बनावटी हालत मंगल, शनि (उच्च राहु) बनावटी हालत सूर्य, शनि (नीच राहु) बृहस्पति के प्रभाव के विपरीत होना या बृहस्पति को चुप करना आत्मा का आना-जाना बंद करना या मौतें या बहुत देर तक औलाद का आना रोक देना या दूसरी छुपी-छुपाई खराबियां या पाँव के नीचे भूचाल पैदा करना मगर लड़कियों की सहायता करना है, लड़ाई-झगड़े। केतु:- बनावटी हालत शुक्र, शनि (उच्च केतु) बनावटी हालत चंद्र, शनि (नीच केतु) संतान की खुशहाली, फलना-फुलना मगर संतान की कमी रखना (मौत से संतान घटाना अर्थ नहीं) संतान देर से हो मगर जो हो कमाल की हो, शर्त ये कि इसके शत्रु ग्रह की दृष्टि केतु पर न हो। स्वयं कुंडली वाले में बुध की शक्ति मंगल के खून से बच्चा पैदा करने की शक्ति और बृहस्पति की संतान की पैदाइश तीनों को एक जगह करके रखने की शक्ति वीर्य या वीर्य को नर, स्त्री में मिलाने वाली तूफानी हवा या खुली नाली होगी। यही तीन ग्रह केतु की तीन टाँगें हैं जिनके कारण यह शुक्र का बीज कहलाता है। यदि कुंडली वाले का जो ग्रह शुभ या मंदा होगा वह हालत शुभ और मंदी होगी। ऐश का स्वामी मंगल, वृहस्पति, बुध, केतु है। केतु को लड़का भी माना है जो अपने उच्च घरों में उच्च फल देता है। लेकिन यदि मंगल या बृहस्पति खाना नं0 6-12 में हो जाये तो केतु चाहे उच्च ही हो या शुभ घरों में हो, मंदा फल देगा।  जन्म संतान शुक्र, बुध मंगल, केतु राजा, शनि भी शामिल होता है। पहले 5 वें नर ग्रह चंद्र, मंगल दूजे केतु 11 हो। जन्म समय1 संतान का होगा, जिंदा पैदा2 जो होती हो। बुध, लड़की नर केतु लड़का देता, गिनती भले4 पर होती हो। केतु बैठा घर 11 टेवे, गुरु, चन्द्र/शनि आया घर पाँचवें हो। औलाद मंदी या देरी से हो, लाश पैदा या मुर्दा3 हो। (केतु, शनि, बुध) (रवि, शुक्र, राहु) उम्दा टेवे बैठे 5, 3, 115 हो। समय पैदाइश लड़का-लड़की हो, लेख उम्र उस लम्बा6 हो। केतु कायम तो लड़के कायम, लडकी कायम राहु करता है। छठे चन्द्र दे कन्या ज्यादा, चैथे केतु नर देता हो। 1. वर्षफल के हिसाब। 2. चन्द्र नष्ट हो तो संतान जरूर नष्ट। 3. पैदाइश समय से तकरीबन 40 या 43 दिन पहले रात को औरत के सिरहाने मूली रख कर सुबह वह मूली धर्म स्थान में पहुँचा दिया करें। 4. बुध और केतु में सेे जो उच्च हालत का हो संतान का फैसला यानी लड़का या लड़की का फैसला उसी से होगा। 5. सूर्य, चन्द्र, बृहस्पति, शनि, खाना नं0 5 हो तो लड़का हो। 6. केतु उत्तम हो तो संतान उत्तम, राहु, मंदा संतान मंदी हो।


श्री महालक्ष्मी विशेषांक  नवेम्बर 2012

फ्यूचर समाचार पत्रिका के श्री महालक्ष्मी विशेषांक में महालक्ष्मी के उद्गम की पौराणिकता, हिन्दू धर्म शास्त्रों में महालक्ष्मी के स्वरूप का वर्णन, विश्व के अन्य धर्म ग्रंथों में महालक्ष्मी के समकक्ष, देवी-देवताओं के नाम तथा उनसे जुडी दन्त कथाएँ, लक्ष्मी पूजन विधि एवं शुभ मुहूर्त, दीपावली पूजन पैक, देवी कमला साधना, तंत्रोक्त लक्ष्मी कवच, लक्ष्मीजी के साथ गणपति पूजन क्यां, लक्ष्मीपूजन के विशेष उपाय, दीपावली पर किये जाने वाले विशेष उपाय व मंत्र, लक्ष्मी प्राप्ति के 51 अचूक उपाय, दीपावली पर किये जाने वाले अनूठे प्रयोगदीपावली पर किये जाने वाले दीपावली पर किये जाने वाले अदभुत टोटके, महालक्ष्मी के प्रमुख पूजा स्थल तथा उनकी महता और मान्यता के अतिरिक्त जन्मकालिक संस्कार, अहोईअष्टमी व्रत, फलादेश में अंकशास्त्र की भूमिका, वास्तु परामर्श, वास्तु प्रश्नोतरी, विवादित वास्तु, यंत्र समीक्षा/मंत्र ज्ञान, हेल्थ कैप्सुल, लाल किताब, टैरो कार्ड, सत्यकथा, अंक ज्योतिष के रहस्य, आदि विषयों पर गहन चर्चा की गई है।

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