घनश्यामदास ज्योतिषी


(2 लेख)
नव रत्नों का संक्षिप्त परिचय

जनवरी 2004

व्यूस: 4124

अथ ग्रहाणां दौष्टय परिहार पूर्वकं तुष्टि संयादनार्थ। नवरत्न समुदाय धारणं शालिन्याहवज्रं शुक्रेऽव्जे।। सुमुक्ता प्रवालं भौमेऽगौ गोमेद मार्को सुनीलम्। केतौवैदूर्यं गुरौ पुष्पकं ज्ञे पाचिः प्राङ्माणिक्यमर्के तु मध्ये।। गोचर में दुष... और पढ़ें

उपायरत्न

ज्योतिष शास्त्र की सार्थकता ज्योतिष विज्ञान

जनवरी 2012

व्यूस: 1362

विज्ञान ‘कार्य-कारण के सिद्धांत’ पर आधारित है। परंतु असंख्य घटनाएं ऐसी हैं, जिनका कारण समझने में चोटी के वैज्ञानिक अपने आपको सर्वथा असमर्थ पा रहे हैं। सिद्धांतों के व्यभिचार मात्र से ज्योतिष शास्त्र की वैज्ञानिकता का प्रतिवाद नहीं... और पढ़ें

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