पांचवां टैरो- पांचवें तत्व की वापसी

पांचवां टैरो- पांचवें तत्व की वापसी  

पांचवां टैरो-पांचवंे तत्व की वापसी रविन्दर सिंह मानव जाति ने प्राचीन काल से ही भिन्न-भिन्न प्रकार के शास्त्रों की रचना की, ग्रंथ लिखे एवं ऐसी तकनीक का विकास किया जिसके द्वारा उसने अपने बारे में एवं अपने आस-पास के प्राणियों, घटनाओं एवं अदृश्य शक्तियों को जानने का प्रयत्न किया। टैरो कार्ड इसी श्रृंखला की एक कड़ी है जिनके द्वारा मानव ने अपने अवचेतन मन से जानकारी को प्रकट करने का ढंग अपनाया। टैरो का प्रचलन प्राचीन काल से ही होने लगा था। यह कला इतनी प्राचीन है कि इसके उद्गम के स्रोत के बारे में अनेक धारणाएं हैं। परंतु भविष्य जानने के लिए इस प्राचीन कला की उपयुक्तता पर कोई संदेह नहीं। समय और आवश्यकता के अनुसार हर विज्ञान में उन्नति एवं विकास होता है। कुछ ऐसा ही टैरो विद्या के साथ भी हुआ। समय के अनुसार इसमें कई बदलाव आये। कई प्रकार की टैरो डेक की रचना की गई परंतु एक विशेषता जो स्थिर रही वह थी लघु एवं मुख्य अर्काना एवं टैरो कार्ड पर मानव निर्मित वस्तुओं एवं हथियारों का चित्रण। सभी टैरो डेक में चार रंग अथवा सूट होते हैं। यह चार तत्वों को दर्शाते हैं। प्रकृति में पाये जाने वाले चार तत्व - पृथ्वी, अग्नि, जल एवं वायु परंतु किसी भी टैरो डेक मंे पांचवां तत्व यानी आकाश नहीं है। इसका मूल कारण यह भी हो सकता है कि प्राचीन टैरो के निर्माताओं को पांचवें तत्व का ज्ञान न हो। जिस प्रकार से टैरो में जीवन यात्रा के विभिन्न चरणों का मुख्य अर्काना के कार्ड में चित्रण है, उसे देखते हुए ऐसा नहीं लगता कि प्राचीन टैरो के निर्माताओं को मनुष्य जीवन को प्रभावित करने वाली अदृश्य शक्तियों का ज्ञान नहीं रहा होगा। परंतु इस मुख्य तत्व की टैरो में अनुपस्थिति कौतुहल को अवश्य जन्म देती है। इतिहास के शोधकर्ताओं का यह मानना है कि प्राचीन ग्रंथों में से कुछ मुख्य तत्वों को निकाल दिया गया। इसके पीछे यह उद्देश्य रहा होगा कि सामान्य जनता को संपूर्ण ज्ञान प्राप्त न हो अन्यथा वे अतिशक्तिशाली हो जायेंगे एवं समकालीन सŸााधारियों के लिए खतरा बन जायेंगे। कुछ लोगों का यह भी मानना है कि मुख्य अर्काना के कार्ड पांचवंे तत्व को दर्शाते हैं परंतु यह विवाद का विषय है कि जब चार तत्वों को प्रत्यक्ष रूप से टैरो में स्थान दिया गया है, वहीं दूसरी ओर आकाश तत्व को अदृश्य रूप में मुख्य अकार्ना के कार्डों में सम्मिलित करने के पीछे क्या कारण रहा होगा। यदि हम टैरो के सभी कार्डों का गहराई से अध्ययन करें तो हम पायेंगे कि इस धारणा का कोई ठोस आधार नहीं है और यह टैरो की पूर्णता को सिद्ध करने का एक अनुमानित प्रयास मात्र ही है। यदि हम अन्य प्राचनी धर्म ग्रंथों के इतिहास को देखें तो हम पायेंगे कि पवित्र बाईबल का भी कई बार रूपांतरण एवं अनुवाद हुआ। इसके अनुवार होने के साथ-साथ इस प्राचीन ग्रंथ के कई हिस्से निकाल दिये गये। इसके पीछे उन व्यक्तियों का क्या उद्देश्य रहा होग इस बारे में केवल अनुमान ही लगाया जा सकता है। कदाचित इसके पीछे यह कारण रहा हो कि जन साधारण लोगों के पास संपूर्ण ज्ञान न पहुंच सके। यहां पर गायत्री मंत्र के बारे में प्रचलित धारणा का उल्लेख किये बिना भी नहीं रहा जा सकता। एक प्रचलित मान्यता के अनुसार जब गायत्री मंत्र का सृजन हुआ उसके चार भाग अथवा अंग थे। यह चार अंग गायत्री गाय के चार पांव थे। जब कुछ लोगों को चार पैरों वाला संपूर्ण गायत्री मंत्र प्राप्त हुआ। उन्होने इस मंत्र का उपयोग अपने निजी स्वार्थ के लिए करना शुरू कर दिया। फलस्वरूप वे अत्यंत शक्तिशाली हो गये। इसलिए गायत्री मंत्र के अनुचित उपयोग को रोकने के लिए इसके एक अंग अथवा पैर को निकाल दिया गया। अब गायत्री मंत्र के केवल तीन पैर रह गये। फिर भी यह मंत्र अत्यंत शक्तिशाली है परंतु यह चार पांव वाले मूल गायत्री मंत्र जितना शक्तिशाली नहीं है। जब हम ऊपर लिखित घटनाओं को देखते हैं, टैरो कार्ड में से पांचवें तत्व को निकाल देना इसी कड़ी का एक अंग है। टैरो में से पांचवें तत्व को निकालने का जो भी कारण रहा हो इससे यह तो अवश्य सिद्ध होता है की पांचवां तत्व आकाश न केवल टैरो को एक नया बल प्रदान करता है अपितु उसे पूर्णता आज के इस युग कि मांग है जब हर व्यक्ति अपने आस-पास होने वाले परिवर्तनांे को समझने का प्रयास कर रहा है। कुछ लोगों के अनुसार हम एक नये युग के प्रवेश द्व ार पर खड़े हैं एवं पूर्ण ज्ञान ही हमें इस नये युग में प्रवेश दिलाने में सहायक होगा। संयुक्त राज्य अमरीका के अर्काना प्रांत में रहने वाले एक दंपति-मार्टिन एवं टैरेसीना बैकन्स द्वारा पांचवें टैरो की रचना की गई है जिसमें पांचवा तत्व आकाश भी सम्मिलित है। लेखक के बैकन्स दंपŸिा से मिलने का सुअवसर प्राप्त हुआ जिसके द्वारा उसका परिचय पांचवें टैरो की डेक से हुआ। उन्हें उस अद्भुत टैरो डेक की रचना एवं उसके सृजन की रोचक यात्रा का भी अनुभव प्राप्त हुआ। पंाचवे टैरो के सृजनकर्ताओं के अनुसार पृथ्वी एवं मानवता एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव पर है। हम तृतीय आयाम से आयाम में प्रवेश के लिए तैयारी कर रहे हैं। पृथ्वी एक बड़े परिवर्तन से गुजर रही है। पृथ्वी की ऊर्जा तरंगों की गति में तेजी आई है जिसका प्रत्यक्ष प्रभाव मनुष्यों पर पड़ रहा है। ये ऊर्जा तरंगें मनुष्यों के लिए नई संभावनाओं को जन्म दे रही है। नये युग में नई ऊर्जाओं के रिक्त स्थान की पूर्ति करती है। एक बहुत बड़े अनुपात में मनुष्य अपनी दैवी शक्तियों की उपस्थिति का अनुभव कर रहा है। नई ऊर्जाओं को ध्यान में रखते हुए पांचवें टैरो में पारंपरिक पुरुष प्रधान चित्रण का नये समय की मांग के अनुसार रूपांतरण किया गया है। पांचवें टैरो में पारंपरिक टैरो डेक की तुलना में निम्नलिखित बदलाव लाये गये हैं। 78 के स्थान पर 92 कार्ड। नये सूट (रंग) आकाश के 10 नये कार्ड सम्मिलित। मनुष्य द्वारा निर्मित वस्तुओं एवं हथियारों के स्थान पर प्राकृतिक वस्तुओं एवं दृश्यों का चित्रण। टैरो कार्डों पर माया सभ्यता, प्राचीन ग्रहों की सांकेतिक भाषा एवं अंकशास्त्र का चित्रण। पारंपरिक टैरो डेक के पुरुष-प्रधान चित्रण से भिन्न पुरुष, स्त्री एवं एकता के प्रतीक चित्रों का दर्शाया जाना। मार्टिन बेकन्स ने मुख्य अर्काना के सभी कार्डों से प्रेरित होकर हर कार्ड के लिए एक विशेष सुगंध का निर्माण किया है। यह सुगंध हमें हर मुख्य अर्काना कार्ड की ऊर्जाओं से अवगत कराती है। पांचवें टैरो में निम्नलिखित वस्तुओं द्वारा पांच तत्वों को दर्शाया गया है- पृथ्वी - शैल पत्थर एवं क्रिस्टल अग्नि - अग्नि जल - शंख वायु - पंख आकाश - कमल का फूल यह पांचों तत्व हमारे शरीर में भी मौजूद है। पृथ्वी हमारी हड्डियों मंे, जल हमारे रक्त में, वायु हमारे फेफड़ों में, अग्नि हमारे अंदर के प्रकाश में एवं आकाश हमारी प्राणशक्ति में विद्यमान है। पांचवें टैरो के साथ काम करने के लिए पांच तत्वों एवं इन तत्वों के एक दूसरे पर प्रभाव को समझना आवश्यक है। इन तत्वों का सम्मिश्रण हमें हमारे अंदर ऊर्जाओं के प्रभाव को समझने में सहायक होता है। जहां पारंपरिक टैरो डेक अधिकतर भविष्यवाणी करने के लिए उपयोग में लाई जाती है, वहीं दूसरी ओर पांचवा टैरो डेक हमारे आंतरिक ज्ञान को प्रकट करने का एक सशक्त माध्यम है। जहां पारंपरिक टैरो डेक का एक विशिष्ट स्थान है, वही पांचवें टैरो डेक एक नया आयाम प्रदान करती है। पांचव टैरो डेक के बारे में अधिक जानकारी प्राप्त करने हेतु एवं पांचवी टैरी डेक प्राप्त करने के लिए आप निम्नलिखित पर संपर्क करें।



तंत्र एवं दश महाविद्या विशेषांक  अकतूबर 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के तंत्र एवं दशमहाविद्या विशेषांक में दस महाविद्याओं का संक्षिप्त परिचय व मंत्र, तंत्र एवं दस महाविद्या, तंत्र में प्रयुक्त शब्दों की धारक मारक शक्ति, शिव शक्ति का साक्षात श्री विग्रह श्रीयंत्र, तंत्र का आरंभि अर्थ एवं अंतिम लक्ष्य, तंत्र मंत्र अभिन्न संबंध, तंत्र परिभाषा एवं महत्वपूर्ण प्रयोग, दैनिक जीवन में तंत्र, दश महाविद्याओं का लौकिक एवं आध्यात्मिक विवेचन तथा इनके प्रसिद्ध शक्ति पीठों की जानकारी, तंत्र व् महाविद्या की प्राचीनता, मूल एवं विकास के विभिन्न प्रक्रम, तंत्र के अधिपति देव एवं मूल अधिष्ठात्री देवी, दश महाविद्या रहस्य, इसके अतिरिक्त तंत्र की शिक्षा भूमि तारापीठ, फलादेश में अंकशास्त्र की भूमिका, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, मंत्र चिकित्सा, सम्मोहन, मुहूर्त विचार, टैरो कार्ड, सत्यकथा, अंक ज्योतिष के रहस्य, आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है।

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