विवाह मेलापक में प्रमुख दोष

जून 2011

व्यूस: 5741

विवाह का शुभ मुहूर्त निकालने के लिए किन किन बातों का ध्यान रखना चाहिए क्या-क्या वर्जित है और विहित है ? अशुभ समय में किए गए कार्यों के कठिन परिणाम एवं अभिजित और गोधूलि लग्न की विशेषताओं का मुहूर्त में महत्व जानिए इस लेख द्वारा... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली मिलानविवाहमुहूर्तभविष्यवाणी तकनीक

कब होगा विवाह

जनवरी 2010

व्यूस: 5738

विवाह के विषय में सभी प्रश्नों में कुंडली में सातवें भाव, सप्तमेश, लग्नेश, शुक्र एवं गुरु की स्थिति को अवश्य ध्यान में रखना चाहिए। सप्तम भाव इसलिए देखते हैं कि कुंडली में विवाह से संबंधित यही भाव है। सप्तमेश को इसलिए देखा जाता है ... और पढ़ें

ज्योतिषविवाह

तलाक क्यों?

मार्च 2014

व्यूस: 5701

रागुआज लगभग प्रत्येक इंसान अपने पुत्र व पुत्री के विवाह में लाखों, करोड़ों रुपये खर्च कर देते हैं, उसके बावजूद भी विवाह के कुछ माह के उपरांत शादीशुदा जोड़ा कोर्ट में होता है तलाक की अर्जी लिए। आखिर क्या वजह है कि इतनी संपन्नता के वि... और पढ़ें

ज्योतिषघटनाएँज्योतिषीय योगग्रहविवाह

पंचम भाव - कुछ तथ्य

जनवरी 2007

व्यूस: 5452

जब हम किसी के प्रणय संबंधों को ज्योतिषीय दृष्टिकोण से देखते हैं तो प्रथमतः पंचम भाव पर विचार करते हैं। इस भाव में उदर गर्भ एवं मस्तिष्क गर्भ होते हैं जिनसे शिशु के जन्म, विचार एवं भविष्य की योजनाओं का विचार किया जाता है। ये जन्म ए... और पढ़ें

ज्योतिषघरविवाह

प्रेम-विवाह और ज्योतिषीय ग्रह योग

मई 2013

व्यूस: 5192

‘प्रेम-विवाह’ एक ऐसा शब्द है जो अपने अंदर कई भावनाओं को समेटे हुए है। जहां अभिभावकों के लिए यह चिंता, आशंका, क्रोध, संशय आदि का कारण बनता है, वहीं नवयुवक तथा नवयुवतियों के लिए यह संतोष, आशा एवं सुखद भविष्य की कल्पना को ऊंची उड़ान द... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगविवाह

वास्तु शास्त्र - दाम्पत्य जीवन

दिसम्बर 2014

व्यूस: 5180

आज का मानव अर्थ के पीछे दौड़ रहा है एवं भौतिक सुखों की प्राप्ति के लिए प्रयत्नशील है। पाश्चात्य संस्कृति अनुसार संस्कारों में परिवर्तन के साथ-साथ निवास/व्यवसाय/स्थल में भी वास्तु नियमों की अवहेलना की जा रही है जिससे परिवार सीमित... और पढ़ें

वास्तुविवाहवास्तु परामर्शवास्तु दोष निवारणवास्तु पुरुष एवं दिशाएं

बहुविवाह एवं द्विविवाह

जनवरी 2007

व्यूस: 4959

अधिकतर हम ज्योतिषी लोग जन्म कुंडली मेलापक करते समय समग्र विषय पर विचार न करके विवाह के लिए सलाह दे देते हैं। गुण मिलाकर सलाह दे देने से वैवाहिक जीवन अच्छा नहीं रहता, गुण के साथ-साथ ग्रहों का मिलान करना भी आवश्यक है। ग्रह मिलान करत... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगविवाहभविष्यवाणी तकनीक

सिंहस्थ गुरु में विवाह वर्जित क्यों?

जून 2015

व्यूस: 4935

ज्योतिष शास्त्र के अनुसार विवाह विषयों में वर का सूर्य बल एवं चंद्र बल तथा वधू का गुरु बल एवं चंद्र बल देखा जाता है। सूर्य आत्मकारक ग्रह है। गुरु हृदयकारक एवं जीवन को प्रशस्त करने वाला ग्रह है। चंद्रमा मन का कारक ग्रह भी मा... और पढ़ें

ज्योतिषविवाहभविष्यवाणी तकनीक

मंगली दोष एवं ग्र्रह मेलापक

अकतूबर 2009

व्यूस: 4711

दांपत्य जीवन एवं दांपत्य सुख का निर्णय करने वाले अनेक महत्त्वपूर्ण तथ्यों में से मंगली दोष एक है। यह अकेला न तो दांपत्य जीवन को सुखमय बना सकता है और न दुःखमय। अतः लोगों को चाहिए कि वे मंगली के नाम से न घबराएं तथा इसके प्र्रभाव का ... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरविवाहग्रहभविष्यवाणी तकनीक

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