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क्या पति पत्नी मे प्रेम संबंध की प्रगाढ़ता वास्तु उपाय द्वारा बढ़ाई जा सकती हैं ?
 (i)हां
 (ii) नहीं
 (iii)पता नहीं

  

 

पुस्तक समीक्षा

स्वयं को और दूसरों को पहचानने की कला

लेखक : शषिकांत ÷सदैव'

मूल्य : 95/-

पृष्ठ : 205

प्रकाषक : डायमंड पॉकेट बुक्स (प्रा.) लि

x-35, ओखला इंडस्ट्रियल एरिया, फेज- II, दिल्ली-110020

फोन : 011-40712100

किसी व्यक्ति के व्यक्तित्व के विकास के लिए समाज के अन्य लोगों के साथ उसके संबंधों का मधुर और सौहार्दपूर्ण होना आवश्यक होता है। इस हेतु स्वयं को और दूसरे लोगों को पहचानना जरूरी है। एक-दूसरे को जानना-परखना एक कला है, जिस पर प्रस्तुत पुस्तक में विस्तार से विचार किया गया है।

व्यक्ति को पहचानने के कई माध्यम होते हैं। उसकी आदतों, पसंद-नापसंद, रहन-सहन आदि से उसके व्यक्तित्व की परख की जा सकती है। पुस्तक के प्रारंभ में किसी व्यक्ति की कौन-सी आदत उसकी किस मानसिक अवस्था का द्योतक होती है, इस पर गंभीरता से विचार किया गया है।

व्यक्ति के जीवन में किसी खास रंग की अपनी अहमियत होती है। उस रंग के प्रति उसका खास आकर्षण होता है। उसका यह पसंदीदा रंग उसके व्यक्तित्व, आचरण, व्यवहार, स्वभाव आदि का परिचायक होता है। विद्वान लेखक ने रंगों के आधार पर व्यक्ति के व्यक्तित्व, स्वभाव आदि का विशद विश्लेषण किया है।

किसी व्यक्ति की परख ज्योतिष की विभिन्न विधाओं के आधार पर भी की जा सकती है। राशि, नामाक्षर, मूलांक, हस्तरेखाएं, हाथ और उंगलियों के आकार-प्रकार आदि व्यक्ति के व्यक्तित्व के बारे में बहुत कुछ कह जाते हैं। पुस्तक में इन सारे तथ्यों की विस्तार से व्याख्या की गई है।

व्यक्ति के उठने-बैठने, बातें करने, खाने, सोने, चलने, पढ़ने-लिखने आदि का ढंग उसके व्यक्तित्व को दर्शाता है। पुस्तक में इन पहलुओं का विशद विश्लेषण इसकी खास विशेषता है।

लेखक ने विभिन्न माध्यमों के जरिए व्यक्तित्व विश्लेषण के विभिन्न पहलुओं पर कलम चलाई है। सरल भाषा में लिखित यह पुस्तक आम पाठक के लिए भी उपयोगी है, जिसे पढ़कर वह अपनी और अपने आसपास के लोगों की परख कर सकता है। कुल मिलाकर पुस्तक पठनीय और संग्रहणीय है।

योग की शक्ति रोग और
तनाव से मुक्ति

लेखक : आचार्य अविनाश सिंह

मूल्य : 100/-

पृष्ठ : 144

प्रकाशक : इंडिका पब्लिशर्स, 1680-81, मेहता मार्केट, नई सड़क, दिल्ली-110006,

दूरभाष : 23243756

आज के इस प्रदूषित वातावरण में मनुष्य के स्वास्थ्य का प्रभावित होना स्वाभाविक है। अपनी व्यस्तता और समयाभाव के कारण लोग अपने स्वास्थ्य पर आवश्यक ध्यान नहीं दे पाते। इस व्यस्त जीवन में स्वास्थ्य को अनुकूल रखने में योग सहायक हो सकता है, जिसके आसन और मुद्राएं सरल होती हैं। इन आसनों और मुद्राओं के नियमित अभ्यास से कोई व्यक्ति अपने जीवन को स्वस्थ रख सकता है। किंतु इन आसनों और मुद्राओं के पर्याप्त ज्ञान के अभाव में आम जन इनके लाभ से वंचित रह जाते हैं। प्रस्तुत पुस्तक इसी बात को ध्यान में रखकर लिखी गई है, जिसमें उन सारे योगों का समाहार हुआ है जिनका अभ्यास एक साधारण व्यक्ति भी कर सकता है।

योगासनों और मुद्राओं के अभ्यास से पहले योग के प्रकारों एवं अंगों को समझना आवश्यक होता है। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए लेखक ने पुस्तक के प्रारंभ में ही इन महत्वपूर्ण विषयों पर विस्तार से प्रकाष डाला है।

योगासनों के कुुुुुुुुुछ आवष्यक नियम हैं, जिनके पालन के बिना हानि की प्रबल संभावना रहती है। योगासन कब और कैसे करें, पुस्तक में इसका संक्षिप्त किंतु सम्यक्‌ विष्लेषण किया गया है।

योगासन से विभिन्न व्याधियों का उपचार भी संभव है। पुस्तक में विभिन्न शारीरिक एवं मानसिक रोगों से मुक्ति के उपयुक्त योगासनों पर विस्तारपूर्वक प्रकाष डाला गया है। वहीं, इन आसनों का शरीर के विभिन्न अंगों पर पड़ने वाले प्रभावों का उल्लेख भी विस्तार से किया गया है।

पुस्तक की एक खास विषेषता यह है कि इसमें योगासनों की विभिन्न मुद्राओं का सचित्र वर्णन किया गया है। अभ्यास के लिए ये चित्र अत्यंत उपयोगी हैं।

विद्वान लेखक ने सरल भाषा में योगासनों के गूढ़ रहस्यों एवं सिद्धांतों को पाठक तक पहुंचाने का सफल प्रयास किया है। कुल मिलाकर पुस्तक उपयोगी एवं संग्रहणीय बन पड़ी है।

सरल वास्तु उपाय

लेखक : तिलक राज

मूल्य : 100/-
पृष्ठ :
87

प्रकाशक : अखिल भारतीय ज्योतिष संस्था संघ (पंजी.), X-35, ओखला फेज-II, नई दिल्ली-110020,

फोन : 011-40541000, 40541040

आज का युग विज्ञान का युग है। आए दिन हो रहे वैज्ञानिक परीक्षणों का प्रतिकूल प्रभाव मानव जीवन पर पड़ता है। लोग अपने घर को इन परीक्षणों के प्रतिकूल प्रभाव तथा अन्य दोषों से मुक्त रखने का हरसंभव प्रयास करते हैं, किंतु वास्तु शास्त्र की सही जानकारी के अभाव में वे इसके लाभ से अक्सर वंचित रह जाते हैं। ऐसे में प्रस्तुत पुस्तक इस अर्थ में महत्वपूर्ण है कि इसमें वास्तुसम्मत भवन निर्माण के सभी प्रमुख सूत्रों का प्रतिपादन किया गया है।

पुस्तक के प्रारंभ में वास्तु शास्त्र और पंचमहाभूतों के महत्व और उपयोगिता का संक्षिप्त वर्णन किया गया है।

पुस्तक में गृह वास्तु उपाय के अतिरिक्त व्यावसायिक और औद्योगिक वास्तु के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर प्रकाष डाला गया है। वास्तु, ज्योतिष एवं अंक ज्योतिष के आपसी संबंधों के वर्णन के साथ-साथ लाल किताब और फेंगषुई के उपायों की व्याख्या भी पुस्तक में की गई है। साथ ही भवन के उपयुक्त दिषाओं का वर्णन भी किया गया है।

हमारे इर्द-गिर्द अनेकानेक पेड़-पौधे ऐसे होते हैं, जिनके सही उपयोग से हम अपने जीवन को सुखमय बना सकते हैं। इस तथ्य को ध्यान में रखते हुए लेखक ने प्रमुख उपयोगी पेड़-पौधों तथा अन्य वनस्पतियों का विस्तार से वर्णन किया है।

पुस्तक में वास्तु दोषों से उत्पन्न कष्ट, उनके कारण और निदान की विस्तृत व्याख्या की गई है। वहीं, वास्तु दोष निवारक यंत्रों से दोष दूर करने का विधान भी बताया गया है।

उक्त विषेषताओं के फलस्वरूप पुस्तक हर वर्ग के लोगों के लिए उपयोगी है।

वर्षफल

लेखक : डा. एस. पी. गौड़

मूल्य : 200/- पृष्ठ : 136

प्रकाशक : अखिल भारतीय ज्योतिष संस्था संघ (पंजी.), X-35, ओखला फेज-II, नई दिल्ली-110020, फोन : 011-40541000, 40541040

किसी समय विशेष के फलकथन के लिए वर्षफल का विशेष महत्व है। वैदिक ज्योतिष में मुख्य रुप से तीन विधाएं अधिक प्रचलित हैं - पाराशरी, जैमिनी तथा ताजिक। पाराशरी ज्योतिष में ग्रहों की प्रधानता है, जैमिनी में राशियों की, किंतु ताजिक ज्योतिष में कई बातों को विचारकर वर्षफल व प्रश्न-विश्लेषण किया जाता है।

वस्तुतः ताजिक ज्योतिष पर यवन संस्कृति का असर अधिक है। ताजिक-नीलकंठी नामक गं्रथ को ही ताजिक ज्योतिष का आधार बताया जाता है। इस विधा में पाराशरी ज्योतिष की तरह ही 9 ग्रहों, 12 भावों, 12 राशियों एवं अन्य संबद्ध कारकों का विचार कर फल कथन किया जाता है। मुंथा, वर्ष प्रवेश, वर्षेश, ताजिक दृष्टियां, दीप्तांश, ताजिक योग, मुद्दा दशा, सहम, सामुद्र चक्र आदि कारकों की इस विधा से वर्षफल कथन करने में अहम भूमिका होती है।

प्रस्तुत पुस्तक को ज्योतिष विद्वान एस.पी. गौड़ ने काफी यत्नपूर्वक लिखी है जिसमें विषय प्रवेश, वर्ष-कुंडली, मुंथा, ताजिक दृष्टि, ताजिक में ग्रहों का बल निर्धारण, वर्ष पंचाधिकारी तथा वर्षेश निर्णय, मुद्दा दशाएं, मुद्दा दशा फल, वर्षेश फल विचार, ताजिक योग, वर्षफल विचार, मासिक कुंडली, दैनिक कुंडली तथा होरा कुंडली, वर्षफल प्रयोग कुछ उदाहरण, उपग्रह अथवा अप्रकाश ग्रह आदि अध्यायों के माध्यम से वर्षफल निर्णय से संबंद्ध सभी अंगों पर प्रकाश डाला गया है। आखिर में परिशिष्ट के रूप में दी गई आधार वर्ग तालिकाएं भी विशिष्ट हैं।

कुल मिलाकर, ज्योतिष के शिक्षार्थियों एवं अन्य ज्योतिष प्रेमियों के लिए यह पुस्तक पठनीय ही नहीं अपितु संग्रहणीय भी है।

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