शिव प्रसाद गुप्ता


(7 लेख)
छाया ग्रह होते हुए भी प्रभावी है राहू-केतु

आगस्त 2006

व्यूस: 32170

सौर मंडल में सभी ग्रह सूर्य के चारों और अपने-अपने अंडाकार पथ पर निरंतर परिक्रमा करते रहते है। सूर्य से बढती दूरी के क्रम में ग्रह हैं। - बुध, शुक्र, पृथ्वी, मंगल, गुरु और शनि। चूंकि हम पृथ्वी पर ग्रहों के प्रभावों के आकलन के लिए प... और पढ़ें

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगज्योतिषीय विश्लेषणकुंडली व्याख्या

कैसे बनते है हत्या के ग्रह योग

जुलाई 2010

व्यूस: 5468

हिंसा का प्रतिनिधि मंगल है, नीच एवं घृणित कार्यों का प्रतीक शनि है तथा आवेश व अप्रत्याशितता के उत्प्रेरक राहु केतु है। जब मंगल, शनि और राहु केतु की दृष्टि, युति या अन्य दृढ़ संबंध लग्न और अष्टम भाव या उनके अधिपतियों से होता है तो ज... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

मंगल

जनवरी 2011

व्यूस: 4662

मंगल का अर्थ शुभता, मांगलिकता, मधुरता, अनुकूलता से है। यह पराक्रम शौर्य, बल व साहस का प्रतीक है। यदि मंगल बली एवं शुभ प्रभाव में हो तो यह शक्ति, सामर्थ्य, भूसंपत्ति एवं वैभव देता है और व्यक्ति को तेजस्वी, बलवान, निपुण, आत्मनिर्भर,... और पढ़ें

ज्योतिषकुंडली व्याख्याघरग्रहभविष्यवाणी तकनीक

मंगल-मंगल भी, अमंगल भी

अप्रैल 2011

व्यूस: 4375

मंगलकारी ग्रह 'मंगल' को जन्मकुंडली के प्रथम, चतुर्थ, सप्तम, अष्टम एवं द्वादश भावों में होने पर अमंगली होने का दोष लग जाता है। भारतीय ज्योतिष में मांगलिक दोष सर्वाधिक चर्चा का विषय है। क्योंकि यह दोष जातक के विवाह में विलंब, तलाक य... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगकुंडली व्याख्याग्रहभविष्यवाणी तकनीक

छाया ग्रह होते हुए भी प्रभावी हैं राहु-केतु

आगस्त 2006

व्यूस: 586

राहु-केतु छाया ग्रह हैं। इनका अपना कोई अस्तित्व नहीं होता, इसीलिए ये जिस ग्रह के साथ बैठते हैं उसी के अनुसार अपना प्रभाव देने लगते हैं। लेकिन राहु-केतु की दशा-महादशा काफी प्रभावशाली मानी जाती है। यदि कुंडली में उनकी स्थिति ठीक ... और पढ़ें

ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

क्रूर ग्रह दे सकते हैं नेत्र विकार

जून 2006

व्यूस: 576

क्रूर ग्रह अपने स्वभाव का असर किसी न किसी रूप में शरीर पर छोड़ते हैं। संसार के परिदृश्य से साक्षात कराने वाली आंखें क्रूर ग्रहों के प्रभाव से कभी भेंगी या ज्योतिहीन हो जाती हैं तो कभी किसी रोग का शिकार। किन ग्रहों की युति नेत्र ... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यभविष्यवाणी तकनीक

चंद्र-मंगल योग कहीं वरदान कहीं अभिशाप

जून 2006

व्यूस: 499

जन्मकुंडली में बनने वाले योग यदि शुभ प्रभाव से युक्त होते हैं तो उनका प्रभाव लाभकारी होता है। उन्हीं योगों के अशुभ प्रभाव से युक्त होने पर यह प्रभाव अभिशाप में बदल जाता है। चंद्र-मंगल का योग जल और अग्नि के मिलन का प्रतीक है। वि... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय योगभविष्यवाणी तकनीक

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