसी की जन्मकुंडली में सर्वप्रथम हम विद्या व बुद्धि संबंधी बनने वाले योगों का वर्णन करेंगे। तीव्र एवं सूक्ष्म बुद्धि योग: पंचमेश जिस स्थान में हो उस स्थान के स्वामी पर यदि शुभ ग्रह की दृष्टि हो अथवा उसके दोनों तरफ शुभ ग्रह हों तो वह जातक अत्यंत सूक्ष्म एवं तीव्र बुद्धि का होता है। तुलसी की कुंडली में यह योग विद्यमान है। यहां पंचमेश मंगल द्वितीय भाव में सूर्य की राशि में स्थित है तथा सूर्य पर शुभ ग्रह बृहस्पति की दृष्टि है जिसके फलस्वरूप तुलसी तीक्ष्ण बुद्धि का मालिक है। बुद्धिमान योग: पंचमेश जिस ग्रह के नवमांश में हो वह ग्रह यदि जन्म लग्न अथवा चंद्र लग्न से केंद्र में तथा शुभ ग्रह से भी दृष्ट हो तो विशेष बुद्धिमान योग होता है। तुलसी की कुंडली में पंचमेश मंगल बुध के नवमांश में है तथा चंद्र कुंडली से बुध ग्रह सप्तम केंद्र में स्थित हैं एवं उस पर शुभ ग्रह चंद्रमा की दृष्टि है जिसके कारण तुलसी ने इतनी कम उम्र में अपने बुद्धि बल से इतनी बड़ी कामयाबी हासिल की। विशेष बुद्धि विद्या प्राप्ति योग पंचमेश बुद्धि, द्वितीयेश विद्या निपुणता, चतुर्थेश विद्या स्थान के स्वामी शुक्र इन तीनों विद्या व बुद्धि से संबंधित ग्रहों की द्वितीय भाव में एक साथ युति होने से तुलसी बुद्धि और विद्या का अद्भुत संगम है और इसी के कारण विद्या के क्षेत्र में उसने इतनी कम उम्र में डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त कर ली। तथागत तुलसी की कुंडली में प्रखर बुद्धिसंपन्न होने के समस्त योग विद्यमान हैं। इन योगों के अतिरिक्त इनकी कुंडली में चंद्रमा नवम भाव में और गुरु केंद्रस्थ हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार चंद्रमा नवमस्थ के समय यदि गुरु और बुध बली हों तो ऐसा जातक तीक्ष्ण बुद्धि का होता है। शुभ फल प्राप्ति योग: मानसागरी ग्रंथ के अनुसार केतु यदि तीसरे भाव में हो तो सब दोषों का निवारण कर अत्यंत शुभ फल प्रदान करता है। तुलसी की कुंडली में केतु सौम्य ग्रह उच्चस्थ बुध के साथ तीसरे भाव में होने से तुलसी के लिए विशेष शुभ फल प्राप्ति योग बन रहे हैं। अभी 2001 से तुलसी की बुध की दशा भी चल रही है और इस दशा में ही उसने डाक्टरेट की उपाधि प्राप्त की और आई. आई. टी. में कार्यरत हैं। 2018 के पश्चात् केतु की दशा आएगी उसमें भी तुलसी बहुत उन्नति करेंगे और धन कमाएंगे। पराक्रमी पुरूष योग: सर्वार्थ चिंतामणि के अनुसार यदि तृतीय भाव का कारक ग्रह शुभ ग्रह के नवमांश में हो तथा वह जन्म कुंडली में शुभ ग्रह से युक्त हो तो ऐसा व्यक्ति महा पराक्रमी पुरूष होता है। तुलसी की कुंडली में तृतीय भाव का कारक ग्रह मंगल शुभ ग्रह शुक्र से युत है तथा नवमांश कुंडली में मंगल शुभ ग्रह बुध के नवमांश में है जिसके फलस्वरूप तुलसी ने अपनी कठोर मेहनत एवं पराक्रम से इतनी छोटी उम्र में विद्या एवं सम्मान का इतना बड़ा मुकाम हासिल किया।


पराविद्या विशेषांक  मई 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के पराविद्या विशेषांक में 2014 के सौभाग्यशाली संतान योग, प्रेम-विवाह और ज्योतिषीय ग्रह योग, संजय दत्त: संघर्ष अभी बाकी, शुभ मुहूर्त मानोगे तो भाग्य बदलेगा, भोग कारक शुक्र और बारहवां भाव, संतति योग, विशिष्ट धन योग, जन्मवार से शारीरिक आकर्षण और व्यक्तित्व, लग्न राशि: व्यक्तित्व का आईना, अंकों की उत्पत्ति, अंक ज्योतिष के रहस्य, मंगल का फल, सत्यकथा, पौराणिक कथा के अतिरिक्त, लाल किताब के अचूक उपाय, वास्तु प्रश्नोत्तरी, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, प्राकृतिक चिकित्सा, विवादित वास्तु, आदि विषयों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।

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