नाम बदलकर भाग्य बदलिए

नाम बदलकर भाग्य बदलिए  

यह सत्य है कि मानव के दैनिक जीवन में कर्मों के उतार-चढ़ाव में एक ऐसा समय भी आता है, जो अपनी चरम सीमा में होने के कारण उसे भाग्य की ओर ले जाता है। यहां मस्तिष्क में यही प्रश्न बार-बार आता है कि क्या कोई ऐसा उपाय है जिससे ज्ञात किया जा सके कि कब वह क्षण आएगा जब मनुष्य का भाग्य उसका साथ देगा। हम ‘कीरो’ द्वारा वर्णित अंक विज्ञान के आधार पर किसी भी वर्ष के किसी भी महीने का भाग्यशाली दिन या कहा जाए कि व्यक्ति के लिए लाभकारी दिन खोज निकालने के लिए नाम के अक्षरों के अंकों की तालिका की सहायता लेंगे। तालिका प्रारंभ में दी जा चुकी है। संयुक्त अंक को हम व्यक्ति की आंतरिक शक्ति मापने का पैमाना कह सकते हैं। संयुक्त अंक जानने के लिए पहले व्यक्ति के प्रचलित नाम को अंग्रेजी में लिखें और फिर प्रत्येक अक्षर के निर्दिष्ट अंक लिखें। अब इन अंकों को जोड़ लें। दो अंकों का यह जोड़ ही संयुक्त अंक है। यही अंक व्यक्ति की आंतरिक शक्ति का द्योतक है। 10 से 80 संयुक्त अंकों का फलादेश कीरो की अंक विज्ञान से संबंधित किसी भी पुस्तक से ज्ञात कर सकते हैं। उदाहरण 1. CHERIO (कीरो) 3 5 5 2 1 7 त्र 23 अंक 23 का फलादेश इस प्रकार है । इस अंक को सिंह का राजसी नक्षत्र कहा जाता है। यह अंक सफलता एवं मित्रों द्वारा सहायता तथा उच्च पदस्थ लोगों द्वारा संरक्षण का संदेश देता है। यदि यह अंक भविष्य की घटनाओं के संबंध में आए तो सौभाग्यसूचक अंक है। ऐसे व्यक्ति की भावी योजनाएं से सफल होंगी। उदाहरण-2 (महात्मा गांधी) M A H A T M A G A N D H I 4 1 5 1 4 4 1 3 1 5 4 5 1 = 39 अंक 39 का फलादेश इस प्रकार है । यह अंक विचार-संतुलन तथा अपने सहयोगियों से मानसिक स्तर में ऊंचे होने का सूचक है। ऐसे लोग भौतिकता से अधिक लगाव रखते हैं। यह व्यक्ति विशेष के सोचने की क्षमता पर सौभाग्य या दुर्भाग्य-प्रदाता होता है। यह शक्तिशाली अंक है। यदि व्यक्ति भौतिकता से लगाव न रखे तो बहुत शक्तिसंपन्न हो सकता है। इस प्रकार हमने देखा कि नाम का हमारे जीवन में बड़ा ही महत्व है। हमें जीवन में अपेक्षित सफलता नहीं मिल रही है या कष्टपूर्ण जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है तो कहीं हमारे नाम का संयुक्त अंक गलत फलादेश तो नहीं दे रहा है। यदि ऐसा होता है तो हमें अपने नाम में वर्णित अक्षरों में घटत-बढ़त करनी चाहिए और अपने नाम का फलादेश सुखद कर लेना चाहिए। ऐसा नहीं है कि नाम में अक्षरों के परिवर्तन से तुरंत लाभ होने लगेगा या उसका प्रभाव तुरंत महसूस होने लगेगा। कहते हैं नेपोलियन जब तक अपना नाम "Napoleon Bounaparte"लिखता रहा तब तक उसके नाम के संयुक्तांक का उसके जीवन पर शुभ प्रभाव रहा। किंतु किसी दैव दुर्विपाक से उसने अपने नाम के अक्षर बदल लिए और नए अक्षर "Napoleon Bonaparte" रख लिए। इस नए नाम के संयुक्तांक का प्रभाव बहुत ही अशुभ रहा और नेपोलियन को अपने प्राण तक गंवाने पड़े। आइए देखें कि उसके पहले नाम व बाद के नाम में क्या अंतर आया व उसके क्या गुण तथा प्रभाव हैं: पुराना नाम नया नाम N 5 N 5 A 1 A 1 P 8 P 8 O 7 O 7 L 3 L 3 E 5 E 5 O 7 O 7 N 5 N 5 41 = 5 41 = 5 B 2 B 2 U 6 O 7 O 7 N 5 N 5 A 1 A 1 P 8 P 8 A 1 A 1 R 2 R 2 T 4 T 4 E 5 E 5 35 = 8 41 = 5 5+5= (10) (1) 5+8=(13) 1+3= (4) नेपोलियन के नाम का अंक 41 तथा उपनाम का अंक भी 41 बनता है। अंक 41 एक चमत्कारपूर्ण अंक है। यह अंक व्यक्तियों या राष्ट्रों के समुच्चय का बोधक है। यदि इस अंक वाला व्यक्ति अपने इरादे को स्वयं कार्यान्वित करे, तो सफलता उसके कदम चूमेगी। यदि वह किसी दूसरे के द्वारा बताए गए मार्ग पर चलेगा तो असफलता निश्चित है। यह एक अति शुभ अंक है। नेपोलियन के दोनों नामों का संयुक्तांक 82 बनता है। परंतु अंक विद्या में 82 के गुण व प्रभाव नहीं दिए गए हैं। नेपोलियन ने जब नाम के अक्षर बदले तो उसका क्या परिणाम हुआ आइए देखंे: नये उपनाम Bonaparte के अनुसार अंक मिला 35 अंक 35 वाले व्यक्तियों का भविष्य धुंधला होता है। यह अंक साझेदारी, सट्टे और गलत परामर्श से हानि का द्योतक है। इस अंक वाले व्यक्तियों को अपने भविष्य के संबंध में बहुत ही सोच-समझकर कदम उठाना चाहिए। पुराने नाम के अनुसार Napolean नाम का संयुक्तांक है 41=4+1=5 Bonaparte उपनाम का संयुक्तांक है 41=4+1=5 =5+5 = 10 = 1 अंक 5 एक जादुई शक्ति वाला अंक है। प्राचीन यूनान में भी युद्ध के समय इस अंक को सौभाग्यजनक अंक के रूप में प्रयोग किया जाता था। नेपोलियन के दोनों नामों का योग 10 बनता है। अंक 10 को ‘भाग्य का चक्र’ माना जाता है। यह अंक आत्मविश्वास, निष्ठा और सम्मान का प्रतीक है। इस अंक से व्यक्ति के जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव का भी बोध होता है। इस अंक वाले व्यक्ति की सभी इच्छाएं पूर्ण होती हैं और वह अपने अच्छे या बुरे इरादों के अनुरूप ही पहचाना जाता है। यह एक सौभाग्यशाली अंक माना जाता है। नाम के हिस्सों को बदलने के बाद उपनाम का अंक मिला 35 नए नाम के अनुसार छंचवसमवद नाम का संयुक्ताक आता है 41त्र4़1त्र5 ठवदंचंतजम उपनाम का संयुक्तांक आता है 35त्र3़5त्र8 त्र5़8त्र13 त्र 4 अंक 8 का स्वामी ग्रह शनि है। नाम बदलते ही शनि उसके पीछे पड़ गया। शनि का प्रभाव दो वर्ष छः मास से लेकर 30 वर्ष तक रहता है। प्रत्येक राशि पर यह ढाई वर्ष रहता है और 30 वर्षों में सभी राशियों का चक्र पूरा कर लेता है। शनि एक अशुभ ग्रह माना जाता है। शनि से प्रभावित व्यक्ति जीवन भर संघर्षों से जूझता रहता है। उसका जीवन उथल-पुथल भरा होता है, परिवर्तनशील होता है। शनि वायु तत्व प्रधान ग्रह है आपने देखा ही होगा कि जब तक हवा धीरे-धीरे चलती है, तब तक सभी प्राणी प्रसन्न रहते हैं और जब वही हवा आंधी-तूफान का रूप धारण कर लेती है, तो सभी त्राहि-त्राहि कर उठते हैं। इसी प्रकार 8 का अंक सांसारिक दृष्टिकोण से भी सौभाग्यशाली नहीं समझा जाता। मूल अंक 8 वाले लोग सब कुछ होने के बाद भी प्रायः परेशान, उदास और दुखी रहते हैं। इन्हें सदा अपमानित होना पड़ता है। जीवन में या तो बहुत ही सफल होते हैं या फिर बहुत ही असफल ऐसे व्यक्तियों का जीवन प्रायः दुखमय होता है। नए नाम के अनुसार छंचवसमवद ठवदंचंतजम का संयुक्तांक ‘13’ आता है। यह अंक कठिनाइयों, उतार-चढाव और विनाश को दर्शाता है। वैसे तो यह अंक शक्ति का प्रतीक है, परंतु यदि उस शक्ति का गलत प्रयोग किया जाए तो वह स्वयं उसी को नष्ट कर देती है। यदि किसी व्यक्ति की गणना में यह संयुक्त अंक आए तो यह अज्ञात और ऐसे कार्यों के होने के संकत देता है जिनकी आशा भी नहीं की जा सकती। नाम को संयुक्तांक में (संख्या में) परिवर्तित करने की क्या उपयोगिता है, यह जानना अति आवश्यक है। इस पद्धति से क्या-क्या जाना जा सकता है आइए देखें- नाम शुभ है या नहीं ? आपको नाम बदलने की आवश्यकता है? नाम जन्म तारीख के अनुकूल है या नहीं ? नाम के संयुक्तांक के अनुसार कौन सी तारीख महत्वपूर्ण कार्य के लिए उपयुक्त होगी? ये सब बातें इस बात पर निर्भर करती हैं कि आपके नाम का ‘संयुक्तांक’ क्या बनता है ?


पराविद्याओं को समर्पित सर्वश्रेष्ठ मासिक ज्योतिष पत्रिका  अप्रैल 2006

सभ्यता के आरम्भिक काल से ही फलकथन की विभिन्न पद्धतियां विश्व के विभिन्न हिस्सों में प्रचलित रही हैं। इन पद्धतियों में से अंक ज्योतिष का अपना अलग महत्व रहा है यहां तक कि अंक ज्योतिष भी विश्व के विभिन्न हिस्सों में अलग-अलग रूपों में प्रचलित है तथा इन सब में आपस में ही विभिन्नता देखने को मिलती है। हालांकि सभी प्रकार के अंक ज्योतिष के उद्देश्य वही हैं तथा इनका मूल उद्देश्य मनुष्य को मार्गदर्शन देकर उनका भविष्य बेहतर करना तथा वर्तमान दशा को सुधारना है। फ्यूचर समाचार के इस विशेषांक में अंक ज्योतिष के आधार पर फलकथन को वरीयता दी गयी है। इसमें मुख्यतः कीरो की पद्धति का अनुशरण किया गया है। इसके अन्तर्गत समाविष्ट महत्वपूर्ण आलेखों में- अंक ज्योतिष का परिचय एवं महत्व, अंक फलित के त्रिकोण प्रेम, बुद्धि एवं धन, मूलांक से जानिए भाग्योदय का समय, नाम बदलकर भाग्य बदलिए, हिन्दी के नामाक्षरों द्वारा व्यवसाय का चयन, अंक ज्योतिष का महत्वपूर्ण पहलू स्तूप, अंक एवं आॅपरेशन दुर्योधन, मूलांक, रोग और उपाय, अंक विद्या द्वारा जन्मकुण्डली का विश्लेषण आदि। इन आलेखों के अतिरिक्त दूसरे भी अनेक महत्वपूर्ण आलेख अन्य विषयों से सम्बन्धित हैं। इसके अतिरिक्त पूर्व की भांति स्थायी स्तम्भ भी संलग्न हैं।

सब्सक्राइब

अपने विचार व्यक्त करें

blog comments powered by Disqus
.