दीपावली पर किये जाने वाले उपाय

दीपावली पर किये जाने वाले उपाय  

दीपावली पर किये जाने वाले उपाय नूर चैधरी इस अध्याय में आपको मैं कुछ ऐसे उपाय बता रही हूं जिनके माध्यम से आप अपने कार्य सिद्ध कर सकते हैं, मंत्र व यंत्र का प्रयोग भी कर सकते हैं। पहले आप अपने मस्तिष्क से यह भ्रम निकाल दें कि दीपावली की रात्रि में केवल धन से संबंधित उपाय किये जा सकते हैं। यह बात सही है कि अधिकतर व्यक्ति दीपावली की रात्रि में लक्ष्मी कृपा प्राप्त करने के लिए ही उपाय करते हैं परंतु आप यदि इस शुभ मुहूर्त में अपनी किसी अन्य समस्या का समाधान करना चाहते हैं तो उस समस्या से भी मुक्ति पा सकते हैं, यद्यपि आपको इस लेख में धन-समृद्धि के उपाय अधिक मिलेंगे परंतु मैं कुछ ऐसी विशेष समस्याओं के उपाय भी बता रही हूं जो सामान्य जीवन में आ सकती हैं। मां लक्ष्मी की कृपा प्राप्त करने के लिए उपाय: यह एक बहुत ही प्रभावशाली उपाय है। आपने इसे यदि दीपावली की रात्रि में कर लिया तो आप कभी आर्थिक समस्या में नहीं आयेंगे। आप प्रत्येक धनतेरस पर कोई न कोई बर्तन खरीदते हैं तो इस बार आप थोड़ी सी चांदी खरीदकर अपनी अनामिका उंगली में बिना जोड़ का छल्ला बनवाकर पहनें। धनतेरस के पूजन के समय उस छल्ले का भी पूजन करें। मध्यरात्रि में छल्ले को निकालकर एक घी के दीपक में डालें और दीपक जलाएं। फिर मां लक्ष्मी की तस्वीर के सामने लाल आसन पर बैठकर कमलगट्टे की माला से ‘‘श्रीं श्रिययै नमः’’ मंत्र का 11 माला जाप करें। जाप के बाद प्रणाम कर उठ जायें। अगले दिन स्नान कर मां लक्ष्मी को प्रणाम कर दीपक में से छल्ले को निकाल कर मां के चरणों से स्पर्श करवाकर अपनी अनामिका उंगली में धारण कर लें। इसमें आपको यह ध्यान रखना है कि प्रत्येक वर्ष उपर्युक्त विधि से ही छल्ले की शक्ति प्राप्त करते रहंे। धनतेरस की शाम को आप एक चांदी की कटोरी खरीदकर उस कटोरी का पूजन करें, फिर दीपावली की रात्रि में उस कटोरी में साबूदाने की खीर से मां लक्ष्मी को भोग अर्पित करें और प्रसाद के रूप में उसी खीर का स्वयं सेवन करें। अब आप प्रत्येक पूर्णिमा को उस कटोरी में साबूदाने की खीर का सेवन करें। यह उपाय बहुत ही प्रभावशाली है। इसके प्रभाव से आप आर्थिक संकट में नहीं आ सकते हैं। अगर आप चांदी की कटोरी खरीदने में सक्षम नहीं हैं तो पीतल की अथवा स्टील की कटोरी लेकर उसमें चांदी का टुकड़ा अथवा चांदी का कोई भी आभूषण जैसे चांदी की अंगूठी डालकर पूजन करें। उसी कटोरी में खीर डालकर उपर्युक्त विधि के अनुसार प्रयोग करें। खीर सेवन करने से पूर्व चांदी का टुकड़ा अथवा आभूषण निकाल लें। फिर आगे भी इसी प्रकार से प्रयोग करते रहें। दीपावली से आरंभ कर फिर लगातार 11 शुक्रवार तक यह उपाय करना है। मेरा विश्वास है कि आपको इस उपाय में इतना आनंद आयेगा कि आप यह उपाय बंद ही नहीं करेंगे। यदि आप इस उपाय को नियमित करें, तो आपको लाभ अधिक मिलेगा तथा हानि की संभावना कम होगी। संध्याकाल में मां शक्ति की तस्वीर के सामने बैठकर चंदन की अगरबŸाी अर्पित कर सफेद भोग लगाएं। स्फटिक की माला से निम्न मंत्र की एक माला जाप करें, कुछ ही समय में आप परिवर्तन अनुभव करेंगे। मंत्र: ऊँ स्मृताद्वरसि भीतिमशेष जनतोः स्वस्थैः स्मृता मतिमतीव शुभांददासि। दारिद्रय दुःखभय- कारिणी कात्वदन्या सर्वोपकारकरणा सदार्द्रचिŸाा।। यह एक बहुत प्रभावशाली उपाय है, आपको यह उपाय लगातार 9 दिन करना है। यद्यपि उपाय में अधिक समय नहीं लगेगा लेकिन कई लोग ऐसे होते हैं जो लाभ बड़ा चाहते हैं परंतु किसी भी उपाय में श्रम नहीं करना चाहते हैं, ऐसे लोग 9 दिन को भी बंदिश मानते हैं। आप यदि कुछ पाना चाहते हैं तो उसके लिए आपको कुछ तो करना ही होता है। मां लक्ष्मी कर्मठ और परिश्रमी लोगों के घर में ही स्थाई वास करती हैं। आप यह उपाय दीपावली से आरंभ कर सकते हैं। वैसे, आप प्रत्येक माह शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि से भी यह उपाय आरंभ कर सकते हैं। इसके लिए आपको एक कमलगट्टे की माला की आवश्यकता होगी। दीपावली के पूजन के बाद अथवा शुक्ल पक्ष की प्रथम तिथि को संध्याकाल में किसी स्वच्छ स्थान में पश्चिम की ओर मुख कर बैठ जायें। अपने सामने एक पट्टे पर लाल कपड़ा बिछाएं। थाली में 21 लाल गुलाब, प्रसाद तथा कुछ पैसे रख लें। कलावे अथवा मौली की बŸाी वाला शुद्ध घी का दीपक, अगरबŸाी, धूप अर्पित करें। फिर प्रसाद अर्पित करें, इसके बाद किसी जलते कंडे, जिन्हें हम उपले भी कहते हैं, पर थोड़ा सा कपूर रखें, कपूर के ऊपर एक बताशा तथा बताशे पर लौंग का जोड़ा रखें। थोड़ी ही देर में सुगंध से वातावरण शुद्ध हो जायेगा। फिर आप आंखें बंद कर मां लक्ष्मी का स्मरण कर धीरे-धीरे पांच गहरी सांस लें। कमलगट्टे की माला से मां लक्ष्मी के किसी मंत्र की एक माला का जाप करें। यदि आपको कोई मंत्र ज्ञात नहीं है तो आप श्री अथवा श्री श्रिययै नमः का जाप कर सकते हैं। जाप के पश्चात् गुलाब उठाकर किसी शुद्ध स्थान पर रख दें तथा प्रसाद बच्चों में बांट दें, जो पैसे रखे थे, उसे आप अपने प्रयोग में ला सकते हैं। 9 दिन तक अर्थात् नवमी तक आप यही प्रक्रिया करते रहंे। अंतिम दिन अर्थात् नवमी तिथि को सारे गुलाब इकट्ठे कर लाल कपड़े में बांधकर अपने धन के स्थान पर रख दें। अब यदि अगले माह फिर प्रयोग करना चाहते हैं तो पिछले माह वाले गुलाब के पुष्पों को कपड़े सहित विसर्जित कर दें तथा इस बार के प्रयोग के गुलाब धन के स्थान पर रख दें। कुछ ही समय में आप देखेंगे कि मां लक्ष्मी का आपके निवास में स्थाई वास हो गया है। यदि आप चाहते हैं कि आपके पास सदैव धन रहे तथा आप जिस क्षेत्र में हाथ डालें वहां आपको सफलता प्राप्त हो, तो दीपावली की रात्रि में एक असली स्फटिक की माला से ‘‘ऐं ह्रीं श्रीं क्लीं’’ मंत्र का 11 माला जप करें। आप इस प्रकार दीपावली की रात्रि से लगातार 40 दिन तक मंत्र जाप करें। 40वें दिन उस माला को स्वयं धारण कर लें। उस दिन 9 वर्ष की आयु की कन्याओं को भोजन कराएं व दक्षिणा देकर चरण स्पर्श करें। इसमें आपको यह अवश्य ध्यान रखना है कि जब तक, मंत्र पूर्ण न हो अर्थात 40 दिन तक, माला पूजा स्थान पर ही रहेगी। इस उपाय से मां लक्ष्मी की कृपा से आपको कभी धन की कमी नहीं रहेगी। दीपावली का पर्व छोटे-छोटे जग- मगाते दीपों का पर्व है। अमावस्या की गहन अंधकार वाली रात्रि को जब असंख्य छोटे-छोटे दीपक जल उठते हैं तो अंधकर एकदम से दूर होकर चारों ओर रोशनी की अद्भुत छटा बिखर जाती है। इस रात्रि को जलने वाले छोटे-छोटे दीपक मानो सभी को यह संदेश देते प्रतीत होते हैं कि यदि जीवन में निराशा के अंधकार को दूर करना है, तो हमें निरंतर कार्य करते रहना होगा ताकि जीवन में उजाले के रूप में खुशियों को भरा जा सके। इसके लिए छोटे-छोटे प्रयास भी कभी-कभी बड़े सुखद परिणामों में रूपांतरित हो जाते हैं। आप अपनी संपन्नता के लिए उपयुक्त उपाय करें, साथ ही पूरी निष्ठा तथा लगन के साथ अपने कार्य भी संपन्न करते रहें तब निश्चित रूप से लक्ष्मी जी की असीम कृपा आपको सराबोर कर देगी।



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