कालसर्प दोष निवारक यंत्र-मंत्र

कालसर्प दोष निवारक यंत्र-मंत्र  

काल सर्प दोष निवारक यंत्र-मंत्र पं. रमेश शास्त्राी वर्तमान समय में ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जातक की कुंडली में बनने वाले प्रमुख अशुभ योगों में एक काल सर्प योग भी है, हलांकि कुछ ज्योतिषियों का कहना है कि प्राचीन ज्योतिष ग्रंथों में इस योग की कोई चर्चा न होने के कारण इसकी कोई प्रामाणिकता नहीं है। इस योग से ग्रस्त अधिकांश जातकों को इसके बुरे प्रभाव झेलने पड़ते हैं, प्रायः इसीलिए ज्योतिष में इतनी प्रमुखता दी गई है। कुंडली में काल सर्प योग होने पर उसकी शांति आदि अपनी शक्ति सामथ्र्य के अनुसार अवश्य करवानी चाहिए। जिन जातकों की कुंडली में यह योग बनता हो उन्हें निम्नलिखित काल सर्प शांति सामग्री उपयोग करना चाहिए। लाॅकेट आदि को गले में धारण करें तथा यंत्र को अपने घर में स्थापित करके उसका नित्य पूजन करें। इससे काल सर्प योग के दुष्प्रभाव से बच सकते हैं। चांदी में बना काल सर्प यंत्र ला. ॅकेट इस लाॅकेट की प्राण प्रतिष्ठा करवाकर किसी शुभ मुहूर्त एवं शुभ वार को धारण कर सकते हैं। इसे धारण करने से मानसिक बल बढ़ता है और काल सर्प योग के दोष का प्रभाव कम होता है। सर्पाकार चांदी की अंगूठी यह अंगूठी भी काल सर्प योग जन्य दोष की शांति के लिए धारण की जाती है। इसे किसी शुभ मुहूर्त अथवा शुभ वार को शुद्ध कच्चे दूध से अभिषिक्त कर दायें हाथ की सर्प दोष के अशुभ प्रभाव की शांति होती है। संयुक्त रत्न रुद्राक्ष लाॅकेट यह लाॅकेट आठ मुखी रुद्राक्ष एवं राहु रत्न गोमेद से बनाया गया है। गोमेद राहु का रत्न है तथा आठ मुखी रुद्राक्ष को राहु की शांति के लिए प्रभावी माना गया है। यह लाॅकेट बुधवार अथवा शनिवार को धारण करना चाहिए। इसे धारण करने से काल सर्प दोष के कारण आने वाली सभी बाधाएं दूर होती हैं और जीवन खुशहाल होता है। काल सर्प दोष शांति यंत्र इस यंत्र की किसी शुभ मुहूर्त में पूजा, प्राण प्रतिष्ठा करके अपने घर में स्थापना करनी चाहिए। यंत्र का नित्य धूप, दीप आदि से पूजन करें। साथ ही नित्य इसके सम्मुख बैठकर नवनाग गायत्री मंत्र का 108 बार जप करने से काल सर्प योग के अशुभ प्रभाव की शांति होती है तथा जीवन में सुख समृद्धि की अभिवृद्धि होती है। नव नाग गायत्री मंत्र ¬ नव कुलाय विद्महे विषदन्ताय धीमहि तन्नो सर्पः प्रचोदयात्। अनामिका अथवा कनिष्ठिका में धारण कर सकते हैं। इसे धारण करने से आत्मविश्वास में वृद्धि तथा काल चहकृ75 सुख-समृद्धि हेतु कुछ टोटके डाॅ. उर्वशी बंधु छोटे-छोटे उपाय हर घर में लोग जानते हैं, पर उनकी विधिवत जानकारी के अभाव में वे उनके लाभ से वंचित रह जाते हैं। इस लोकप्रिय स्तंभ में उपयोगी टोटकों की विधिवत जानकारी दी जा रही है..... गृह विवाद यदि परिवार में पुरुष सदस्यों के कारण विवाद और तनाव हो व आपस में विश्वास की कमी हो, तो घर में कदंब वृक्ष की डाली पूर्णिमा के दिन गंगा जल से धोकर रखें। ध्यान रखें, डाली में कम से कम सात अखंडित पत्ते होने चाहिए। अगली पूर्णिमा को पुरानी डाली को कदंब वृक्ष के पास छोड़ आएं व नई डाली लाकर उसी विधि से रखें। किराएदार मकान खाली न करे यदि लाख प्रयत्न के बावजूद आपका किरायेदार मकान खाली न कर रहा हो, तो शनिवार की शाम को भोजपत्र पर लाल चंदन से उसका नाम लिख कर शहद में डुबो दें। शनैचरी अमावस्या हो तो बहुत अच्छा है। धीरे-धीरे स्थितियां अनुकूल होने लगेंगी। यह टोटका करते समय कोई टोके नहीं इस बात का ध्यान रखें। धन वृद्धि धन लाभ के लिए पूर्णिमा के दिन प्रातः पीपल के एक अखंडित पत्ते पर रोली से राम लिखें और उस पर बेसन का लड्डू रख कर हनुमान मंदिर में अर्पित कर दें। किए हुए उपाय को याद मत रखें। जब भी बैंक में पैसा जमा करने जाएं तो रास्ते में बिना होंठ हिलाए मन ही मन ‘श्रीं श्रीं’ मंत्र का जप अवश्य करते जाएं। इससे धन में आश्चर्यजनक रूप में वृद्धि होगी। बार-बार धन जमा करने के अवसर आएंगे। बिक्री बढ़ाने हेतु दुकान में बिक्री बढ़ाने के लिए ग्यारह गोमती चक्रों और तीन छोटे नारियलों की यथाविधि पूजा कर उन्हें पीले वस्त्र में बांधकर बुधवार या शुक्रवार को मुख्य द्वार पर लटका दें। यदि नजरबाधा हो तो वह भी दूर हो जाएगी तथा व्यापार दिन दूनी रात चैगुनी उन्नति करने लगेगा। प्रत्येक पूर्णिमा को धूप दीप दिखाएं। आर्थिक तंगी यदि पैसे की अत्यधिक तंगी हो, तो संकल्प लेकर इक्कीस शुक्रवार पांच छोटी-छोटी कन्याओं को खीर का प्रसाद दें। खीर में चीनी की जगह मिश्री पीस कर डालें। किसी से टोटके का जिक्र न करें। आर्थिक समस्याओं व ऋण से मुक्ति के लिए शुक्ल पक्ष के प्रथम गुरुवार को सुहागिन स्त्री को सुहाग सामग्री दान करें। ऐसा लगातार पांच गुरुवार तक करें। सुहाग सामग्री में बिंदी का पैकेट, नेल पाॅलिश, सिंदूर, चूड़ी, लाल रिबन आदि दें। धीरे-धीरे समस्याओं का समाधान होने लगेगा। पति से झगड़ा यदि पति से झगड़ा होता रहता हो, तो शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को पत्नी अशोक वृक्ष की जड़ में घी का दीपक और चंदन की अगरबत्ती जलाए, नैवेद्य चढ़ाए। वृक्ष को जल अर्पित करते हुए उससे अपनी कामना करनी चाहिए। फिर वृक्ष से सात पत्ते तोड़ कर घर लाए, श्रद्धा से उनकी पूजा करे व घर के मंदिर में रख दे। अगले सोमवार फिर से यह उपासना करे तथा सूखे पत्तों को मंदिर में चढ़ा दे या बहते जल में प्रवाहित कर दें। चमत्कारिक प्रभाव सामने आएगा। तबादले हेतु मनचाहे स्थानांतरण हेतु सूर्य भगवान को लाल मिर्च के बीज जल में डाल कर। 21 अघ्र्य रूप में चढ़ाएं।



काल सर्प योग विशेषांक   जून 2007

क्या है काल सर्प योग ? काल सर्प योग का प्रभाव, कितने प्रकार का होता है काल सर्प योग? किन परिस्थियों में शुभ होता है. काल सर्प योग ? काल सर्प बाधा निवारण के उपाय, १२ प्रकार के काल सर्प योगों का कारण, निवारण, समाधान

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