(4 लेख)
नेत्र रोग

जुलाई 2009

व्यूस: 6887

नेत्र की रचना : अपने अंगूठे मध्य भाग के बराबर जो अंगुल है, उन दो अंगुल के बराबर नेत्र बुद्बुद के अंतः प्रविष्ट नेत्र हैं। अक्षिगोलक लंबाई और चौड़ाई में अढ़ाई अंगुल है। यह आंख सुंदर, गोलाकार, गाय के स्तन के समान पांच भौतिक रचना है।... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यकुंडली व्याख्याघरचिकित्सा ज्योतिषग्रहभविष्यवाणी तकनीक

रक्तचाप के कारण, लक्षण एवं उपाय

अकतूबर 2008

व्यूस: 3298

सामान्यतः जिस ग्रह की महादशा अंतदर्शा में रोग होता है उस ग्रह से संबंधित देवता के अराधना से व्याधि शांत होती है। रक्तचाप में विशेष रूप से रूद्राक्ष का धारण विशेष लाभदायक है। इसमें भी विशेष रूप से तीनमुखी रूद्राक्ष धारण अपेक्षित है... और पढ़ें

ज्योतिषस्वास्थ्यउपायचिकित्सा ज्योतिष

पक्षाघात रोग: कारण एवं निवारण

जुलाई 2014

व्यूस: 2238

पक्षाघात ‘पक्ष’ व ‘आघात’ दो शब्दों से मिलकर बना है। ‘पक्ष’ अर्थात शरीर का आधा भाग तथा आघात अर्थात शरीर के आधे भाग का कार्य न करना। पक्षाघात में ज्ञानेन्द्रियां, कर्मेन्द्रियां व मन प्रभावित होते हैं। आचार्य चरक के अनुसार पक्षा... और पढ़ें

ज्योतिषज्योतिषीय विश्लेषणकुंडली व्याख्याभविष्यवाणी तकनीक

अशोक कुमार

आगस्त 2016

व्यूस: 217

कहा जाता है, हम सब ईश्वर के हाथों की कठपुतलियां हैं। वो जब जैसी डोरी घुमाता है हम भी वैसा ही करने लगते हैं। ईश्वर की इच्छा के बिना पत्ता भी नहीं हिलता। कई बार हम करना कुछ चाहते हैं और होता कुछ और है।... और पढ़ें

ज्योतिषप्रसिद्ध लोगज्योतिषीय विश्लेषणदशाभविष्यवाणी तकनीकगोचर

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