रश्मि चतुर्वेदी


(12 लेख)
विदिशा भूखंड पर वास्तुसम्मत निर्माण

जनवरी 2006

व्यूस: 715

सामान्यतः भूखंडों में दिशाएं भूखंड के समांतर होती हंै परंतु ऐसे बहुत से भूखंड हैं जिनकी दिशाएं कोणों में स्थित होती हैं। जिस भूखंड में चुंबकीय किरण उसके बीचों बीच गुजरने की बजाय भूखंड के अक्ष पर 450 का कोण बनाती हुई गुजरे ... और पढ़ें

वास्तुभविष्यवाणी तकनीकवास्तु परामर्शवास्तु दोष निवारणवास्तु के सुझाव

मंदिर के पास घर का निषेध क्यों?

मार्च 2006

व्यूस: 621

वातावरण में सूक्ष्म तरंगे विद्यमान रहती हैं। व्यक्ति जिस प्रकार का आचार, विचार एवं व्यवहार करता है, उसके चारों तरफ उसी प्रकार का वातावरण बनता है। यह वातावरण अपने माध्यम से व्यक्ति को कभी उत्साह और कभी उमंग के रूप में महसूस ... और पढ़ें

वास्तुवास्तु परामर्शवास्तु दोष निवारणवास्तु के सुझाव

भवन में जलीय व्यवस्था

फ़रवरी 2006

व्यूस: 579

येक ग्रह या भवन में जल भंडारण का साधन अत्यंत आवश्यक होता है। जीवन यापन के लिए ही नहीं अपितु भवन निर्माण के लिए भी जल की आवश्यकता होती है। इसलिए निर्माण कार्य प्रारंभ करने से पूर्व जल के भंडारण के लिए कुआं, बोरिंग (नलकूप) खु... और पढ़ें

वास्तुभविष्यवाणी तकनीकवास्तु परामर्शवास्तु दोष निवारणवास्तु पुरुष एवं दिशाएंवास्तु के सुझाव

वायव्य कोण में अतिथि कक्ष क्यों?

आगस्त 2006

व्यूस: 522

भारतीय समाज में व्यवस्था बनाने के लिए उसे पारिवारिक इकाइयों में व्यवस्थित किया गया है। मनुष्य जीवन में अकेला नहीं रह सकता है। जन्म से मृत्यु तक का समय वह परिवार में व्यतीत करता है। परिवार के सदस्य जीवन में आने वाले सुख एवं ... और पढ़ें

वास्तुभविष्यवाणी तकनीकवास्तु परामर्शवास्तु दोष निवारणवास्तु के सुझाव

श्मशान के पास घर का निषेध क्यों

अप्रैल 2015

व्यूस: 522

वास्तु शास्त्र में भूखंड के आस-पास या आमने-सामने के स्थानों का बहुत महत्व है। भूखंड की शुभ या अशुभ दशा का अनुमान आस-पास की चीजों को देखकर किया जा सकता है। घर मनुष्य की गतिविधियों का केंद्र होता है, जहां पर वह अपनी पारिवारिक... और पढ़ें

वास्तुभविष्यवाणी तकनीकवास्तु परामर्शवास्तु दोष निवारणवास्तु पुरुष एवं दिशाएंवास्तु के सुझाव

भवन निर्माण पूर्व आवश्यक है भूमि परीक्षण

दिसम्बर 2006

व्यूस: 487

किसी भी भूखंड पर भवन निर्माण से पूर्व उसकी मिट्टी का परीक्षण भलीभांति कर लेना चाहिए क्योंकि उस भवन का आधार वही भूखंड होता है। भवन का आधार दोषरहित होना चाहिए अन्यथा भवन में वास्तु दोष पैदा हो जाएंगे जिसके परिणामस्वरूप उस में... और पढ़ें

वास्तुभविष्यवाणी तकनीकवास्तु परामर्शवास्तु पुरुष एवं दिशाएंवास्तु के सुझाव

परिवार के मुखिया का शयन कक्ष दक्षिण में क्यों?

अकतूबर 2006

व्यूस: 475

ब्रह्मांड का संचालन करने वाली प्रकृति अपने उदयकाल से लेकर आज तक एक अनुशासनबद्ध तरीके से गतिमान है। इसी प्रकार की अनुशासित दिनचर्या वैदिक ऋषियों ने मनुष्य के लिए बनाई थी, जिसमें प्रातः काल जगने से लेकर सोने तक का समय निर्धार... और पढ़ें

वास्तुभविष्यवाणी तकनीकवास्तु परामर्शवास्तु दोष निवारणवास्तु पुरुष एवं दिशाएंवास्तु के सुझाव

वशिष्ठ संहिता के अनुसार अध्ययन कक्ष पश्चिम में प्रशस्त क्यों?

नवेम्बर 2015

व्यूस: 454

मनुष्य के जीवन में अध्ययन का विशेष महत्व है। अध्ययन की विशेषता यह है कि यह बुद्धि के कोष को ज्ञान से युक्त करता है। ज्ञान व्यक्ति को सद् एवं असद् में जो भिन्नता है, उससे परिचित कराता है। वास्तुशास्त्र के आर्षग्रंथों में वृहत... और पढ़ें

वास्तुभविष्यवाणी तकनीकवास्तु परामर्शवास्तु दोष निवारणवास्तु पुरुष एवं दिशाएंवास्तु के सुझाव

ईशान में पूजाघर क्यों

मई 2006

व्यूस: 452

भारतीय संस्कृति में नियमित पूजा करने का विधान है। पूजा करने से व्यक्ति के मन एवं मस्तिष्क दोनों ही एकाग्र होते हैं। जीवन में रचनात्मक विकास के लिए मानसिक संतुलन अत्यावश्यक है। व्यक्ति के मस्तिष्क में विचारों का प्रवाह लगातार... और पढ़ें

वास्तुभविष्यवाणी तकनीकवास्तु परामर्शवास्तु पुरुष एवं दिशाएंवास्तु के सुझाव

नैर्ऋत्य (दक्षिण-पश्चिम) में भारी निर्माण क्यों

जुलाई 2006

व्यूस: 449

प्रकृति के अंदर दो प्रकार की शक्तियां पायी जाती हैं, एक है सकारात्मक तथा दूसरी है नकारात्मक। इनमें से व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि प्राप्त करने में सकारात्मक शक्ति सहायता करती है। इसके विपरीत नकारात्मक शक्ति व्यक्ति के अं... और पढ़ें

वास्तुभविष्यवाणी तकनीकवास्तु परामर्शवास्तु दोष निवारणवास्तु पुरुष एवं दिशाएंवास्तु के सुझाव

लोकप्रिय विषय

बाल-बच्चे चाइनीज ज्योतिष दशा वर्ग कुंडलियाँ डऊसिंग सपने शिक्षा वशीकरण शत्रु यश पर्व/व्रत फेंगशुई एवं वास्तु टैरो रत्न सुख गृह वास्तु प्रश्न कुंडली कुंडली व्याख्या कुंडली मिलान घर जैमिनी ज्योतिष कृष्णामूर्ति ज्योतिष लाल किताब भूमि चयन कानूनी समस्याएं मंत्र विवाह आकाशीय गणित चिकित्सा ज्योतिष विविध ग्रह पर्वत व रेखाएं मुहूर्त मेदनीय ज्योतिष नक्षत्र व्यवसायिक सुधार शकुन पंच पक्षी पंचांग मुखाकृति विज्ञान ग्रह प्राणिक हीलिंग भविष्यवाणी तकनीक हस्तरेखा सिद्धान्त व्यवसाय राहु आराधना रमल शास्त्र रेकी रूद्राक्ष हस्ताक्षर विश्लेषण सफलता मन्दिर एवं तीर्थ स्थल टोटके गोचर यात्रा वास्तु परामर्श वास्तु दोष निवारण वास्तु पुरुष एवं दिशाएं वास्तु के सुझाव स्वर सुधार/हकलाना संपत्ति यंत्र राशि
और टैग (+)