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ग्रह स्थिति एवं व्यापार मार्च 2010

डॉ. जगदंबा प्रसाद गौड़

मार्च मास में गोचर ग्रह परिवर्तन

इस मास ग्रहों का राशि परिवर्तन इस प्रकार होगा।

सूर्य 14 मार्च को रात्रि 10 बजकर 30 मिनट पर मीन राशि में आएगा। मंगल 10 मार्च को रात्रि 10 बजकर 40 मिनट पर मार्गी गति में आएगा। बुध 14 मार्च को रात्रि 08 बजकर 41 मिनट पर मीन राशि में आएगा, 28 मार्च को प्रातः 08 बजकर 30 मिनट पर उदित होगा और 30 मार्च को प्रातः 04 बजकर 38 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेगा। गुरु का 20 मार्च को शाम 05 बजकर 36 मिनट पर उदय होगा। शुक्र 02 मार्च को रात्रि 10 बजकर 32 मिनट पर मीन राशि में तथा 27 मार्च को प्रातः 02 बजकर 29 मिनट पर मेष राशि में प्रवेश करेगा। शेष ग्रह शनि, राहु, केतु, नेप्च्यून व यूरेनस की स्थिति पूर्ववत रहेगी।

गोचर फल विचार : मासारंभ वाले दिन 01 मार्च को सोमवार है और इस मास पांच सोमवार आएंगे। यह योग अति उत्तम है। यह मास सुख समृद्धिदायक रहेगा। देश के वरिष्ठ राजनीतिज्ञों के आपसी तालमेल तथा सहयोग में वृद्धि होगी और पूर्व से चल रहे मतभेद दूर होंगे। आम जनता के बीच हर्षोल्लास का वातावरण पैदा होगा। ÷÷सोमस्य पंचवारा यत्र मासे भवतिहि। धन धान्य समृद्धि स्यात सुखं भवति सदा।''

इस मास पांच मंगलवार भी आएंगे। यह योग ऊपर वर्णित फलों में कमी लाएगा। इस योग के कारण प्राकृतिक आपदाओं व प्रकोपों की संभावना है जिनके फलस्वरूप आम जन भयभीत होंगे। इसके अतिरिक्त देश की सीमाओं पर अशांति का वातावरण उत्पन्न होगा। उपद्रवकारी ताकतें सक्रिय होंगी जिससे दहशत चारों तरफ दहशत का माहौल बनेगा। यह योग कुछ देशों में आंतरिक कलह व सत्ता परिवर्तन का संकेत भी देता है। इसके फलस्वरूप किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के निधन से भी शोक व्याप्त होगा। ÷÷यत्र मासे महीसूनो जायन्ते पंच वासराः। रक्तेन पूरिता पृथ्वी छत्रभंगस्तदा भवेत॥''

लेकिन इस मास पांच बुधवार भी आ रहे हैं, जिससे ऊपर वर्णित पांच मंगलवारों के कारण उत्पन्न फलों में कमी आएगी। इस योग के फलस्वरूप दुनिया भर में भारत का प्रभुत्व बढ़ेगा।  बुद्धिजीवियों, योगाचार्यों तथा देश के खिलाड़ियों की प्रतिष्ठा में वृद्धि होगी। नए-नए अनुसंधानों में उच्च कोटि की सफलता मिलेगी। फलस्वरूप यह मास धन-धान्य, विकास, सुभिक्ष और सुख समृद्धिदायक होगा। ÷÷बुधस्य पंचवाराश्चेऽयते च निरंतरम। प्रजानां मुखमत्यन्तं सुभिक्षं च प्रजापते॥''

मासारंभ में ही सूर्य व मंगल, मंगल  व राहु एवं सूर्य व शनि का अपास में षडाष्टक योग में बने रहना और सूर्य, बुध, गुरु तथा शुक्र पर नीच राशि के मंगल की पूर्ण दृष्टि होना ये योग पश्चिमी बड़े देशों में आंतरिक कलह और आपदाओं से धन-जन की हानि का संकेत देत हैं। इन योगों के फलस्वरूप यवन देशों में आंतरिक कलह और आपस में युद्ध की स्थिति उत्पन्न होगी। वहीं इन देशों में उपद्रवकारी ताकतों में वृद्धि होगी, जिससे  जनता में भय और शोक वातावरण उत्पन्न होगा। ये योग इन देशों में कहीं सत्ता परिवर्तन भी कराएंगे। किंतु सूर्य, बुध, गुरु और शुक्र का चतुर्ग्रही योग भारत के लिए प्रगतिकारक होगा। 02 मार्च को शुक्र का मीन राशि में प्रवेश और उस पर शनि की दृष्टि के फलस्वरूप स्त्री वर्ग के नेताओं के लिए परिस्थितियां कुछ संकटकारी होंगी। 10 मार्च को मंगल का मार्गी गति में आना तथा राहु व गुरु से षडाष्टक योग में होना देश के विशिष्ट व्यक्तियों के लिए स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से भारी रहेगा। इस योग के फलस्वरूप कहीं-कहीं प्राकृतिक आपदाओं या अग्निकांडों की संभावना है, जिससे लोग पीड़ित होंगे। 14 मार्च को सूर्य का मीन राशि में प्रवेश कर शुक्र से संबंध बनाना तथा शनि से दृष्टित होना दैनिक उपयोगी वस्तुओं में चल रही महंगाई में और वृद्धि करेगा।  20 मार्च को गुरु का उदय होना देश में सुख-समृद्धि एवं धार्मिक कार्यों में वृद्धि का सूचक है किंतु 27 मार्च को शुक्र का मेष राशि में प्रवेश कर शनि से षडाष्टक योग में आना नए-नए रोगों के उत्पन्न होने का संकेत देता है।

सोना-चांदी : मासारंभ में 02 मार्च को बुध का शतभिषा नक्षत्र में प्रवेश कर स्वाति नक्षत्र को तथा वाम दृष्टि से पुष्य नक्षत्र को वेधना और इसी दिन शुक्र का मीन राशि में प्रवेश कर शनि द्वारा दृष्टित होना ये योग सोने व चांदी में पूर्व से चल रहे मंदे की लहर को और आगे ले जाएगा। 04 मार्च को सूर्य का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर पुनर्वसु, चित्रा व उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों को वेधना सोने में मंदे का संकेत देता है। इसी दिन गुरु का शतभिषा नक्षत्र में अपना पाद बदलना चांदी में भी मंदा बनाए रखेगा। 05 मार्च को शुक्र का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में आकर हस्त नक्षत्र को वेधना भी चांदी में मंदे का ही सूचक है। 09 मार्च को बुध का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा तथा वाम दृष्टि से पुनर्वसु नक्षत्र को वेधना मंदे की लहर को और आगे ले जाएगा। किंतु 10 मार्च को मंगल का मार्गी गति में आना कुछ तेजी का संकेत देता है। 14 मार्च को सूर्य व बुध का मीन राशि में शुक्र के साथ संबंध बनाना और इन पर वक्री गति के शनि की दृष्टि होना बाजारों में कुछ तेजी का योग बनाएगा। किंतु इसी दिन मीन संक्रांति का 15 मुहूर्ती में आना बाजारों को पुनः मंदे के माहौल में ले जा सकता है। क्योंकि बुध व गुरु का अस्त होना तथा शनि का वक्री गति में रहना ये दोनों योग मंदे का संकेत देते हैं अतः व्यापारीजन बाजार की वर्तमान स्थिति को विशेष ध्यान में रखें। 16 मार्च मंगलवार को नव संवत का आरंभ होना तथा मंगल का संवत का राजा होना बाजार में थोड़ी तेजी सूचक है, लेकिन इसी दिन शुक्र का रेवती नक्षत्र में प्रवेश कर उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र को वेधना तथा बुध का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर आर्द्रा व हस्त नक्षत्रों को वेधना ये दोनों योग मंदा ही बनाए रखेंगे। 18 मार्च को सूर्य का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में आकर आर्द्रा, हस्त व पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों को वेधना बाजार में तेजी का वातावरण उत्पन्न करेंगे। किंतु 20 मार्च को गुरु का उदय होना  सोने में पुनः मंदे का माहौल पैदा कर सकता है। 22 मार्च को बुध का रेवती नक्षत्र में आकर मूल व उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्रों को वेधना भी मंदे का ही सूचक है। किंतु 27 मार्च को शुक्र का अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र को वेधना और शनि से षडाष्टक योग में भी आना बाजारो में तेजी का संकेत देता है। 28 मार्च को बुध का उदय होना बाजार के उसी स्थिति में रखेगा। बाजार दो तरफा भी जा सकता है। 30 मार्च को बुध का अश्विनी नक्षत्र में आकर रोहिणी व पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रों को वेधना तथा शुक्र के साथ नक्षत्र संबंध बनाना बाजार में अस्थिरता पैदा करेगा। 31 मार्च को सूर्य का रेवती नक्षत्र में प्रवेश कर मृगशिरा, मूला व उत्तरा भाद्रपद नक्षत्रों को वेधना बाजार की पूर्व की स्थिति को बनाए रखेगा।

गुड़ व खांड : मासारंभ में 02 मार्च को बुध का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति को तथा वाम दृष्टि से पुष्य नक्षत्र को वेधना, बुध व रसकर के स्वामी गुरु का अस्त होना तथा इसी दिन शुक्र का मीन राशि में प्रवेश कर शनि से दृष्टित होना ये सारे योग गुड़ व खांड के बाजार में मंदे का संकेत देते हैं। 04 मार्च को सूर्य का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर पुनर्वसु, चित्रा व उत्तराषाढ़ा सूचक है। 05 मार्च को शुक्र का उत्तराभाद्रपद नक्षत्र में आकर हस्त नक्षत्र को वेधना भी खांड के मंदे की लहर को और आगे जाएगा। किंतु 09 मार्च को बुध का पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र में आकर चित्रा तथा वाम दृष्टि से पुनर्वसु नक्षत्र को वेधना बाजार में तेजी का वातावरण उत्पन्न करेगा। 10 मार्च को मंगल का मार्गी गति में आना बाजार में कुछ तेजी का संकेत देता। 14 मार्च को सूर्य व बुध का मीन राशि में शुक्र से राशि संबंध बनाना और इनका वक्री शनि द्वारा दृष्टित होना ये दोनों योग भी बाजारों में तेजी के सूचक हैं। लेकिन मीन की संक्रांति का 15 मुहूर्ती में आना मंदे का संकेत देता है। अतः व्यापारी वर्ग बाजार की वर्तमान स्थिति को विशेष ध्यान में रखें। 18 मार्च को सूर्य का  उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में आकर आर्द्रा, हस्त व पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों को वेधना तथा इसी दिन गुरु का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा नक्षत्र को वेधना इन योगों के फलस्वरूप गुड़ व खांड में एकदम से तेजी आएगी। 20 मार्च को गुरु का उदय होना बाजार में थोड़ा बदलाव लाएगा। 22 मार्च को  बुध का रेवती नक्षत्र में आकर मूल व उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्रों को वेधना भी बाजार को पुनः मंदे की लहर में ले जाएगा। 27 मार्च को शुक्र का अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र को वेधना और शनि से षडाष्टक योग में आना बाजार में उतार-चढ़ाव के साथ तेजी की लहर पैदा करेगा। 28 मार्च को बुध का उदय होना भी बाजार में अस्थिरता बनाए रखेगा। व्यापारी वर्ग बाजार की वर्तमान स्थिति को विशेष ध्यान में रखें। 30 मार्च को बुध का अश्विनी नक्षत्र में आकर रोहिणी व पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रों को वेधना तथा बुध व शुक्र का नक्षत्र संबंध बनना ये दोनों योग बाजार में उतार-चढ़ाव का वातावरण उत्पन्न करेंगे। लेकिन बुध व शुक्र का शनि से षडाष्टक योग बाजार को दो तरफा भी ले जा सकता है। अतः व्यापारी वर्ग बाजार की वर्तमान स्थिति को विशेष ध्यान में रखें। ३१ मार्च को सूर्य का रेवती नक्षत्र में प्रवेश कर मृगशिरा, मूला व उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्रों को वेधना बाजार की पूर्व की स्थिति को बनाए रखेगा। इस समय राजनीतिक हस्तक्षेप भी बाजार को प्रभावित करेगा।

अनाज व दालवान : मासारंभ में 02 मार्च को बुध का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति तथा वाम दृष्टि से पुष्य नक्षत्र को वेधना मूंग, मोठ, उड़द, अरहर इत्यादि दालवान के बाजार में मंदे की लहर पैदा करेगा। इसी दिन शुक्र का मीन राशि में प्रवेश कर वक्री शनि द्वारा दृष्टित होना गेहूं, जौ, चना, चावल इत्यादि अनाजवान के बाजार को तेजी का संकेत देता है। किंतु 04 मार्च को सूर्य का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर पुनर्वसु, चित्रा व उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों को वेधना अनाजों के बाजार में भी मंदे का वातावरण उत्पन्न करेगा। 05 मार्च को शुक्र का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में आकर हस्त नक्षत्र को वेधना दोनों बाजारों मंदे का ही संकेत देता है। 09 मार्च को बुध का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा तथा वाम दृष्टि से पुनर्वसु नक्षत्र को वेधना बाजारों में उतार-चढ़ाव रखता हुआ मंदा बनाए रखेगा। 10 मार्च को मंगल का मार्गी होना बाजार की पूर्व लहर को और आगे ले जाएगा। 14 मार्च को सूर्य व बुध का मीन राशि में संबंध बनाना तथा वक्री गति के शनि के द्वारा दृष्टित होना गेहूं, जौ, चना इत्यादि अनाजवान व मूंग, मोठ, मसूर इत्यादि दालवान में तेजी का संकेत देता है, लेकिन इसी दिन मीन की संक्रांति का 15 मुहूर्ती होना मंदे का माहौल पैदा करेगा। अतः व्यापारी वर्ग बाजार की वर्तमान स्थिति को विशेष ध्यान  में रखें। 16 मार्च को शुक्र का रेवती नक्षत्र में प्रवेश कर उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र को वेधना तथा बुध का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर आर्द्रा व हस्त नक्षत्रों को वेधना इन दोनों योगों  के कारण अनाजों के बाजार में तेजी आएगी, लेकिन दालवान में मंदे की स्थिति रहेगी। 18 मार्च को सूर्य का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में आकर आर्द्रा, हस्त व पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों को वेधना अनाजों में तेजी के रुझान को बनाए रखेगा। इसी दिन गुरु का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा नक्षत्र को वेधना दालवान में पूर्व के मंदे की लहर को बनाए रखेगा। 20 मार्च को गुरु का उदय होना अनाजों में तेजी का ही संकेत देता है। 22 मार्च को बुध का रेवती नक्षत्र में आकर मूल तथा उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्रों को वेधना दालवान के बाजार में कुछ तेजी पैदा करेगा। 27 मार्च को शुक्र का अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र को वेधना और शनि से षडाष्टक योग में आना ये दोनों योग गेहूं, जौ इत्यादि अनाजवान तथा मूंग, मोठ इत्यादि दालवान में तेजी का ही संकेत देते हैं। 28 मार्च को बुध का उदय होना दोनों बाजारों में कुछ बदलाव ला सकता है, अतः व्यापारी वर्ग वर्तमान स्थिति को विशेष ध्यान में रखें। 30 मार्च को बुध का अश्विनी नक्षत्र में आकर रोहिणी व पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रों को वेधना तथा बुध व शुक्र का नक्षत्र संबंध बनना ये दोनों योग बाजारों को मंदे की लहर में रखेंगे। 31 मार्च को सूर्य का रेवती नक्षत्र में प्रवेश कर मृगशिरा, मूला व उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्रों को वेधना अनाजों को पुनः तेजी के वातावरण में ले जाएगा किंतु दालवान को मंदे की लहर में ही रखेगा।

घी व तेलवान : मासारंभ में 02 मार्च को बुध का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति तथा वाम दृष्टि से पुष्य नक्षत्र को वेधना तेलों के बाजार में तेजी का वातावरण उत्पन्न करेगा। किंतु इसी दिन शुक्र का मीन राशि में प्रवेश कर वक्री शनि से दृष्टित होना घी के बाजार में मंदे का संकेत देता है। 04 मार्च को सूर्य का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर पुनर्वसु, चित्रा व उत्तराषाढ़ा नक्षत्रों को वेधना तेलों में बदलाव लाकर मंदे की लहर में ले जाएगा। 05 मार्च को शुक्र का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में आकर हस्त नक्षत्र को वेधना भी तेल, तेलवान व घी में मंदे का सूचक है। 09 मार्च को बुध का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा तथा वाम दृष्टि से पुनर्वसु नक्षत्र को वेधना बाजार में मंदे की लहर को और बढ़ाएगा। 10 मार्च को मंगल का मार्गी होना बाजार के पूर्व की लहर को आगे बढ़ाएगा। किंतु 14 मार्च को सूर्य व बुध का मीन राशि में शुक्र से राशि संबंध बनाना और इन तीनों का वक्री शनि से दृष्टित होना ये दोनों योग बाजार में तेजी का वातावरण उत्पन्न करेंगे। इसी दिन मीन की संक्रांति का 15 मुहूर्ती में आना भी घी व तेल के बाजार में तेजी का ही संकेत देता है। 16 मार्च को बुध का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में प्रवेश कर आर्द्रा व हस्त नक्षत्रों को तथा शुक्र का रेवती नक्षत्र में प्रवेश कर उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र को वेधना बाजारो में तेजी का माहौल पैदा करेगा। 18 मार्च को सूर्य का उत्तरा भाद्रपद नक्षत्र में आकर आर्द्रा, हस्त व पूर्वाषाढ़ा नक्षत्रों को वेधना तेलों में तेजी बनाए रखेगा लेकिन इसी दिन गुरु का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा नक्षत्र को वेधना घी के बाजार में बदलाव लाकर पुनः मंदे का रुझान पैदा करेगा। 20 मार्च को गुरु का उदय होना भी घी में मंदे का सूचक है। 22 मार्च को बुध का रेवती नक्षत्र में आकर मूल व उत्तरा भाद्रपद नक्षत्रों को वेधना भी घी की मंदे की लहर को बढ़ाएगा। यह योग तेलों में भी मंदे का ही संकेत देता है। 27 मार्च को शुक्र का अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश कर पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्र को वेधना और शनि से षडाष्टक योग में  आना घी के बाजार में पुनः तेजी का वातावरण उत्पन्न करेगा, किंतु तेलों में मंदे की स्थिति बनी रहेगी। 28 मार्च को बुध का उदय होना बाजार के रुख में बदलाव ला सकता है। व्यापारी वर्ग बाजार के वर्तमान रुख को विशेष ध्यान में रखें। 30 मार्च को बुध का अश्विनी नक्षत्र में प्रवेश कर रोहिणी व पूर्वा फाल्गुनी नक्षत्रों को वेधना तथा शुक्र से नक्षत्र संबंध बनाना ये दोनों योग तेल व घी के बाजार में मंदे का माहौल पैदा करेंगे। 31 मार्च को सूर्य का रेवती नक्षत्र में प्रवेश कर मृगशिरा, मूला व उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्रों को वेधना तेलों में पुनः तेजी का वातावरण उत्पन्न करेगा, किंतु घी में मंदे की स्थिति बनी रहगी।

      

नोट : उपर्युक्त फलादेश पूरी तरह ग्रह स्थिति पर आधारित है। पाठकों का बेहतर मार्गदर्शन ही इसका मुख्य उद्देश्य है। कोई निर्णय लेने से पहले निवेशक को उन अन्य संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए, जो बाजार को प्रभावित करते हैं। कृपया याद रखें कि व्यापारी की सट्टे की प्रवृत्ति और निर्णय लेने की शक्ति में कमी तथा भाग्यहीनता के कारण होने वाले नुकसान के लिए लेखक, संपादक एवं प्रकाशक जिम्मेवार नहीं हैं।

 

   

 
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