फलित ज्योतिष में प्रश्न कुंडली का योगदान

फलित ज्योतिष में प्रश्न कुंडली का योगदान  

प्रश्न शास्त्र में प्रश्नकत्र्ता की जिज्ञासा, उत्सुक्ता, उत्कंठा, इच्छा, शंका, चिंता आदि प्रश्नों का समाधान जन्मपत्री की लंबी चैड़ी गणितीय प्रक्रिया के बिना किया जाता है। तात्कालिक प्रश्नों का फल बतलाने में यह शास्त्र अपना एक अलग महत्व रखता है। जिनके पास अपनी जन्मपत्री नहीं होती उनकी समस्याओं का हल भी प्रश्न ज्योतिष से संभव है। प्र श्नकुंडली में कार्यसिद्धि, चोरी, क्रय-विक्रय संबंधी, जय - पराजय, खोये-पाये, विवाह संबंधी, लाभ-हानि, गर्भिणी स्त्री तथा रोगी का प्रश्न आदि के उत्तर दिए जा सकते हैं। एक जातक जो अपने कार्यालय से गायब हो गया था उसके बारे में प्रश्न कुंडली के माध्यम से चर्चा प्रस्तुत है। दिनांक 9-11-2009 समय 8.35 प्रातः किसी व्यक्ति का फोन आया कि उसका भाई जो कि एक पुलिस इंस्पेक्टर है 4.11.2009 से गायब है। उस समय की जो प्रश्न कुंडली तैयार हुई वो इस प्रकार से है। लग्न में वृश्चिक राशि है और तृतीय भाव अर्थात मकर राशि में गुरु और राहु स्थित हैं। नवम भाव अर्थात कर्क राशि में मंगल, चंद्र और केतु स्थित हैं। एकादश भाव अर्थात् कन्या राशि में शनि विराजमान हैं, बारहवें भाव अर्थात् तुला राशि में सूर्य, शुक्र और बुध स्थित हैं। इस कुंडली में यह बताया गया कि आपका भाई जीवित है किंतु किसी कपटी साधु के चंगुल में फंसा हो सकता है। वह किसी धर्मस्थल में हो सकता है जो पानी के किनारे स्थित प्रतीत होता है। उस स्थान कि दिशा देहरादून से पश्चिम दक्षिण के बीच में है। ऐसा प्रतीत होता है वह स्थान हरिद्वार हो सकता है। इस कुंडली में लग्नेश मंगल नीच का होकर नवम भाव में चंद्रमा के साथ स्थित है। क्योंकि नवम भाव एक शुभ भाव है एवं चंद्रमा मंगल का नीच भंग कर रहा है, अतः इससे यह प्रतीत होता है कि व्यक्ति जीवित है। क्योंकि लग्न में वृश्चिक राशि स्थित है जिसका स्वामी मंगल है जो नवम भाव में बैठा है। मन का कारक चंद्रमा भी नवम भाव में स्थित है। नवम भाव (धर्म का भाव) अर्थात धर्म स्थल। व्यक्ति के शरीर व मन का नवम भाव में स्थित होना यह दर्शाता है कि व्यक्ति धर्म स्थल में हो सकता है। अब क्योंकि नवम भाव में जल तत्व राशि (कर्क राशि) स्थित है एवं लग्न में भी जल तत्व राशि है, अतः इससे यह संकेत मिलता है कि व्यक्ति धर्म-स्थल में है जो कि पानी के पास हो सकता है। ज्योतिष के अनुसार कुंडली का प्रथम भाव पूर्व दिशा को दर्शाता है। दशम भाव दक्षिण दिशा को। सप्तम भाव पश्चिम दिशा को एवं चतुर्थ भाव उत्तर दिशा को दर्शाता है। क्योंकि नवम भाव पश्चिम व दक्षिण दिशा के बीच में पड़ता है, देहरादून से हरिद्वार लगभग इसी दिशा में पड़ता है अतः यह स्थान हरिद्वार हो सकता है। नवम भाव में कर्क राशि स्थित है जिसके चरणाक्षर ‘ह’ व ‘ड’ बनते हैं। ‘ड’ अक्षर से ऐसा कोई स्थान नहीं है जो धर्म स्थली हो और वह धर्मस्थली पानी के किनारे स्थित हो, अतः ‘ह’ अक्षर से ही हरिद्वार बनता है जो धर्मस्थली भी है और पानी के किनारे भी स्थित है। उपरोक्त तथ्यों के आधार पर यह सिद्ध हो जाता है कि वह स्थान हरिद्वार ही है। अब प्रश्न यह उठता था कि वह व्यक्ति घर कब लौटेगा? हमने पाया कि 1 नवंबर 2009 को राहु मकर राशि से धनु राशि में प्रवेश करेगा। ज्योतिष सिद्धांत के अनुसार जब राहु राशि परिवर्तन करता है तो कोई न कोई बदलाव अवश्य आता है। राहु तृतीय भाव से दूसरे भाव में आएगा इसलिए वह व्यक्ति आएगा तो अवश्य परंतु 17 नवंबर के बाद। वह खोया हुआ व्यक्ति दिनांक 20 नवंबर 2009 को हरिद्वार में प्रातः दस बजे गंगा के किनारे प्राप्त हुआ परंतु उस समय उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी, वह कुछ डरा-सहमा सा था। तत्पश्चात उसको हरिद्वार से देहरादून लाया गया। उसके गले में अजीब से काले रंग के धागे डाले हुए थे। प्रश्न कुंडली में तृतीय भाव में नीच का बृहस्पति राहु के साथ बैठकर चांडाल योग बना रहा है जिसकी पूर्ण दृष्टि नवम भाव पर पड़ रही है जहां पर लग्नेश मंगल केतु के साथ स्थित है। इससे यह प्रतीत होता है कि व्यक्ति किसी कपटी साधु के चंगुल में फंसा हुआ था और उसकी मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी जिसका कारण किसी मादक पदार्थ का खिलाया जाना प्रतीत हो रहा था क्योंकि केतु मादक पदार्थों का कारक है जो लग्नेश मंगल के साथ स्थित है।


श्री विद्या एवम दीपावली विशेषांक  नवेम्बर 2010

श्रीविद्या व दीपावली विशेषांक फ्यूचर समाचार पत्रिका का अनूठा विशेषांक है जिसमें आप रहस्यमी श्रीविद्या, श्रीयंत्र व महालक्ष्मी पूजन की दुर्लभ विधियों के साथ-साथ इस अवसर पर इस महापूजा की पृष्ठभूमि के आधारभूत संज्ञान से परिचित होकर लाभान्वित होंगे।

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