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अनियमित आकार- नकारात्मक प्रभाव

अनियमित आकार- नकारात्मक प्रभाव  

पंडित जी का पिछले माह हिमाचल के एक प्रसिद्ध उद्योगपति के फरीदाबाद में बने बंगले में जाना हुआ। उनकी पंडित जी से उनके दिल्ली के काॅरपोरेट आॅफिस की विजिट के दौरान मुलाकात हुई थी जिससे प्रभावित होकर उन्होंने अपने बंगले की विजिट के लिए आमन्त्रित किया। उनसे मिलने पर उन्होंने बताया कि उनके व्यवसाय में कुछ मतभेद चल रहे हैं और काफी उतार-चढ़ाव आते रहते हैं। अपनी बेटियों के भविष्य को लेकर वह काफी चिंतित रहते हैं तथा परिवार में सामंजस्य की कमी है। वास्तु परीक्षण करने पर पाए गए वास्तुदोष - उनके घर का आकार अनियमित था। पूर्व बढ़ रहा था जो कि विकास का सूचक है परन्तु दक्षिण-पूर्व का कोना कट रहा था जिससे घर में सुस्ती, जीवन में जोश एवं सकारात्मक ऊर्जा की कमी तथा स्त्रियों की स्वास्थ्य हानि होती है। उत्तर-पश्चिम कोना बढ़ा हुआ था जो कि अपयश, कार्यों में विलम्ब तथा घर की बेटियों का जीवन संघर्षमय होने का कारण होता है। - उत्तर, उत्तर-पूर्व में रसोई थी जो कि भारी खर्च व वैचारिक मतभेद का कारण होता है। - सीढियां नीचे से बंद थी जो कि सभी ओर से विकास में अवरोधक होती है और बेटियों के लिए हानिकारक होती है। - घर के मुख्य द्वार में प्रवेश करते ही सामने शीशा लगा था जो कि पूर्व से आ रही सकारात्मक ऊर्जा को घर में आने से रोकता है। सुझाव - दक्षिण-पूर्व में परगोला बनाने की सलाह दी गई तथा उत्तर-पश्चिम में बनी बाहरी सीढ़ियों की छत जो कि मुख्य भवन से जुड़ी हुई थी, उसे हटाने को कहा गया जिससे उत्तर पश्चिम के बढ़ने का दोष खत्म हो सके। रसोई में से एक दरवाजा इन्वर्टर रुम की तरफ बनाने को कहा जिससे वह कोना मुख्य बिल्डिंग से जुड़ा रहे अन्यथा सीढ़ियों को अलग करते ही उत्तर-पश्चिम का कोना कट जाएगा। - रसोई की नकारात्मक ऊर्जा को कम करने के लिए हमने उन्हें उत्तर-पश्चिम में रखी गैस को ही इस्तेमाल करने के लिए कहा और अन्य बिजली के उपकरण भी इसी दिशा में रखें ऐसा कहा गया। - दोनो सीढ़ियों को जितनी जल्द हो सके नीचे से खोलने को कहा गया। - प्रवेश द्वार में लगे शीशे को हटाकर उत्तर की दीवार पर लगाने की सलाह दी गई। कुछ अन्य सुझाव - उन्हें कहा गया कि घर की सभी घडियां जो दक्षिण की दीवार पर लगी थीं उन्हें पूर्व या उत्तर में लगाएं जिससे कि सब का स्वास्थ्य भी ठीक रहेगा और आर्थिक उन्नति होगी। - ड्राइंग रुम के उत्तर-पूर्व में छोटा पानी का फव्वारा लगाने को कहा गया जिससे घर में वंश वृद्धि तथा सुख समृद्धि बनी रहे। - ड्राइंग रुम के दरवाजे के नीचे चैखट बनाने को कहा गया जिससे वह कमरा ज्यादा इस्तेमाल हो सके तथा शुभ ऊर्जा का प्रवाह बना रहे। - रसोई में दक्षिण में बने सिंक को कम से कम तथा उत्तर के सिंक को ज्यादा इस्तेमाल करने को कहा जिससे अनचाहे खर्चे कम हो सकें और आपसी सामंजस्य भी बना रहे। ़

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