सर्वकार्य सिद्धि हेतु शुद्ध कड़ा

सर्वकार्य सिद्धि हेतु शुद्ध कड़ा  

फ्यूचर समाचार पत्रिका के सभी पाठकों को अप्रैल 2010 अंक के साथ सर्वकार्य सिद्धि हेतु ऊर्जादायक कड़ा दिया जा रहा है जिसके स्पर्श मात्र से शरीर में स्फूर्ति एवं ऊर्जा का प्रवाह होने लगता है। त्वचा पर कड़े का स्पर्श शुभ प्रभाव देता है। नकारात्मक ऊर्जा एवं विकारों को यह अवशोषित कर लेता है। प्रत्येक व्यक्ति की स्वस्थ एवं ऊर्जावान जीवन जीने की अभिलाषा होती है किंतु इस कलियुग में लोग स्वयं अस्वस्थ तथा ऊर्जाहीन महसूस कर रहे हैें। ऐसे में ऊर्जा एवं शक्तिदायक सर्वकार्य सिद्धि हेतु शुद्ध कड़ा धारण करना अत्यंत लाभदायक सिद्ध होगा। सर्वकार्य सिद्धि हेतु शुद्ध कड़ा रौद्र का प्रतीक है। इनकी साधना से सभी ग्रह प्रसन्न होते हैं इस कड़े को धारण करने से व्यक्ति में नई स्फूर्ति एवं शक्ति का संचार होता है और सुख-समृद्धि, यश तथा धन की प्राप्ति होती है। यह धारक को चिंता, भय तथा अशुभ ग्रहों के प्रभाव से मुक्त रखता है और बुरी शक्तियों, बीमारियों तथा दुर्घटनाओं से रक्षा करता है। अमंगल को मंगल करने वाला यह सर्वोत्तम सर्वकार्य सिद्धि हेतु शुद्ध कड़ा का प्रयोग किया जाता है। यह साधक के लिए अतिशुभ है। इस कड़े को धारण करने से जातक के क्रोध, मद, मोह, लोभ, पाप आदि नष्ट होते हैं तथा जीवन सुखमय होता है। उपयोग: किसी भी दिन सुबह स्नानादि करने के बाद मनोवांछित फल प्राप्त करने के लिए सर्वकार्य सिद्धि हेतु शुद्ध कड़ा को पहन सकते हैं। लाभ Û इस कड़े को हमेशा अपने सीधे हाथ में पहन कर रखने से स्फूर्ति प्राप्त होती है एवं सभी ग्रहों की कृपा बनी रहती है। Û बड़े से बड़े शत्रु पर विजय प्राप्त करने के लिए एवं वातावरण को अपने अनुकूल बनाने के लिए कड़े को हमेशा धारण करके रखना चाहिए। Û कोर्ट कचहरी मुकदमा आदि में विजय एवं दुर्घटनाओं से यह कड़ा बचाव करता है। Û एकांत एवं सुनसान स्थान पर रहने वाले व्यक्ति को कड़ा धारण करने से निर्भयता प्राप्त होती है। Û पारिवारिक शक्ति की वृद्धि के लिए कड़ा धारण करें। मंत्र: जिस साधक का मनोबल निर्बल रहता हो उसे इस कड़े को धारण करने के बाद निम्न मंत्र का उच्चारण करना चाहिए। सर्वकार्य सिद्धि मंत्र: सर्वमंगल मांगलेय शिवे सर्वाध साधिके शरणेत्रयमम्बके गौरी नारायणी नमोस्तुते।


पंचांग विशेषांक   अप्रैल 2010

इस अनुपम विशेषांक में पंचांग के इतिहास विकास गणना विधि, पंचांगों की भिन्नता, तिथि गणित, पंचांग सुधार की आवश्यकता, मुख्य पंचांगों की सूची व पंचांग परिचय आदि अत्यंत उपयोगी विषयों की विस्तृत चर्चा की गई है। पावन स्थल नामक स्तंभ के अंतर्गत तीर्थराज कैलाश मानसरोवर का रोचक वर्णन किया गया है।

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