चमत्कारी तांत्रिक टोटको से करें भाग्य वृद्धि

चमत्कारी तांत्रिक टोटको से करें भाग्य वृद्धि  

पति एवं पत्नी प्राप्ति हेतु टोटके बसंत कुमार सोनी श्रेष्ठ वर की प्राप्ति हेतु उपाय : लड़की के माता-पिता आदि कन्या के विवाह के लिये सुयोग्य वर की प्राप्ति के निमित्त प्रयासरत रहते हैं और कभी-कभी अनेक प्रयास करने पर भी वर की तलाश नहीं कर पाते। यदि किसी कन्या के विवाह में किसी भी कारण से अनावश्यक विलंब हो रहा हो, बाधायें आ रही हों तो कन्या को स्वयम् 21 दिनों तक निम्न मंत्र का प्रतिदिन 108 बार पाठ करना चाहिये और पाठ के उपरांत इसी मंत्र के अंत में ''स्वाहा'' शब्द लगाकर 11 आहुतियां (शुद्ध घी, शक्कर मिश्रित धूप से) देना चाहिये। यह दशांश हवन कहलाता है। 108 बार पाठ का दसवां हिस्सा यानि 10.8 = 11 (ग्यारह) आहुतियां भी प्रतिदिन देना है, इक्कीस दिनों तक। सिर्फ स्थान, समय और आसन निश्चित होना चाहिये। इसका अर्थ यह है कि यदि कोई कन्या प्रथम दिन प्रातः काल 9.00 बजे पाठ करती है तो 21 दिनों तक उसे प्रतिदिन 9.00 बजे ही पाठ आरंभ करना चाहिये। यदि प्रथम दिन घर की पूजा-स्थली में बैठकर पाठ शुरू किया है तो प्रतिदिन वहीं बैठकर पाठ करना चाहिये। वैसे ही प्रथम दिन जिस आसन पर बैठकर पाठ आरंभ किया गया हो, उसी आसन पर बैठकर 21 दिनों तक पाठ करना है। सार यह है कि मंत्र पाठ का समय, स्थान और आसन बदलना नहीं है और न ही लकड़ी के पटरे पर बैठकर पाठ करना है न ही पत्थर की शिला पर बैठकर। विधि : अपने समक्ष दुर्गा जी की मूर्ति या उनकी तस्बीर रखें। कात्यायनी देवी का यंत्र मूर्ति के समक्ष लाल रेशमी कपड़े पर स्थापित करें। यंत्र और मूर्ति का सामान्य पूजन रोली, पुष्प, गंध, नैवेद्य इत्यादि से करें। 5 अगरबत्ती और धूप दीप जलायें और मंत्र का 108 बार पाठ करें। पाठ के पूर्व कुलदेवी का स्मरण करना चाहिये। मंत्र : कात्यायनी महामाये महायोगिन्यधीश्वरि। नंदगोप सुतम् देवि पतिम् मे कुरुते नमः॥ पाठ समाप्त होने पर इसी मंत्र को पढ़ते हुये ''नमः'' के स्थान पर 'नमस्वाहा' का उच्चारण करते हुये ग्यारह आहुतियां दें। पूर्ण श्रद्धा और विश्वास के साथ इस विधि का पालन करने वाली कन्या को दुर्गा देवी सुयोग्य वर प्रदान करती हैं। सुयोग्य पत्नी की प्राप्ति हेतु उपाय उपाय क्रमांक 1 : ''मन अनुसार चले जो, मन को हरने वाली, ऐसी पत्नी करो प्रदानम्, लाग रहे चरणम्, जये दुर्गे नमनम्।'' यदि किसी अविवाहित युवक का किसी कारणवश विवाह न हो पा रहा हो तो श्री दुर्गा जी का ध्यान करते हुये वह घी का दीपक जलाकर किसी एकांत स्थान में स्नान शुद्धि के उपरांत नित्य प्रातःकाल उपरोक्त पंचपदी का उच्च स्वर में 108 बार पाठ करें। जाप करें तो, जगत्जननी माता दुर्गा जी की कृपा से सुयोग्य पत्नी की प्राप्ति शीघ्र हो जाती है। उपाय क्रमांक 2 : दुर्गा सप्तशती की पुस्तक मे से नित्य ''अर्गला- स्तोत्र'' का एक पाठ (पूर्ण रूप में) करने से सुलक्षणा पत्नी की प्राप्ति संभव हो जाती है। उपाय क्रमांक 3 : यदि अर्गला-स्तोत्र का पूर्ण रूप में पाठ न कर सकें तो विवाहेच्छुक युवक को अर्गला स्तोत्र के 24वें श्लोक का मंत्र रूप में 108 बार पाठ या जप करने से पत्नी रूपी गृहलक्ष्मी की प्राप्ति संभव होती है। उपाय क्रमांक 1 से 3 तक का कोई भी प्रयोग कृष्ण पक्ष की अष्टमी या चतुर्दशी तिथि से आरंभ कर विवाह संबंध सुनिश्चित हो जाने तक सतत करते रहना चाहिये। पाठ के समय शुद्धता रखनी चाहिए। दुर्गाजी की नित्य सामान्य पूजा जल, पुष्प, फल, मेवा, मिष्ठान्न, रोली व कुंकुम या लाल चंदन, गंध आदि से करते रहना चाहिये। सप्ताह में कम से कम एक ब्राह्मण व दो कन्याओं को भोजन करना चाहिये। प्रतिदिन पाठ के उपरांत कम से कम ग्यारह आहुतियां दुर्गाजी के नाम से देनी चाहिये। पूर्ण श्रद्धा, विश्वास और भक्ति भावना के साथ इस तरह के विधान का पालन करने से मनोकामना पूर्ण होती हैं। नवदुर्गा यंत्र या दुर्गा बीसा यंत्र की स्थापना पाठ के प्रथम दिन करनी चाहिये। मंत्र उपाय क्रमांक 3 पत्नीं मनोरमां देहि मनोवृत्तानु सारिणीम्। तारिणींदुर्गसं सारसागरस्य कुलोद्भवाम्॥ उपाय क्रमांक 4 : स देवि नित्यं परितप्यमानस्त्वामेव सीतेत्यभिभाषमाणः । धृतव्रतो राजसुतो महात्मा तवैव लाभाय कृतप्रयत्नः॥ यह श्री बाल्मीकी रामायण क े सदुं रकाठं के 36वें सर्ग का 46 वां श्लोक है। विवाह की कामना लेकर श्री हनुमान जी का ध्यान, पूजन, विनय आदि के साथ कोई अविवाहित युवक आदि किसी भी माह के शुक्ल पक्ष के प्रथम मंगलवार से नित्य प्रातः 108 बार पाठ करें तो उद्वाह या स्त्री की प्राप्ति होती है। पाठ के समय हनुमान जी के चित्र के समक्ष या मूर्ति के समक्ष उत्तराभिमुख घृत-दीप जलते रहना चाहिए। श्री हनुमान जी को प्रतिदिन मधुर फलों का भोग लगाना चाहिए। मंगलवार को सिंदूर और चमेली का तेल चोले के रूप में मंदिर में भेंट करना चाहिए। बाल्मीकी रामायण, रामचरित मानस सुंदर कांड, मूलरामायण का सम्पुटित पाठ उपरोक्त श्लोक का सम्पुट लगाकर करने से भी उद्वाह या स्त्री की प्राप्ति होती है। उपाय क्रमांक 5 : यदि किसी अविवाहित युवक को विवाह होने में बारंबार बाधाओं का सामना करना पड़ रहा हो तो ऐसे युवक को चाहिये कि वह नित्य प्रातः स्नान कर सात अंजली जलं ''विश्वावसु'' गंधर्व को अर्पित करे और निम्न मंत्र का 108 बार मन ही मन जप करे। इसे गुप्त रखें। अर्थात् किसी को इस बात का आभास न होने पाये कि विवाह के उद्देश्य से जपानुष्ठान किया जा रहा है। सायंकाल में भी एक माला जप मानसिक रूप में किया जाय। ऐसा करने से एक माह में सुंदर, सुशील और सुसम्पन्न कन्या से विवाह निश्चित हो सकता है। जपनीय मंत्र : ' ' ऊँ विश्वा वसुर्नामगं धर्वो कन्यानामधिपतिः। सुरूपां सालंकृतां कन्या देहि में नमस्तस्मै॥ विश्वावसवे स्वाहा॥'' इस प्रकार से विश्वावसु नामक गंधर्व को सात अंजली जल अर्पित करके उपरोक्त मंत्र/विद्या का जप करने से एक माह के अंदर अलंकारों से सुसज्जित श्रेष्ठ पत्नी की प्राप्ति होती है। कहा भी गया है। सालंङ्कारा वरां पानीयस्याान्जलीन सप्त दत्वा, विद्यामिमां जपेत्। सालंकारां वरां कन्यां, लभते मास मात्रतः॥ यदि किसी अविवाहित युवक का किसी कारणवश विवाह न हो पा रहा हो तो श्री दुर्गा जी का ध्यान करते हुये वह घी का दीपक जलाकर किसी एकांत स्थान में स्नान शुद्धि के उपरांत नित्य प्रातःकाल पंचपदी का उच्च स्वर में 108 बार पाठ करें। जाप करें तो, जगत्जननी माता दुर्गा जी की कृपा से सुयोग्य पत्नी की प्राप्ति शीघ्र हो जाती है।
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pati evan patni prapti hetu totkebsant kumar sonishreshth var ki prapti hetu upay :larki ke mata-pita adi kanyake vivah ke liye suyogya var kiprapti ke nimitt prayasarat rahte hainaur kabhi-kabhi anek prayas karnepar bhi var ki talash nahin kar pate.ydi kisi kanya ke vivah men kisibhi karan se anavashyak vilanb horha ho, badhayen a rahi hon to kanyako svayam 21 dinon tak nimn mantraka pratidin 108 bar path karnachahiye aur path ke uprant isi mantrake ant men ''svaha'' shabd lagakar 11ahutiyan (shuddh ghi, shakkar mishritdhup se) dena chahiye. yah dashanshahavan kahlata hai. 108 bar pathka dasvan hissa yani 10.8 = 11(gyarh) ahutiyan bhi pratidin denahai, ikkis dinon tak. sirf sthan,samay aur asan nishchit honachahiye. iska arth yah hai ki yadikoi kanya pratham din pratah kal9.00 baje path karti hai to 21dinon tak use pratidin 9.00baje hi path aranbh karnachahiye. yadi pratham dinaghar ki puja-sthali menbaithakar path shuru kiya haito pratidin vahin baithakar pathkrna chahiye. vaise hi prathmdin jis asan par baithkrpath aranbh kiya gaya ho, usiasan par baithakar 21 dinon takpath karna hai. sar yah hai ki mantrapath ka samay, sthan aur asnbdlna nahin hai aur n hi lakri keptre par baithakar path karna hai n hipatthar ki shila par baithakar.vidhi : apne samaksh durga ji ki murtiya unki tasbir rakhen. katyaynidevi ka yantra murti ke samaksh lalreshmi kapre par sthapit karen. yantraaur murti ka samanya pujan roli,pushp, gandh, naivedya ityadi se karen. 5agarabatti aur dhup dip jalayen aurmantra ka 108 bar path karen. path kepurva kuldevi ka smaran karna chahiye.mantra :katyayni mahamaye mahayoginyadhishvari.nandgop sutam devi patim me kurutenmah॥path samapt hone par isi mantra koprhte huye ''namah'' ke sthan para'namasvaha' ka uchcharan karte huyegyarah ahutiyan den.purn shraddha aur vishvas ke sath isvidhi ka palan karne vali kanya kodurga devi suyogya var pradan karti hain.suyogya patni ki prapti hetu upayaupay kramank 1 :''man anusar chale jo, man ko harnevali,aisi patni karo pradanam, lag rahecharanam,jaye durge namanam.''yadi kisi avivahit yuvak kakisi karanavash vivah n ho parha ho to shri durga ji ka dhyankrte huye vah ghi ka dipak jalakrkisi ekant sthan men snan shuddhi keuprant nitya pratahkal uproktapanchpdi ka uchch svar men 108bar path karen. jap karento, jagatjanani mata durgaji ki kripa se suyogyapatni ki prapti shighra hojati hai.upay kramank 2 : durgasaptashati ki pustak me senitya ''argala- stotra''ka ek path (purn rup men)krne se sulakshana patni kiprapti sanbhav ho jati hai.upay kramank 3 : yadi argala-stotraka purn rup men path n kar saken tovivahechchuk yuvak ko argala stotrake 24ven shlok ka mantra rup men 108bar path ya jap karne se patni rupigrihalakshmi ki prapti sanbhav hoti hai.upay kramank 1 se 3 tak ka koibhi prayog krishn paksh ki ashtami yachturdashi tithi se aranbh kar vivahsanbandh sunishchit ho jane tak sattkrte rahna chahiye. path ke samyshuddhata rakhni chahie. durgaji kinitya samanya puja jal, pushp, fal,meva, mishthann, roli v kunkum yalal chandan, gandh adi se karte rahnachahiye. saptah men kam se kam ekabrahman v do kanyaon ko bhojnkrna chahiye. pratidin path keuprant kam se kam gyarah ahutiyandurgaji ke nam se deni chahiye. purnashraddha, vishvas aur bhakti bhavna kesath is tarah ke vidhan ka palnkrne se manokamna purn hoti hain.nvdurga yantra ya durga bisa yantra kisthapna path ke pratham din karnichahiye.mantra upay kramank 3patnin manorman dehi manovrittanusarinim.tarinindurgasan sarsagarasyakulodbhavam॥upay kramank 4 :s devi nityan paritapyamanastvamevsitetyabhibhashmanah .dhritavrato rajsuto mahatma tavaiv labhaykritaprayatnah॥yah shri balmiki ramayan k e sadun rakathanke 36ven sarg ka 46 van shlok hai.vivah ki kamna lekar shri hanumanji ka dhyan, pujan, vinay adi kesath koi avivahit yuvak adikisi bhi mah ke shukla paksh ke prathmmanglvar se nitya pratah 108 barpath karen to udvah ya stri ki praptihoti hai. path ke samay hanuman jike chitra ke samaksh ya murti ke 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उपाय व टोटके विशेषांक  आगस्त 2011

टोने –टोटके तथा उपायों का जनसामान्य के लिए अर्थ तथा वास्तविकता व संबंधित भ्रांतियां. वर्तमान में प्रचलित उपायों – टोटकों की प्राचीनता, प्रमाणिकता, उपयोगिता एवं कारगरता. विभिन्न देशों में प्रचलित टोटकों का स्वरूप, विवरण तथा उनके जनकों का संक्षिप्त परिचय.

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