सीढ़ियों के नीचे कार्यालय/बंद होना व्यापार के लिए घातक

सीढ़ियों के नीचे कार्यालय/बंद होना व्यापार के लिए घातक  

पिछले माह पंडित जी के कनाडा दौरे के दौरान वहां के एक मशहूर ब्रांड की फ्रंचाइजी, रेस्टोरेन्ट का वास्तु परीक्षण करने गए। उसकी मालकिन श्रीमती रंजना चोपड़ा ने उन्हें बताया कि जबसे उन्होंने ये रेस्टोरेन्ट खरीदा है कोई न कोई समस्या बनी रहती है। उनका इसमें नियमित जाना नहीं हो पाता। उन्होंने बताया कि जब वह कुछ समय पहले अपनी लड़की की शादी के लिये खरीदारी करने दिल्ली व मुंबई गई थी पीछे से उनके रेस्टोरेन्ट में चोरी हो गई, काम बहुत मन्दा हो गया है। किराया भी नहीं निकल रहा है। कई चेक वापस होने के बाद बैंक ने खाता ही बन्द कर दिया। कई बार तो सब कुछ छोड़कर कहीं भाग जाने का दिल करता है। भारी खर्च व मानसिक तनाव बना रहता है। वास्तु परीक्षण करने पर पाए गए वास्तु दोष- - रेस्टोरेन्ट का मुख्य द्वार दक्षिण-पश्चिम में था जो कि मालिक को दूर रखता है, तथा अनचाहे खर्चों व मनमुटाव का कारण होता है। - दक्षिण-पूर्व में शीशा लगा था जो कि अग्नि भय, चोरी व लड़ाई-झगड़ों का कारण हो सकता है। - सीढ़ियों को नीचे से बंद करके आॅफिस बनाया हुआ था जिसमें अकाउन्टेन्ट को दक्षिणामुखी करके बिठाया हुआ था जो कि व्यापार में हानि, गबन, आर्थिक हानि व काम में मन न लगने का कारण होता है। - बिजली के उपकरण जैसे चाय, काॅफी की मशीनें व इन्वर्टर उत्तर-पूर्व में रखे थे जिससे अनचाहे खर्चे, वैचारिक मतभेद तथा तनाव बढ़ जाता है। सुझावः - उन्हें मुख्य द्वार दक्षिण-पश्चिम से दक्षिण की ओर बनाने को कहा गया। - दक्षिण-पूर्व में लगे शीशे को हटवाने की सलाह दी और आर्थिक उन्नति के लिए उसे उत्तर-पूर्व की दीवार पर लगाने को कहा गया। - सीढ़ियों को नीचे से खुला रखने की सलाह दी और आॅफिस को सीढ़ियों के साथ पश्चिम की ओर बनाने को कहा जिसमें अकाउन्टेन्ट को पूर्व की ओर मुख करके बैठने की सलाह दी गई। आॅफिस की पश्चिमी दीवार पर बिना पानी के पहाड़ का चित्र लगाने के लिए कहा जिससे उनका उसमें बैठना हो पाएगा। - चाय, काफी की मशीनें पूर्व की ओर तथा इनवर्टर को दक्षिण-पूर्व की ओर स्थानांततिरत करने को कहा गया तथा उत्तर की दीवार पर बहते पानी (नियाग्रा फाल्स) का चित्र लगाने को कहा। पंडित जी ने उन्हें विश्वास दिलाया कि उपरोक्त उपाय करने, हिम्मत से काम लेने तथा भगवान पर भरोसा करने से अवश्य लाभ होगा तथा व्यापार कई गुना बढ़ जाएगा। प्रश्न: आदरणीय पंडित जी, कृप्या हमारे आॅफिस का नक्शा देखकर वास्तु परामर्श दें जिससे जीवन में सफलता मिल सके। हमारा आफिस ग्राउन्ड फ्लोर पर बना है और बिल्डिंग में बेसमेन्ट भी बना हुआ है। -मंजू जैन, वसंत विहार प्रश्न: पंडित जी, कृप्या हमारे नए घर का प्रस्तावित नक्शा देखकर अपना परामर्श दें जिससे हम इसे फाइनल कर सकें। -टी0 एन0 गुप्ता, माॅडल टाउन उत्तर: इस नक्शे में उत्तर-पूर्व तथा दक्षिण-पश्चिम में शौचालय बने हैं जो कि गंभीर वास्तु दोष है जिससे घर में अनावश्यक खर्चे, बीमारी, मानसिक तनाव तथा लड़ाई-झगड़े होने की संभावना बनी रहती है। आपसे निवदेन है कि उत्तर पूर्व में बने शौचालय को उत्तर में बनाएं तथा दक्षिण-पश्चिम में बने शौचालय को दक्षिण की ओर बनवाएं। रसोई में गैस का स्थान अति उत्तम है परन्तु दक्षिण में बने सिंक को उत्तर की ओर कराएं ताकि घर में धन का प्रवाह होता रहे तथा बीमारी व खर्चों में कमी हो सके। उत्तर: आपके आॅफिस में सभी केबिन सही बने हैं। सीढियां दक्षिण में होना उत्तम है परन्तु लिफ्ट का दक्षिण-पूर्व में होना खराब है। यदि लिफ्ट ग्राउन्ड फ्लोर तक ही जाती है और बेसमेंट में नहीं जाती तो यहां चल सकती है। सबसे वरिष्ठ अधिकारी को दक्षिण-पश्चिम का केबिन दें। इस केबिन की सीट की फेंसिंग को दक्षिण से घुमाकर उत्तर-पूर्व में करें और दक्षिण-पश्चिम (बैक वाल) की दीवार पर पहाड़ (बिना पानी के) का चित्र लगाएं। उत्तर या उत्तर-पूर्वी दिशा में पानी का झरना, चित्र तथा पूर्वी दीवार पर लकड़ी की घड़ी लगवायें। चहुंमुखी विकास होगा। कृप्या किसी भी कर्मचारी को दक्षिण या दक्षिण पश्चिम की ओर मुख करके न बिठाएं इससे उनका काम में मन नहीं लगेगा और छुट्टी अधिक करेंगे।



दुगर्तिनाशिनी मां दुर्गा विशेषांक  अकतूबर 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के दुगर्तिनाशिनी मां दुर्गा विशेषांक में भगवती दुर्गा के प्राकट्य की कथा, महापर्व नवरात्र पूजन विधि, नवरात्र में कुमारी पूजन, नवरात्र और विजय दशमी, मां के नौ स्वरूप, मां के विभिन्न रूपों की पूजा से ग्रह शांति, नवरात्रि की अधिष्ठात्री देवी भगवती दुर्गा, काली भी ही दुर्गा का रूप तथा देवी के 51 शक्तिपीठों का परिचय आदि ज्ञानवर्धक आलेख सम्मिलित किए गए हैं। इसके अतिरिक्त गोत्र का रहस्य एवं महत्व, लोकसभा चुनाव 2014, संस्कृत कम्प्यूटर प्रोग्रामिंग हेतु सर्वश्रेष्ठ भाषा, अंक ज्योतिष के रहस्य, कुंडली मिलान एवं वैवाहिक सुख, विभिन्न राशियों में बृहस्पति का फल व गंगा की उत्पत्ति की पौराणिक कथा आदि आलेख भी ज्ञानवर्धक व अत्यंत रोचक हैं।

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