हिंदी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन

हिंदी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन  

व्यूस : 2911 | अप्रैल 2006

कुछ जातकों के पास न तो जन्म तिथि होती है और न ही जन्म का समय। तो ऐसे जातक अपने व्यवसाय का चयन कैसे करें? अधिकांश व्यक्ति इन सूचनाओं के अभाव में बिना सोचे समझे व्यवसाय शुरू कर देते हैं और सफलता न मिलने पर निराश हो जाते हैं और नौकरी करना शुरू कर देते हैं। क्योंकि उनका व्यवसाय उनके नामांक से मेल नहीं खाता और व्यापार में सफल नहीं हो पाते। नामांक में दैवीय शक्ति होती है।

तो फिर किस नाम का नामांक बनाएं? शास्त्रों में कहा गया है कि सोता हुआ व्यक्ति जिस नाम से जाग जाए वही नाम उसके लिए शुभ होता है। इस लेख में हम हिंदी के नामाक्षरों के द्वारा व्यवसाय का निर्धारण कैसे करें, इस पर प्रकाश डाल रहे हैं। यदि आप भी कोई व्यवसाय करना चाह रहे हैं तो इस लेख में प्रस्तुत उदाहरण के आधार पर अपने नामांक के अनुरूप व्यवसाय का चुनाव कर सकते हैं। इससे आपको व्यवसाय में सफलता मिलेगी और आप अपने व्यवसाय के उत्कर्ष पर पहुंच पाएंगे। भारतीय अंक विद्या को सीखने के लिए अंक शास्त्री कीरो और सेफेरियल ने भारत में रह कर इस विद्या का अध्ययन किया। नामांक के लिए प्रयोग की जाने वाली अंग्रेजी लिपि का आधार देवनागरी अर्थात हिंदी ही है।

तो फिर हम क्यों न मूल-आधार पर नामांक की गणना करें? वैसे ज्योतिष में भी कहा जाता है कि देश-काल-पात्र के अनुसार भविष्य कथन करना चाहिए तो फिर अंक ज्योतिष में भी हम क्यों न भारत की राष्ट्र भाषा का स्वतंत्र रूप से प्रयोग करें? अंक शास्त्री कीरो और सेफेरियल ने अंग्रेजी के । र्से अक्षरों के लिए 9 अंक का प्रयोग नहीं किया। वर्तमान प्रणाली अब इस को नहीं मानती है। । र्से के लिए 1 से 9 तक का शृंखला में प्रयोग शुरू हो चुका है। इससे यह साबित होता है कि अब पश्चिमी देश अपने देश की भाषा का प्रयोग अंक विद्या में अपने तरीके से कर रहे हैं। तो हम क्यों न अपनी प्राचीन और वैज्ञानिक पद्धति का अंक ज्योतिष में प्रयोग करें? हिंदी भाषा के स्वर और व्यंजन 8 वर्गों में विभाजित हैं।

कीरो और सेफरियल ने भी इसे ही आधार मान कर इसका प्रयोग अंग्रेजी नामांक में किया। नामांक ज्ञात करने की विधि: किसी भी नाम को अंकों में परिवर्तित करने के लिए सर्वप्रथम उस नाम से संबंधित देवनागरी अक्षरों को लिख कर दी गई हिंदी अक्षर अंक तालिका के अनुसार अंक प्रतिस्थापित कर लें। फिर उनका परस्पर योग करके मूलांक ज्ञात करें, वही उस नाम का नामांक होगा। उपर्युक्त तालिका का उपयोग करके हम भारतीय अंक ज्योतिष में अपनापन ला सकते हैं।

ज्योतिष के अनुसार ग्रह मैत्री सारणी तालिका 2 में दी गई है। यदि ग्रहों के अंक का मान दे दिया जाए तो अंक मैत्री सारणी तालिका 3 के अनुरूप प्राप्त होती है। उपर्युक्त सारणी प्रयोग कर अंक विज्ञान को ज्योतिष के समकक्ष ला सकते हैं। उदाहरण: माना निर्मल (निरमल) नाम की स्त्री पूछना चाहती है कि वह ब्यूटी पार्लर का कार्य करे या न करे? उसके पास न तो जन्म तिथि है और न ही जन्म का समय, मात्र नाम से ही उसके प्रश्नों का उत्तर देना है। उस के नाम का अंक बनेगा 8 ि$ न $ र $ म $ ल 1 $ 5 $ 7 $ 6 $7 = 26 = 2$6 = 8 पंचधा मैत्री सारणी से देखें तो 8 के मित्र अंक हैं 5 और 6। 6 अंक शुक्र का है

अतः वह स्त्री शुक्र के कार्य कर ग्रह मैत्री सारणी सकती है। वह ब्यूटी पार्लर चला सकती है या सौंदर्य प्रसाधनों का व्यवसाय कर सकती है। अब उस जातक का दूसरा प्रश्न है कि उसके पार्लर का नाम ‘उर्वशी’ ठीक रहेगा या ‘अनीशा’? आइए इन दोनों नामों पर विचार करें- उ $ र $ व $ श $ ी 1 $ 7 $ 7 $ 8 $ 1 = 24 = 2 $4 = 6 अ $ न $ ी $ श $ ा 1 $ 5 $ 1 $ 8 $ 1 = 16 = 1 $ 6 = 7 उर्वशी का नामांक 6 बना और अनीशा का 7। अंक 6 अंक 8 का मित्र है इसलिए उर्वशी नाम निर्मल के लिए लाभदायक रहेगा।

अब उस जातक का तीसरा प्रश्न आया कि क्या मैं अनिता नाम की लड़की को अपने यहां कार्य पर रख सकती हूं? अ $ ि$ न $ त $ ा 1 $ 1$ 5 $ 5 $ 1 = 13 = 1$3 = 4 नामांक 4 नामांक 8 का मित्र नहीं है। अतः वह अनिता को अपने यहां काम पर न रखे। उसे 5, 6 या 3 नामांक वाले जातक को अपने साथ काम पर रखना चाहिए।


Know Which Career is Appropriate for you, Get Career Report


Ask a Question?

Some problems are too personal to share via a written consultation! No matter what kind of predicament it is that you face, the Talk to an Astrologer service at Future Point aims to get you out of all your misery at once.

SHARE YOUR PROBLEM, GET SOLUTIONS

  • Health

  • Family

  • Marriage

  • Career

  • Finance

  • Business

पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अप्रैल 2006

सभ्यता के आरम्भिक काल से ही फलकथन की विभिन्न पद्धतियां विश्व के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित रही हैं। इन पद्धतियों में से अंक ज्योतिष का अपना अलग महत्व रहा है यहां तक कि अंक ज्योतिष भी विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में प्रचलित है तथा इन सब में आपस में ही विभिन्नता देखने को मिलती है। हालांकि सभी प्रकार के अंक ज्योतिष के उद्देश्य वही हैं तथा इनका मूल उद्देश्य मनुष्य को मार्गदर्शन देकर उनका भविष्य बेहतर करना तथा वर्तमान दशा को सुधारना है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अंक ज्योतिष के आधार पर फलकथन को वरीयता दी गयी है। इसमें मुख्यतः कीरो की पद्धति का अनुशरण किया गया है। इसके अन्तर्गत समाविष्ट महत्वपूर्ण आलेखों में- अंक ज्योतिष का परिचय एवं महत्व, अंक फलित के त्रिकोण प्रेम, बुद्धि एवं धन, मूलांक से जानिए भाग्योदय का समय, नाम बदलकर भाग्य बदलिए, हिन्दी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन, अंक ज्योतिष का महत्वपूर्ण पहलू स्तूप, अंक एवं आॅपरेशन दुर्योधन, मूलांक, रोग और उपाय, अंक विद्या द्वारा जन्मकुण्डली का विश्लेषण आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

सब्सक्राइब


.