विवाह विलम्ब में बाधक ग्रह की भूमिका

विवाह विलम्ब में बाधक ग्रह की भूमिका  

बहुधा शास्त्रों में विवाह में विलंब के लिए शनि ग्रह को ही कारण माना जाता है। ऐसी मान्यताएं हैं कि यदि शनि सप्तमस्थ होगा, सप्तम भाव पर, सप्तमेश पर दृष्टिपात करेगा या सप्तमेश के साथ युति करेगा तो अति आवश्यक रूप से विवाह में विलंब कराएगा। इसी सूत्र को मद्देनजर रखते हुए 26 जातकों की जन्मपत्रियों का निरीक्षण किया गया उन जातकों में कुछ प्रसिद्ध फिल्म अभिनेता, अभिनेत्रियां, राजनीतिक हस्तियों के साथ साधारण लोगों को भी शामिल किया गया। उन सभी जातकों के विवाह या तो हो नहीं पाए, यदि दो-तीन जातकों का विवाह हुआ तो बहुत ही देरी से हुआ। प्राचीन काल में लड़कों का विवाह 23 से 26 वर्ष तथा लड़कियों का विवाह 21 से 24 वर्ष तक करा दिया जाता था। किंतु आज के इस आधुनिक युग में शिक्षा के स्तर में वृद्धि के कारण, निःसंदेह बच्चों के विवाह की आयु में भी वृद्धि हुई है। आजकल लड़कों के लिए आयु सीमा 26 से 30 वर्ष तक तथा कन्याओं की 23 से 27 वर्ष तक हो गई है। इसी आयु को उपयुक्त आयु मानते हुए सर्वे में केवल उन्हीं पत्रियों को सम्मिलित किया गया है जिन जातकों की आयु 30 वर्ष से अधिक हो चुकी है तथा उनकी पत्रियों में विवाह में विलंब के कारण का पता लगाने की कोशिश की गई। परिणाम बहुत ही हैरान करने वाले प्राप्त हुए। अधिकांश पत्रियों में देखा गया कि विवाह में देरी का मुख्य कारण बाधक ग्रह था। कुछ मामलों में बाधक ग्रह सप्तमस्थ या बाधक ग्रह की सप्तम भाव पर दृष्टि थी। कुछ मामलों में बाधक ग्रह की सप्तमेश पर दृष्टि थी, बाधक ग्रह की सप्तमेश के साथ युति थी। जैसा कि हम जानते हैं कि विवाह मिलान में था वैवाहिक जीवन के लिए नवमांश पत्री का अवलोकन भी परमावश्यक है अतः नवमांश पत्रियों का भी अध्ययन किया गया जिसमें पता चला कि केवल एक ही जन्मपत्री में बाधक ग्रह का प्रभाव नहीं मिला। अतः विवाह में विलंब के लिए केवल शनि ग्रह को ही जिम्मेदार नहीं माना जा सकता। अतः कुंडली मिलान के समय ज्योतिषी गणों को चाहिए कि कुंडली में बाधक ग्रह का अवश्य विचार करें। जैसा कि हम सभी भली-भांति जानते हैं कि चर लग्नों के लिए एकादशेश, स्थिर लग्नों के लिए नवमेश, द्विस्वभाव लग्नों के लिए सप्तमेश बाधक होता है। लग्न अनुसार बाधक ग्रहों का चार्ट एक दृष्टि में देखते हैंः लग्न बाधक ग्रह लग्न बाधक ग्रह मेष शनि तुला सूर्य वृष शनि वृश्चिक चंद्र मिथुन गुरु धनु बुध कर्क शुक्र मकर मंगल सिंह मंगल कुंभ शुक्र कन्या गुरु मीन बुध उदाहरण कुंडली 1- प्रियंका चोपड़ा (अभिनेत्री) उपरोक्त जन्मकुंडली मेष लग्न की है। मेष लग्न के लिए शनि बाधक होता है। शनि छठे घर में स्थित होकर दशम दृष्टि से सप्तमेश शुक्र को देख रहा है। अतः 34 वर्ष की आयु होने पर भी प्रियंका चोपड़ा का विवाह नहीं हो पाया। उदाहरण कुंडली 2- कैटरीना कैफ (अभिनेत्री) उपरोक्त कुंडली में शनि सप्तमेश होकर उच्च राशि में केंद्र में स्थित है। फिर भी विवाह नहीं हो पाया। इस कुंडली में शुक्र बाधक होकर लग्नस्थ है तथा सप्तम भाव पर पूण दृष्टि डाल रहा है। अतः 32 वर्ष की आयु होने पर भी विवाह संभव नहीं हो पाया। उदाहरण कुंडली 3 - एकता कपूर (निर्माता-निर्देशक) सप्तमेश शनि द्वादशस्थ है, मित्र क्षेत्री है तथा योगकारक मंगल के द्वारा दृष्ट भी है। किंतु बाधक शुक्र स्वक्षेत्री होकर लग्नस्थ है तथा सप्तम भाव को सप्तम दृष्टि से देख रहा है। अतः 41 वर्ष की आयु होने पर भी एकता कपूर का विवाह नहीं हुआ। उदाहरण कुंडली 4- श्री अटल बिहारी वाजपेयी (पूर्व प्रधानमंत्री) उपरोक्त कुंडली में चंद्र बाधक होकर लग्न में सप्तमेश शुक्र के साथ स्थित है जिसने सप्तमेश से युति करते हुए सप्तम भाव को भी ग्रसित कर दिया। इसी कारण से माननीय वाजपेयी जी विवाह बंध् ान में न बंध सके। उदाहरण कुंडली 5- श्री राहुल गांधी (कांग्रेस उपाध्यक्ष) उपरोक्त कुंडली में सप्तमेश चंद्र द्वादशस्थ है तथा बाधक मंगल के द्वारा दृष्ट है। अतः 46 वर्ष की आयु होने पर भी विवाह कार्य संभव नहीं हो पाया। उदाहरण कुंडली 6 - करीना कपूर खान (अभिनेत्री) करीना की कुंडली में बुध बाधक ग्रह होने के साथ-साथ सप्तमेश भी है जो सूर्य तथा शनि के साथ स्वराशिस्थ है। करीना का विवाह हुआ 34 वर्ष की आयु में तथा शनि की सप्तमेश के साथ युति होने के कारण अंतर्जातीय तथा अपने से अधिक उम्र के जातक के साथ हुआ। उदाहरण कुंडली 7 - तुषार कपूर (अभिनेता) तुषार की कुंडली में बाधक बुध सप्तमेश की भी भूमिका में है जोकि सूर्य के साथ बैठकर अस्तंगत है। अतः 40 वर्ष की आयु होने पर भी जातक का विवाह नहीं हुआ। उदाहरण कुंडली 8 - जाॅन अब्राहम (अभिनेता) इस कुंडली में शुक्र बाधक तथा योगकारक है जोकि दशम भाव में स्थित है जिसका सप्तम भाव था सप्तमेश से किसी प्रकार का संबंध नहीं बन रहा। किंतु सप्तमेश सूर्य गुरु तथा राहु के द्वारा निर्मित चांडाल योग से पीड़ित है। अतः जातक का विवाह सन् 2015 में लगभग 43 वर्ष की आयु में संभव हुआ। ठीक इसी प्रकार की स्थिति एक अन्य कन्या की जन्मपत्री में देखने में आई। उदाहरण कुंडली 9 - कन्या जातक इस जन्मपत्री में सप्तमेश मंगल गुरु तथा राहु के द्व ारा निर्मित चांडाल योग से पीड़ित है अतः कन्या का विवाह 33वें वर्ष में 2013 में संपन्न हुआ। उदाहरण कुंडली 10 - सुष्मिता सेन (अभिनेत्री) जैसा कि हम जानते हैं कि तुला लग्न के जातकों के लिए सूर्य बाधक होता है। लग्न कुंडली में सूर्य का सप्तम भाव, सप्तमेश से कोई संबंध नहीं बन रहा। लेकिन बाधक सूर्य कुंडली के द्वितीय भाव (कुटुंब भाव) में स्थित है। वहीं सूर्य चंद्र कुंडली में सप्तम भाव में स्थित है। इसी वजह से 41 वर्ष की आयु होने पर भी जातिका का विवाह संभव न हुआ। ऐसे ही ग्रह स्थिति एक अन्य कन्या की जन्मकुंडली में प्राप्त हुई। उदाहरण कुंडली 11 इस कुंडली के अनुसार नवमेश शनि बाधक बनता है जिसका सप्तम भाव या सप्तमेश से किसी प्रकार का संबंध नहीं बन रहा। किंतु वहीं शनि चंद्र कुंडली में उच्च राशिस्थ होकर सप्तमस्थ है। अतः 32 वर्ष पूर्ण होने पर भी कन्या का विवाह संभव न हो सका। कुंडली नं. 10 तथा 11 में एक समानता पाई गई। दोनों ही जन्म पत्रियों में शुक्र नीच राशि में स्थित है। कुछ कुंडलियों में गोपनीयता के कारण कन्याओं के नाम प्रदर्शित नहीं किए गए। यूं तो कुंडली में किसी भी विषय पर विचार करने के लिए भाव, भावेश, कारक, दशा, गोचर, योग आदि का अध्ययन अनिवार्य है। किंतु एक शोध अध्ययन के उद्देश्य से हमने 26 कुंडलियों का निरीक्षण किया जिनमें से 16 मामलों में बाधक की सप्तम भाव पर दृष्टि, सप्तम में स्थिति या सप्तमेश से कोई संबंध पाया गया। 4 मामलों में बाधक का प्रभाव चंद्र कुंडली में देखने को मिला। 1 मामले में बाधक का नवमांश कुंडली में कुप्रभाव रहा। 2 मामलों में सप्तमेश ही बाधक था (धनु लग्न सप्तमेश बुध बाधक होता है) जो कि सूर्य के साथ अस्त था तथा 2 मामलों में सप्तमेश गुरु तथा राहु द्वारा निर्मित चांडाल योग से ग्रसित था। 1 मामले में सप्तमेश द्वादशस्थ मिला। क्र. कुंडलियों में दोष कुल पत्रियां: 1. बाधक की सप्तम भाव, सप्तमेश पर दृष्टि या सप्तम में स्थिति 16 61.53 2. चंद्र कुंडली में बाधक की सप्तम भाव, सप्तमेश पर दृष्टि या सप्तम में स्थिति 4 15.38 3. नवमांश कुंडली में बाधक की सप्तम भाव, सप्तमेश पर दृष्टि या सप्तम में स्थिति 1 3.84 4. सप्तमेश सूर्य के साथ अस्त 2 7.69 5. सप्तमेश चांडाल योग से पीड़ित 2 7.69 6. सप्तमेश द्वादश भाव में स्थित 1 3.84 कुल कुंडलियां 26 100ः शोध अध्ययन से स्पष्ट है कि ज्योतिषियों को चाहिए कि विवाह विलंब के मामलों में बाधक ग्रह की भूमिका का अवलोकन अवश्य करें। संबंधित ग्रह का दान, जप, होम आदि उचित उपाय कराकर जातक की समस्याओं का समाध् ाान कराएं।


विवाह एवं शिशु विशेषांक  जुलाई 2016

रिसर्च जर्नल के इस विशेषांक में रिसर्च से सम्बन्धित लेख ही हिन्दी एवं अंग्रजी दोनों भाषाओं में सम्मिलित किये गये हैं, जिनमें से कुछ महत्वपूर्ण लेख इस प्रकार हैं - व्यवसायी बनने के योगों का निर्धारण प्रतिपादन, मांगलिक योग, ज्योतिष में उदर रोग, सरकारी नौकरी प्रदाता हैं सूर्यदेव, मधुमेह रोग में ग्रहों की भूमिका, विवाह विलम्ब में बाधक ग्रह की भूमिका आदि। इसके अतिरिक्त वास्तु पर भी एक लेख सम्मिलित किया गया है।

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