ग्रहों एवं दिशाओं से संबंधित व्यवसाय

ग्रहों एवं दिशाओं से संबंधित व्यवसाय  

प्र0- उतर-पश्चिम दिशा में किस तरफ का व्यवसाय या कार्य करना चाहिए ? उ0- उतर-पश्चिम दिशा का स्वामी चंद्रमा है जिसे रक्त, मन, संचार का कारक माना जाता है। उतर-पश्चिम अभिमुख भूखंड पर जल तथा जल से उत्पन्न पदार्थ, सिंघाडा, मछली, दूध, दही एवं घी, से संबंधित व्यवसाय करना लाभप्रद होता है। इस तरह की भूखंड पर दुधारू जानवर, घोडे का व्यापार,, कपडे की खरीद-बिक्री, खंेती, शराब, अल्कोहल, चाॅंदी एवं एयर कंडीशन सें संबंधित व्यवसाय भी विशेष शुभफलप्रद होता है। आइसक्रीम या शीतल पेय से संबंधित व्यवसाय के लिए सबसे उपर्युक्त उतर-पश्चिम (वायव्य) की दिशा है। काॅच की खाली बोतले एवं गैस एवं पेय भरने की मशीन दक्षिण में रखें । दूध से संबंधित कार्य वायव्य दिशा की ओर करना लाभप्रद होता है। खासकर कच्चे दूध का भंडारण वायव्य की ओर करना चाहिए क्योंकि दूध का कारक चंद्रमा है। इसे भूलकर भी नैऋत्य या पश्चिम दिशा में नही करना चाहिएं। नैऋत्य में राहु एवं पश्चिम में शनि ग्रह का अधिपत्य होता है। राहु और शनि चंद्रमा के शत्रु होते हैं, फलस्वरूप इस क्षेत्र में दूध का संग्रह करने से दूध शीघ्र खराब हो जाता है। प्र0- पश्चिम दिशा में किस तरफ का व्यवसाय या कार्य करना चाहिए? उ0- पश्चिम दिशा का स्वामी शनि है। इस दिशा पर लोहे का समान, चमडे़ का कार्य, कोयला, नीच कर्म, वेश्या की दलाली, एवं लकडी से संबंधित कार्य करना लाभप्रद होता है। शराब एवं बीयर के कारखाना, लेदर एवं चमडे़ के फैक्ट्री के लिए शनि का योग कारक होना आवश्यक है। फर्नीचर तथा लकडी की फैक्ट्री का भी शनि से गहरा संबंध है साथ ही शनि लोहे का कारक भी है तथा सभी ट्रांसर्पोट के साधन जिसका संबंध पैसे कमाने से है वह शनि के प्रभावशाली होने से प्राप्त होता है। डिटर्जेट तथा साबुन के फैक्ट्री इन कार्यो के लिए पश्चिम दिशा अभिमुख भूखंड विशेष शुभफलप्रद होता है। क्योंकि साबुन की फैक्ट्री का संबंध शनि से है। पश्चिम अभिमुख भूखंड आॅंखो के डाॅक्टर एवं सीने से संबंधित डाॅक्टर के लिए विशेष अच्छा होता है। इस दिशा पर शनि ग्रह का प्रभाव होता है। शनि गंभीर एवं दार्शनिक ग्रह होने के कारण इंजीनियर के लिए योग कारक होता है। अतः यह दिशा कम्प्यूटर इंजीनियर, इलेक्ट्रीकल इंजीनियर एवं सिविल इंजीनियर के लिए विशेष शुभफलप्रद होता है। प्र0- दक्षिण-पश्चिम दिशा में किस तरफ का व्यवसाय या कार्य करना चाहिए ? उ0- दक्षिण-पश्चिम दिशा का स्वामी राहु है। घर के डेªनेज पाईप लाईन, रसोई घर में प्रयोग होने वाली चिमनी जिससेे धूंआ बाहर जाती है, बिजली में प्रयोग होने वाली सामग्री, जहर से संबंधित कार्य, बैट्री आदि कार्यो के लिए दक्षिण-पश्चिम का दिशा विशेष लाभप्रद होता है। शराब एवं नशे से संबंधित वस्तुओं पर राहु का अधिपत्य होता है इसलिए भरी हुई शराब की बोतलें नैऋत्य कोण में रखें। शराब की खाली बोतलें, काॅंच की ग्लास आदि दक्षिण दिशा में रखें। पश्चिम में शनि, दक्षिण-पश्चिम में राहु, एवं दक्षिण में मंगल जैसे तामसिक ग्रह का प्रभाव होता है। इसलिए मदिरालय में मैनेजर को पश्चिम या दक्षिण की तरफ मुख कर बैठना चाहिए। इसके साथ ही राजनीतिज्ञों, गुप्तचरों तथा वैज्ञानिकों के लिए दक्षिण-पश्चिम अभिमुख भूखंड विशेष लाभकारी होता है। प्र0- दक्षिण दिशा में किस तरफ का व्यवसाय या कार्य करना चाहिए? उ0- दक्षिण दिशा का स्वामी मंगल है। यह दिशा खाने-पीने की वस्तुएं, डायनिंग हाॅल, होटल, रेंस्तोरा, होटल व्यवसाय के लिए लाभप्रद होता है। खाने-पीने की सभी वस्तुओं का संबंध मंगल से है अतः जो कार्य अग्नि तथा पीने के वस्तुओं से जुड़ जाता है उनके लिए मंगल की शुभ स्थिति फलदायी होती है। बिजली, रेडियो, टी॰वी॰, कम्प्यूटर, सर्राफे का कार्य, खुफियागिरी का कार्य, फौज की नौकरी पुलिस, सेना, डाॅक्टर, वकील आदि के लिए दक्षिण अभिमुख भूखंड शुभफलदायी होती है। गैस पर मंगल का अधिकार है इसलिए गैस एजेंसी के व्यवसाय में गैस के सिलेंडर दक्षिण दिशा में रखना उपर्युक्त होता है। गैस के सिलेंडर नैऋत्य दिशा की ओर न रखें क्योंकि नैऋत्य दिशा का स्वामी राहु है तथा गैस मंगल का प्रतिकात्मक वस्तु है। अतः इस कारण दोनो के संयोग होने से अंगारक योग का निर्माण होता है। जिस कारण सिंलेडर फटना या गैस रिसने जैसी घटनाएं होती है। पेट्रोल पंप मंगल के अधिकार क्षेत्र में आता है इसलिए इसे भूखंड के आग्नेय या दक्षिण के क्षेत्र में रखना सबसे उपर्युक्त होता है।


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