बुध ग्रह कुशल ग्रह

बुध ग्रह कुशल ग्रह  

बुध ग्रह कुशल ग्रह बुध एक ऐसा ग्रह है जो सूर्य के सान्न्ािध्य में ही रहता है। जब कोई ग्रह सूर्य के साथ होता है तो उसे अस्त माना जाता है। यदि बुध भी 14 डिग्री या उससे कम में सूर्य के साथ हो, तो उसे अस्त माना जाता है। लेकिन सूर्य के साथ रहने पर बुध ग्रह को अस्त का दोष नहीं लगता और अस्त होने से परिणामों में भी बहुत अधिक अंतर नहीं देखा गया है। बुध ग्रह कालपुरुष की कुंडली में तृतीय और छठे भाव का प्रतिनिधित्व करता है। बुध की कुशलता को निखारने के लिए की गयी कोशिश, छठे भाव द्वारा दिखाई देती है। जब-जब बुध का संबंध शुक्र, चंद्रमा और दशम भाव से बनता है और लग्न से दशम भाव का संबंध हो, तो व्यक्ति कला-कौशल को अपने जीवन-यापन का साधन बनाता है। जब-जब तृतीय भाव से बुध, चंद्रमा, शुक्र का संबंध बनता है तो व्यक्ति गायन क्षेत्र में कुशल होता है। अगर यह संबंध दशम और लग्न से भी बने तो इस कला को अपने जीवन का साधन बनाता है। इसी तरह यदि बुध का संबंध शनि केतु से बने और दशम लग्न प्रभावित करे, तो तकनीकी की तरफ व्यक्ति की रुचि बनती है। कितना ऊपर जाता है या कितनी उच्च शिक्षा ग्रहण करता है, इस क्षेत्र में, यह पंचम भाव और दशमेश की स्थिति पर निर्भर करता है। पंचम भाव से शिक्षा का स्तर और दशम भाव और दशमेश से कार्य का स्तर पता लगता है। बुध लेख की कुशलता को भी दर्शाता है। यदि बुध पंचम भाव से संबंधित हो, और यह संबंध लग्नेश, तृतीयेश और दशमेश से बनता है, तो संचार माध्यम से जीविकोपार्जन को दर्शाता है और पत्रकारिता को भी दर्शाता है। मंगल से बुध का संबंध हो और दशम लग्न आदि से संबंध बनता हो और बृहस्पति की दृष्टि या स्थान परिवर्तन द्वारा संबंध बन रहा हो, तो इंसान को वाणिज्य के कार्यों में कुशलता मिलती है। इस प्रकार कुशलता बुध तय करता है। क्षेत्र अलग-अलग ग्रहों और भावों व भावों के स्वामी का संबंध जीवकोपार्जन का क्षेत्र बताता है। यद्यपि इस प्रकार के बहुत से क्षेत्र हैं, लेकिन उन पर बुध ग्रह का प्रभाव अवश्य देखने को मिलता है। जब भी किसी क्षेत्र को विशेष योग्यता का सम्मान मिले, तो खेलों के क्षेत्र में भी यदि मंगल, शनि, राहु और बुध का संबंध खिलाड़ियों की जन्मपत्री में देखने को मिलता है।



यंत्र, शंख एवं दुर्लभ सामग्री विशेषांक  जुलाई 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के यंत्र शंख एवं दुर्लभ सामग्री विशेषांक में शंख प्रश्नोत्तरी, यंत्र परिचय, रहस्य, वर्गीकरण, महिमा, शिवशक्ति से संबंध, विश्लेषण तथा यंत्र संबंधी अनिवार्यताओं पर प्रकाश डाला गया है। इसके अतिरिक्त श्रीयंत्र का अंतर्निहित रहस्य, नवग्रह यंत्र व रोग निवारक तेल, दक्षिणावर्ती शंख के लाभ, पिरामिड यंत्र, यंत्र कार्य प्रणाली और प्रभाव, कष्टनिवारक बहुप्रभावी यंत्र, औषधिस्नान से ग्रह पीड़ा निवारण, शंख है नाद ब्रह्म एवं दिव्य मंत्र, बहुत गुण है शंख में, अनिष्टनिवारक दक्षिणावर्ती शंख, दुर्लभ वनस्पति परिचय एवं प्रयोग, शंख विविध लाभ अनेक आदि विषयों पर विस्तृत, ज्ञानवर्द्धक व अत्यंत रोचक जानकारी दी गई है। इसके अतिरिक्त क्या नरेंद्र मोदी बनेंगे प्रधानमंत्री, प्रमुख तीर्थ कामाख्या, विभिन्न धर्म एवं ज्योतिषीय उपाय, फलादेश प्रक्रिया की आम त्रुटियां, नवरत्न, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, ज्योतिष सामग्री, सम्मोहन, सत्यकथा, आदि विषयों को भी शामिल किया गया है।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.