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अंक एवं आपरेशन दुर्योधन

अंक एवं आपरेशन दुर्योधन  

अंकों का प्रभाव समकालीन घटनाओं पर प्रत्यक्ष रूप से देखा जा सकता है। वर्ष 2005 के अंतिम मास में खोजी पत्रकारों ने 2 ऐसी घटनाओं का पता लगाया जिन की गूंज स्वतंत्र भारत के इतिहास में सदैव गूंजती रहेगी। पहली घटना आपरेषन दुर्योधन के नाम से तथा दूसरी आपरेषन चक्रव्यूह के नाम से प्रचारित प्रसारित हुई। दोनों घटनाओं के प्रचारित होने के मध्य 7 दिनों का अंतर था। अंक ज्योतिष के अनुसार अंक 7 चंद्रमा का धनात्मक अंक है। दोनों ही घटनाएं सोमवार के दिन प्रकाष में आईं। सोमवार पर नाम के अनुरूप चंद्रमा का अधिकार है। जहां पहली घटना में संसद सदस्यों को संसद में प्रष्न उठाने के लिए धन लेते हुए बताया गया था वहीं दूसरी घटना में संसद सदस्यों को सांसद निधि डच्स्।क् का दुरुपयोग करने हेतु दोषी बताया गया था। अंक ज्योतिष के अनुसार डच्स्।क् का षब्दंाक 2 ;4़8़3़1़4त्र20द्ध आता है जिस पर पुनः चन्द्रमा का अधिकार है। यह चंद्रमा का ऋणात्मक प्रभाव देने वाला अंक है। यह अंक परिवर्तन का द्योतक है। आपरेषन दुर्योधन ‘कोबरा पोस्ट आज तक’ के द्वारा सम्पादित किया गया था। ब्व्ठत्।च्व्ैज्.।।श्रज्।ज्ञ क े नामांकों एकल अंक 2 ; 3़7़ 2़ 2़ 1़ 8़ 7़ 3़ 4़1़1़1़4़1़2त्र 4़7त्र1़1त्र 2द्ध चंद्रमा का ऋणात्मक अंक है। 11 ( 1$1 = 2) मास तक चलने वाले आपरेषन दुर्योधन के घेरे में आए 11 ( 1$1 = 2 ) सांसदों से संबंधित कुल 56 ( 5$6 = 11 = 1$1 = 2 टेप बनाए गए। जिस अधिकतम राषि का आदान प्रदान बताया गया वह 1,10000 ( 1$1$0$0$0$0 = 2 ) थी। जिस पार्टी के अधिकतम सदस्यों के नाम सामने आए उस पार्टी के नाम के अंकों का एकल योग 2 ;ठश्रच् ़1़8 त्र 11 त्र1़1त्र 2द्ध आता है। आपरेषन दुर्योधन में मुख्य भूमिका निभा रही सुहासिनी राज के नाम में कुल 11 (1$1= 2 ) अक्षर हैं ै न ी ं े प द प त् ं र ; 3 ़ 6़ 5़1़3़1़5़1़2़1़1त्र 2़9त्र11त्र1़1त्र2द्ध इन अक्षरों के नामांकों का एकल योग भी 2 आता है। जिन सांसद - राज्य सभा सदस्य छत्र पाल सिंह लोध को सर्वप्रथम निष्कासित किया गया, ;ब्ींजंतचंस पद ही सवकीं त्र 3़5़1़4़1़2़8़1़3़ 3़1़5़3़5़3़7़4़5़1त्र 65त्र6़5त्र11त्र1़1त्र 2द्ध उनके नाम के अंकों का योग भी 2 आता है। अन्ना पाटिल का नामांक ;।ददं चंजपस 1़5़5़1़8़1़4़1़3त्र 29त्र2़9त्र11 त्र1़1त्र2द्ध भी 2 है। अनिरुद्ध बहल ने एक कल्पित नाम नवरत्न मल्होत्रा से आपरेषन दुर्योधन सम्पादित किया था। नवरत्न मल्होत्रा छ ं अ त ं ज ं द ड ं स ी व ज त ं के नाम का एकल अंक ;5़1़ 6़ 2़1़ 4़1़ 5़ 4 ़1़ 3़5़7़ 4़2़1त्र5़2त्र7द्ध 7 होता है। इस नाम के 16 अक्षर अंक 7 का प्रतिनिधित्व करते हैं. बहल द्वारा चलाए गए इस आपरेषन में हरीष बाड़ोला, चंद्रभान गुप्ता, एम के त्रिपाठी उर्फ चोटी वाला, मोहन मनी, दिनेष चन्द्र, रविन्द्र कुमार तथा विजय 7 मध्यस्थ थे। आपरेषन दुर्योधन में कुल 19 अक्षर हैं जिनका एकल योग 1 $ 9 = 1 है। एक सूर्य का धनात्मक अंक है। व् च म त ं ज प व द क् न त ल व क ी ं द ं का एकल अंक 4 ; 7 ़ 8 ़ 5़ 2 ़ 1़ 4़ 1 ़ 7़ 5़ 4 ़ 6 ़ 2़1 ़ 7़ 4 ़ 5़ 1 ़ 5 ़1त्र 7़6त्र1़3त्र 4 द्ध सूर्य का ऋणात्मक अंक है। इन दोनों अंकों का प्रभाव घटनाक्रम पर सुस्पष्ट है। आपरेषन दुर्योधन का परिणाम 12.12 2005 को देष की जनता के सामने आया। इस दिन की एकल संख्या ( 1$ 2$ 1$2 $2$0$0$5 = 13 = 4 ) 4 सूर्य का ऋणात्मक अंक है। 1 यह सैफरायल का मत है। कीरो के मत से अंक 7 नेप्च्यून के प्रभाव क्षेत्र का अंक हैं। अस अंक से स्वतंत्र अस्तित्व का बोध होता है। इस प्रकार हम देखते हैं कि किसी घटना विशेष पर किसी अंक विशेष का प्रभाव अवश्य होता है।

पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अप्रैल 2006

सभ्यता के आरम्भिक काल से ही फलकथन की विभिन्न पद्धतियां विश्व के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित रही हैं। इन पद्धतियों में से अंक ज्योतिष का अपना अलग महत्व रहा है यहां तक कि अंक ज्योतिष भी विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में प्रचलित है तथा इन सब में आपस में ही विभिन्नता देखने को मिलती है। हालांकि सभी प्रकार के अंक ज्योतिष के उद्देश्य वही हैं तथा इनका मूल उद्देश्य मनुष्य को मार्गदर्शन देकर उनका भविष्य बेहतर करना तथा वर्तमान दशा को सुधारना है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अंक ज्योतिष के आधार पर फलकथन को वरीयता दी गयी है। इसमें मुख्यतः कीरो की पद्धति का अनुशरण किया गया है। इसके अन्तर्गत समाविष्ट महत्वपूर्ण आलेखों में- अंक ज्योतिष का परिचय एवं महत्व, अंक फलित के त्रिकोण प्रेम, बुद्धि एवं धन, मूलांक से जानिए भाग्योदय का समय, नाम बदलकर भाग्य बदलिए, हिन्दी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन, अंक ज्योतिष का महत्वपूर्ण पहलू स्तूप, अंक एवं आॅपरेशन दुर्योधन, मूलांक, रोग और उपाय, अंक विद्या द्वारा जन्मकुण्डली का विश्लेषण आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

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