मंगल यंत्र/ मंगल मंत्र

मंगल यंत्र/ मंगल मंत्र  

ज्योतिष शास्त्र में व्यक्ति के साहस, छोटे भाई-बहन, आंतरिक बल, अचल संपत्ति, रोग, शत्रुता, रक्त, शल्य चिकित्सा, विज्ञान, तर्क, भूमि, अग्नि, रक्षा, सौतेली माता, तीव्र काम भावना, क्रोध, घृणा, हिंसा, पाप, आकस्मिक मृत्यु, हत्या, दुर्घटना, बहादुरी, विरोधियों, नैतिकता की हानि का कारक मंगल ग्रह है। मंगल यंत्र का प्रयोग विशेष रूप से जन्म कुंडली में मंगल की अशुभता को दूर करने के लिए, मंगलिक दोष निवारण हेतु, जमीन-जायदाद के विवादों को हल करने के लिए, शत्रुओं पर विजय प्राप्ति के लिए तथा कोर्ट-कचहरी के मामलों में सफलता प्राप्ति के लिए किया जाता है। मंगल यंत्र का प्रयोग किसी कुंडली में शुभ अथवा सकारात्मक रूप से कार्य कर रहे मंगल को अतिरिक्त बल प्रदान करने के लिए भी किया जाता है जिससे कुंडली में शुभ मंगल की शक्ति बढ़ने से जातक को अतिरिक्त लाभ प्राप्त होते हैं मंगल यंत्र का प्रयोग किसी कुंडली में अशुभ मंगल द्वारा बनाए जाने वाले दोषों को कम करने के लिए अथवा उनके निवारण के लिए किया जा सकता है। अशुभ मंगल द्वारा किसी कुंडली मं बनाए जाने वाले दोषों में वैदिक ज्योतिष के अनुसार सबसे अनिष्टकारी दोष मांगलिक दोष को माना जाता है तथा इस दोष का निर्माण किसी कुंडली में अशुभ मंगल के पहले, दूसरे, चैथे, सातवें, आठवें अथवा बारहवें घर में स्थित हो जाने से होता है तथा इस दोष के दुष्प्रभाव के कारण जातक के वैवाहिक जीवन में कई प्रकार के कष्ट तथा बाधाएं आ सकती हैं। किसी कुंडली में बनने वाले मांगलिक दोष के निवारण के लिए मंगल के मंत्र तथा यंत्र की सहायता ही मुख्य रूप से ली जाती है तथा इनकी सहायता से किसी कुंडली विशेष में मांगलिक दोष के कारण आने वाली समस्याओं तथा बाधाओं को भी बहुत सीमा तक कम किया जा सकता है जिससे जातक अपेक्षाकृत अच्छा वैवाहिक जीवन व्यतीत करने में सक्षम हो जाता है। मांगलिक दोष तथा कुंडली में मंगल के द्वारा बनाए जाने वाले किसी अन्य दोष के निवारण के अतिरिक्त मंगल यंत्र का प्रयोग मंगल ग्रह की सामान्य तथा विशिष्ट विशेषताओं के साथ जुड़े लाभ प्राप्त करने के लिए भी किया जा सकता है। मंगल यंत्र के शुभ प्रभाव से जातक के शरीर में बल तथा पराक्रम की वृद्धि होती है तथा जातक मानसिक रूप से भी अधिक सक्षम हो जाता है जिसके कारण ऐसा जातक अनेक प्रकार के कार्यों को पहले की अपेक्षा अधिक सहजता तथा कुशलता से कर पाता है। मंगल यंत्र का शुभ प्रभाव जातक के अपने भाइयों तथा मित्रों के साथ संबंध सुधारने में भी सहायता कर सकता है जिसके चलते इस यंत्र के शुभ प्रभाव में आने वाला जातक अपने भाइयों तथा मित्रों की सहायता से जीवन में उन्नति कर सकता है क्योंकि इस यंत्र के शुभ प्रभाव के कारण जातक को हितकारी एवम् समर्पित मित्र प्राप्त हो सकते हैं जो जातक को उसके जीवन के कई क्षेत्रों में उन्नति करने में सहायता कर सकते हैं। इसके अतिरिक्त मंगल यंत्र का प्रयोग जादू टोने इत्यादि को दूर करने के लिए भी किया जाता है क्योंकि मंगल यंत्र पर सदा ही मंगल ग्रह के इष्ट भगवान हनुमान की कृपा रहती है जिसके चलते भगवान हनुमान की अपार शक्ति से यह यंत्र अनेक प्रकार के जादू टोनों को दूर करने में भी समर्थ होता है। इसके अतिरिक्त मंगल यंत्र का शुभ प्रभाव जातक को उसकी कुंडली में मंगल ग्रह द्वारा प्रदर्शित की जाने वाली विशिष्ट विशेषताओं से संबंधित लाभ भी प्रदान कर सकता है। उदाहरण के लिए यदि किसी जातक का मान, प्रतिष्ठा, प्रभुत्व तथा ख्याति उसकी कुंडली के अनुसार मंगल ग्रह की विशेषताओं की परिधि में आते हैं तो मंगल यंत्र के शुभ प्रभाव से ऐसा जातक ऐसे कार्य कर सकता है जिससे उसे सम्मान, प्रतिष्ठा, प्रभुत्व तथा ख्याति प्राप्त हो। इस प्रकार मंगल यंत्र का प्रयोग विभिन्न जातकों को उनकी कुंडली में मंगल की स्थिति के आधार पर भिन्न-भिन्न प्रकार के शुभ फल प्रदान कर सकता है। मंगल यंत्र से शुभ फल प्राप्त करने के लिए यह आवश्यक है कि, यह यंत्र प्राण प्रतिष्ठित हो। मंगल यंत्र की स्थापना के दिन नहाने के पश्चात् अपने यंत्र को सामने रखकर 11 या 21 बार मंगल के बीज मंत्र का जाप करें तथा तत्पश्चात् अपने मंगल यंत्र पर थोड़े से गंगाजल अथवा कच्चे दूध के छींटे दें, मंगल महाराज से इस यंत्र के माध्यम से अधिक से अधिक शुभ फल प्रदान करने की प्रार्थना करें तत्पश्चात् इस यंत्र को इसके लिए निश्चित किये गये स्थान पर स्थापित कर दें। आपका मंगल यंत्र अब स्थापित हो चुका है तथा इस यंत्र से निरंतर शुभ फल प्राप्त करते रहने के लिए आपको इस यंत्र की नियमित रूप से पूजा करनी होती है। प्रतिदिन स्नान करने के पश्चात अपने मंगल यंत्र की स्थापना वाले स्थान पर जाएं तथा इस यंत्र को नमन करके 11 या 21 मंगल बीज मंत्रों के उच्चारण के पश्चात अपने इच्छित फल इस यंत्र से मांगें। अपने पास स्थापित किए गये मंगल यंत्र की नियमित रूप से पूजा करने से आपके और आपके मंगल यंत्र के मध्य एक शक्तिशाली संबंध स्थापित हो जाता है जिसके कारण यह यंत्र आपको अधिक से अधिक लाभ प्रदान करने के लिए प्रेरित होता है। मंगल ग्रह बीज मंत्र: ऊँ क्रां क्रीं क्रौं सः भौमाय नमः।


पराविद्या विशेषांक  जून 2013

फ्यूचर समाचार पत्रिका के पराविद्या विशेषांक में शनि जयंती, विवाह, विवाह में विलंब के कारण व निवारण, कुंडली में पंचमहापुरूष योग एवं रत्न चयन, तबादला एक ज्योतिषीय विश्लेषण, शुक्र की दशा का फल, शनि चंद्र का विष योग, उंगली और उंगलियों के दूरी का फल, दक्षिणावर्ती शंख, बृहस्पति का प्रिय केसर, दाह संस्कार-अंतिम संस्कार, परवेज मुशर्रफ के सितारे गर्दीश में, चांद ने डुबोया टाइटेनिक को, अंक ज्योतिष के रहस्य, विभिन्न भावों में मंगल का फल, स्वर्गीय जगदंबा प्रसाद की जीवन कथा, महोत्कट विनायक की पौराणिक कथा के अतिरिक्त, काल सर्प दोष से मुक्ति के लिए लाल किताब के अचुक उपाय, वास्तु प्रश्नोत्तरी, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, प्राकृतिक ऊर्जा संतुलन, विवादित वास्तु, विशिष्ट महत्व है काशी के काल भैरव का तथा हस्तरेखा द्वारा जन्मकुंडली निर्माण की विधियों पर विस्तृत रूप से चर्चा की गई है।

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