सुलक्षणा पत्नी-प्राप्ति के योग

सुलक्षणा पत्नी-प्राप्ति के योग  

कितनी सम्पत्तियों के स्वामी हो सकते हैं आप! भारती आनंद यदि हाथ चमकदार व गद्देदार हो, अंगुलियां पीछे की तरफ झुकती हों व अंगूठा भी पीछे की तरफ मुड़ता हो, भाग्य रेखा की संख्या एक से अधिक हों, भाग्य रेखा बगैर रुके मणिबंध से सीधे शनि क्षेत्र पर जाती हो, तो ऐसे व्यक्ति अथाह सम्पŸिायों के मालिक होते हैं। हाथ भारी हो, मासंल व स्निग्ध हो, जीवन रेखा, भाग्य रेखा व मस्तिष्क रेखा में एक त्रिकोण बनता हो, तो ऐसे व्यक्ति की सम्पŸिा का क्षेत्र बहुत बड़ा होता है या यूं कह लीजिए जितना बड़ा त्रिकोण, उतनी ही बड़ी सम्पŸिा के मालिक। जीवन रेखा गोल, अंगुलियां सीधी, शनि ग्रह, बुध ग्रह, शुक्र व गुरु ग्रह के पर्वत बिल्कुल उठे हांे, मस्तिष्क रेखा द्विभाजित हो, तो व्यक्ति एक से अधिक सम्पŸिायों के स्वामी होते हैं। अंगूठा पीछे की तरफ मुड़ता हो, शनि की अंगुली सीधी हो, अंगुलियों के आधार बराबर हांे, कम से कम दो तो ऐसे व्यक्तियों की 3 या 4 सम्पŸिायां अवश्य बन जाती हैं। भाग्य रेखा यदि 2 हों और उनका अंत मस्तिष्क रेखा या हृदय रेखा पर हो, तो ऐसे जातकों की जीवन में एक सम्पŸिा तो अवश्य बन जाती है अगर ग्रह बल है तो एक से अधिक सम्पŸिा बन जाती है। यदि मस्तिष्क रेखा व हृदय रेखा एक हो, हाथ मासंल हो, अंगूठा पीछे की तरफ झुकता हो, भाग्य रेखा जीवन रेखा से दूर हो, जीवन रेखा गोल हो, नाखून चमकदार हों, हाथ में रेखाओं का जाल न बनता हो, तो व्यक्ति 4, 5 सम्पŸिायों का स्वामी अवश्य होता है। हाथ भारी और सभी ग्रहों के पर्वत उठे हों, अंगुलियां लंबी हों, मस्तिष्क रेखा की संख्या एक से अधिक हो, मंगल रेखा मजबूत हो, शनि ग्रह के नीचे एक से अधिक सीधी रेखाएं हों, तो ऐसे जातकों की सम्पŸिा एक से अधिक होती है। हाथ भारी हो, गुलाबी हो, गुरु, शनि, चंद्र, बुध ग्रह उभार लिए हो, तो भी ऐसे व्यक्ति अपने जीवन में सम्पŸिा के मालिक अवश्य होते हैं चाहे वह पैतृक ही क्यों न हो। हाथ में रेखाएं अधिक हों, जीवन रेखा, भाग्य रेखा, मस्तिष्क रेखा सुदृढ़ हो, शनि व गुरु की अंगुली के नीचे आधार बराबर हो, तो हथेली में जाल होते हुए भी व्यक्ति की चाहे छोटी सम्पŸिायां ही क्यों न हो, वे ऐसी 3, 4 सम्पŸिायां अवश्य बना लेते हैं। हृदय रेखा सीधी व गुरु के नीचे जाती हो, जीवन रेखा से काफी सारी शाखाएं ऊपर की तरफ जाती हों, ग्रह पर्वत उभार लिए हो भाग्य रेखा व जीवन रेखा के बीच अंतर हो, भाग्य रेखा की शाखाएं मस्तिष्क रेखा के बाद निकलती हों, तो ऐसे व्यक्तियों को 35 वर्ष के बाद कई सम्पŸिायों का लाभ मिलता है। इससे पहले का जीवन काफी ज्यादा मेहनत का होता है किंतु हर काम में इन्हें सफलता अवश्य मिलती है जिसके परिणामस्वरूप ये इतनी सम्पŸिायों के मालिक बन जाते हैं। यदि जीवन रेखा की संख्या एक से अधिक हों और उसके बाद मंगल रेखा भी मणिबंध रेखा से निकलकर शनि क्षेत्र पर पहुंचती हो, गुरु, शनि, बुध, शुक्र सभी ग्रहों के पर्वत उन्नत हो, अंगूठा व अंगुलियां पीछे की तरफ झुकती हों, तो ऐसे व्यक्तियों की पैतृक सम्पŸिा के अतिरिक्त अन्य कई सम्पŸिायां बनती हैं लक्ष्मी इन पर अपार महर करने के बाद ही इन्हें सफलता मिलनी शुरु हो जाती है ऐसी रेखाओं वाले लोग परिवार की आंखों के तारे होते हैं। यदि जीवन रेखा पूरी गोलाई लिए हो, मस्तिष्क रेखा या अन्य रेखाओं में जाल हो, भाग्य रेखा मोटी से पतली हो, चंद्र क्षेत्र पर साफ सुथरी रेखाएं हों, शनि क्षेत्र के नीचे दृश्य रेखा के ऊपर विशेष भाग्य रेखा बनती हो, जीवन रेखा से एक से अधिक संख्या में भाग्य रेखा निकली हांे, तो ऐसे व्यक्ति धन कुबेर होते हैं। इनके जीवन में अथाह धन सम्पŸिायां होती हैं व सभी प्रकार के वैभव से पूर्ण होते हैं। इस प्रकार से हाथ में अन्य कई लक्षण होते हैं जिससे व्यक्ति की सम्पŸिायों के बारे में पता चलता है चाहे वो चल-अचल ही क्यो न हो। जरूरत है इन हस्त रेखाओं का सटीक ज्ञान होना व बारीकी से पूर्ण अध्ययन जिसकी जानकारी पाकर आप अपनी व दूसरे लोगों की सम्पŸिा के बारे में जानकारी प्राप्त कर सकते हैं।



डिप्रेशन रोग एवं ज्योतिष विशेषांक  September 2017

डिप्रेशन रोग एवं ज्योतिष विशेषांक में डिप्रेशन रोग के ज्योतिषीय योगों व कारणों की चर्चा करने हेतु विभिन्न ज्ञानवर्धक लेख व विचार गोष्ठी को सम्मिलित किया गया है। इस अंक की सत्य कथा विशेष रोचक है। वास्तु परिचर्चा और पावन तीर्थ स्थल यात्रा वर्णन सभी को पसंद आएगा। टैरो स्तम्भ में माइनर अर्कानाफाइव आॅफ वांड्स 64 की चर्चा की गई है। महिलाओं के पसंदीदा स्तम्भ ज्योतिष एवं महिलाएं में इस बार भी रोचक लेख सम्मिलित किया गया है।

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