फैक्ट्री के आग्नेय कोण का कटना उत्पादन एवं धन की समस्या

फैक्ट्री के आग्नेय कोण का कटना उत्पादन एवं धन की समस्या  

कुछ समय पहले पंड़ित जी को नरेला इंड्रस्ट्रियल एरिया में सचदेवा जी द्वारा बुलाया गया, उनकी फैक्ट्री भरसक प्रयत्न के बावजूद ठीक नहीं चल रही थी। इन्जेक्शन माॅल्डिंग की सारी भारी मशीनें बेसमेन्ट में लगी थीं तथा ग्राउंड फ्लोर पर पैकिंग तथा आॅफिस बना था, जिसमें सारा कुछ विक्रय व प्रशासनिक कार्य होता था। फैक्ट्री पहले शहर में त्रि नगर में थी तथा समस्त कार्य सुचारू रूप से हो रहा था, परन्तु यहाँ शिफ्ट करने के बाद मशीनों में खराबी, माल की वापसी, कारीगरों में असंतोष व सरकारी परेशानियाँ काफी बढ़ गई थीं। वास्तु निरीक्षण के समय पाये गये दोषः- - प्लाॅट में सबसे महत्वपूर्ण दोष दक्षिण-पूर्व में पानी का फव्वारा व दक्षिण में भूमिगत टैंक का होना है। - चूंकि दक्षिण-पूर्व अग्नि का स्थान है इसलिये वहाँ पानी का प्रवाह वैचारिक वैमनस्य बढ़ाता है। - दक्षिण में भूमिगत टैंक का होना भी काम में रूकावट करता है, तथा धन हानि का कारण बनता है। - बिजली का मीटर व पैनल दक्षिण-पश्चिमी भाग में होने से व्यर्थ का खर्चा व मालिकों को कोई न कोई चिंता बनी रहती है। - बेसमेन्ट में दक्षिण-पूर्व में कटाव होना वास्तु पुरूष के दायें हाथ के कटने के समान है, इससे प्रोडक्शन तथा रिजर्व-धन में कमी हो जाती है। - उत्तर, उत्तर-पूर्व में भारी टेबल व मशीन होना भी मानसिक अशांति व पेमेन्ट के टूट-टूट कर आने का कारण बनता है। सुझावः- - आग्नेय कोण से फव्वारा तुरंत बिलकुल खत्म कर देना चाहिए। - दक्षिण-पश्चिम से मीटर व पैनल हटा कर दक्षिण क्षेत्र में गार्ड रूम के बगल मंे बनवाना श्रेष्ठ है। - दक्षिण क्षेत्र के भूमिगत टैंक को खत्म करके दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में ओवर हैड टैंक बनाना उत्तम विकल्प है। परंतु ध्यान रहे कि पानी का ओवरफ्लो न हो। - संशोधित नक्शे में दिखाये अनुसार बेसमेन्ट को पूरा बनाकर नियमित आकार में भारी मशीनों को दक्षिण, दक्षिण-पूर्व में रखने से फैक्ट्री से संबंधित हर व्यक्ति को मानसिक संतोष व पैसे के आवागमन में भारी वृद्धि होगी। पंडित जी के विस्तार पूर्वक, वैज्ञानिक दृष्टि से विश्लेषण/ बातचीत के पश्चात सचदेवा जी को पूर्ण विश्वास हो गया कि समस्त सुझावों को अतिशीघ्र कार्यान्वित करना चाहिए। प्रश्नः- पंडित जी हमने न्यूयार्क में यह मकान लेकर एक बड़े/प्रसिद्ध वास्तु सलाहकार के दिशा-निर्देशानुसार दोबारा तोड़कर बहुत उम्मीद से 2013 में बनवाया था। परन्तु आशा के विपरीत यहां आते ही सुख व समृद्धि की जगह दुख, तकलीफ, बीमारी व धन हानि का सामना करना पड़ रहा है। वास्तु गुरू से संपर्क करने पर रूखा सा जवाब मिला कि तुम्हारा भाग्य ही खराब होगा वरना यह 100 प्रतिशत वास्तु से बना है। इस उत्तर से हमारा विश्वास वास्तु से उठ गया है। क्या आप हमारी कुछ मदद/दिशा-निर्देशन कर सकते हैं? -हलीमा, लौंग आइलैंड, न्यूयार्क उत्तर:- माननीय महोदया। यह सत्य है कि भाग्य का ही जीवन पर सर्वाधिक प्रभाव होता है, परन्तु यदि हमारे कर्म अच्छे हों व हमारा घर/कार्यस्थल वास्तु/फेंगशुई के अनुरूप बना हो तो प्रतिकूल ग्रह स्थिति/भाग्य भी अधिक नुकसान नहीं कर पाता। जैसे यदि ड्राईविंग स्किल अच्छी हो, बढ़िया रोड पर गाड़ी चले तो खराब गाड़ी भी पार लगा देगी। यदि गाड़ी काफी पुरानी हो, मरम्मत माँग रही हो- यदि कर्म अर्थात चालक गाड़ी चलाने में निपुण हो तो भी रास्ते की समस्याओं का आसानी से सामना किया जा सकता है। अच्छा होगा कि हमारी अगली न्यूयार्क यात्रा में आप स्वयं मिलें-या कभी दिल्ली आना हो तो समय लेकर सारे अन्दर के भी नक्शे लेकर मुलाकात करें। अभी प्रथम दृष्ट्या प्लाॅट के आग्नेय कोण के वास्तु दोष को ठीक करने से भी आपको काफी लाभ हो सकता है। इस कोण के बन्द होने से भारी आर्थिक व शारीरिक समस्याओं का सामना करना पड़ता है। कृप्या फस्र्ट एड की तरह इस कोने से गैरेज को हटाकर दक्षिणी क्षेत्र में या डाॅग हाउस की जगह बनायें। डाॅग हाउस उसके बाद पश्चिम दीवार पर भी बनाया जा सकता है। इन सरल उपायों से ही आपको अवश्य तुरंत लाभ होगा तथा भारत वर्ष की इस धरोहर पर आपका विश्वास पुनः स्थापित होगा।


वक्री ग्रह विशेषांक  अप्रैल 2015

फ्यूचर समाचार के वक्री ग्रह विषेषांक में वक्री, अस्त व नीच ग्रहों के शुभाषुभ प्रभाव के बारे में चर्चा की गई है। बहुत समय से पाठकों को ऐसे विशेषांक का इंतजार था जो उन्हें ज्योतिष के इन जटिल रहस्यों को उद्घाटित करे। ज्ञानवर्धक और रोचक लेखों के समावेष से यह अंक पाठकों में अत्यन्त लोकप्रिय हुआ। इस अंक के सम्पादकीय लेख में वक्री ग्रहों के प्रभाव की सोदाहरण व्याख्या की गई है। इस अंक में वक्र ग्रहों का शुभाषुभ प्रभाव, अस्त ग्रहों का प्रभाव एवं उनका फल, वक्री ग्रहों का प्रभाव, नीच ग्रह भी देते हैं शुभफल, क्या और कैसे होते हैं उच्च-नीच, वक्री एवं अस्तग्रह, कैसे बनाया नीच ग्रहों ने अकबर को महान आदि महत्वपूर्ण लेखों को शामिल किया गया है। इसके अतिरिक्त बी. चन्द्रकला की जीवनी, पंचपक्षी के रहस्य, लाल किताब, फलित विचार, टैरो कार्ड, वास्तु, भागवत कथा, संस्कार, हैल्थ कैप्सूल, विचार गोष्ठी, वास्तु परामर्ष, ज्योतिष और महिलाएं, व्रत पर्व, क्या आप जानते हैं? आदि लेखों व स्तम्भों के अन्तर्गत बेहतर जानकारी को साझा किया गया है।

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