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  ग्रह स्थिति फरवरी

शेयर बाजार : तेजी मंदी फरवरी

  ग्रह स्थिति मार्च

शेयर बाजार : तेजी मंदी मार्च

ग्रह स्थिति एवं व्यापार फरवरी २०१०

डॉ. जगदंबा प्रसाद गौड़

फरवरी मास में गोचर ग्रह परिवर्तन

इस मास ग्रहों का राशि परिवर्तन इस प्रकार होगा।

सूर्य १३ फरवरी को प्रातः 01 बजकर ३८ मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। बुध ०६ फरवरी को प्रातः ०५ बजकर १५ मिनट पर मकर राशि में तथा २६ फरवरी को प्रातः ०५ बजकर ४५ मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेगा और इसी दिन रात्रि ०९ बजकर २५ मिनट पर अस्त हो जाएगा। गुरु १८ फरवरी  को शाम ०५ बजकर ४५ मिनट पर अस्त होगा। शुक्र ०३ फरवरी को ०४ बजकर ४०  मिनट पर उदित होगा तथा ०६ फरवरी को रात्रि १० बजकर ५० मिनट पर कुंभ राशि में प्रवेश करेगा। शेष ग्रह मंगल, शनि, राहु, केतु, नेप्च्यून व यूरेनस की स्थिति पूर्ववत ही रहेगी।

गोचर फल विचार

मासारंभ वाले दिन 01 फरवरी को सोमवार है और इस मास चार सोमवार के साथ-साथ अन्य सभी वार भी चार-चार ही आएंगे। फलस्वरूप इस मास का मासिक फल मध्यम ही रहेगा। प्राकृतिक आपदाओं के कारण जन साधारण को अनेक कष्टों का सामना करना पड़ेगा।  दैनिक उपयोगी वस्तुएं अत्यधिक महंगी होंगी जिसके फलस्वरूप जनमानस को मानसिक पीड़ा का सामना करना पड़ेगा। यह मास राजनीतिज्ञों के लिए भी अनेक उलझनें खड़ी करेगा, जिनसे जूझने के लिए उन्हें अनेक प्रकार के हथकंडे होंगे। सामाजिक एवं सांप्रदायिक अनेक समस्याएं उभर कर सामने आएंगी, जिन्हें विद्वत्‌ वर्ग की सहायता से सुलझा लिया जाएगा। इन समस्याओं से राजनेताओं में आपसी मतभेदों को और बढ़ावा मिलेगा। मासांरभ में ही सूर्य व मंगल का समसप्तक योग में होना तथा मंगल व राहु का, मंगल व गुरु का, शनि और गुरु का तथा सूर्य व केतु का आपस में षडाष्टक योग में होना अग्नि कांड, वायुयान दुर्घटना, सांप्रदायिक दंगों एवं प्राकृतिक दुर्घटनाओं का सूचक है। इन योगों के फलस्वरूप जन धन की हानि की संभावना प्रबल है। वहीं सीमाओं पर पुनः युद्धमय काली घटओं के छाने से जनमानस में भय उत्पन्न  हो सकता है। मंगल व बुध का षडाष्टक योग में होना भी अंतर्राष्ट्रीय व्यापारिक संबंधों में बाधा खड़ी करेगा। नए व पुराने समझौतों के टूटने की संभावना भी है। ०६ फरवरी को शुक्र का कुंभ राशि में आकर मंगल के साथ षडाष्टक योग में आना प्राकृतिक प्रकोपों का संकेत देता है, जिनसे खड़ी फसलों को हानि पहुंचेगी। वहीं शुक्र का शनि के साथ षडाष्टक योग में आना भी देश के प्रधान राजनीतिज्ञों, खास तौर पर स्त्री वर्ग, के लिए राजनीतिक संकट उत्पन्न कर सकता है। १३ फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में आकर मंगल व शनि के साथ षडाष्टक योग में आना किसी प्रतिष्ठित राजनीतिज्ञ के सत्ताहरण का संकेत देता है। इसके अतिरिक्त दैनिक उपयोग की वस्तुएं और महंगी होंगी। फलस्वरूप जन मानस में शासकों के प्रति रोष उत्पन्न होगा और सत्ताधारी गण महंगाई पर अंकुश लगाने को कानून बनाने पर मजबूर होंगे। यह योग काला बाजारी करने वालों व स्टॉकिस्टों के लिए भी हानिप्रद सिद्ध होगा। मंगल और शनि का बुध, गुरु व शुक्र के साथ षडाष्टक योग में होना भी सांप्रदायिक एवं धार्मिक समस्याओं का सूचक है, जिनके फलस्वरूप राजनीतिज्ञों की उलझनें बढ़ेंगी। १८ फरवरी को गुरु ग्रह का अस्त तथा मंगल व शनि का वक्री गति में होना कृषि वर्ग के लोगों और धार्मिक नेताओं के लिए हानिप्रद सिद्ध होगा।

सोना व चांदी

मासारंभ वाले दिन 01 फरवरी को शुक्र का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर विशाखा नक्षत्र को वेधना सोने व चांदी को मंदी की तरफ ले जाएगा। ०३ फरवरी को शुक्र का इसी नक्षत्र में उदय होना बाजार की मंदी को आगे बढ़ाएगा। इसी दिन बुध का भी उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में आकर पूर्वा भाद्रपद व मृगशिरा नक्षत्रों को वेधना बाजार की पूर्व की लहर को और आगे बढ़ाएगा। ०४ फरवरी को गुरु का शतभिषा नक्षत्र में  चरण बदलना भी बाजारों में मंदी का ही सूचक है। किंतु ०६ फरवरी को बुध का मकर राशि में प्रवेश कर सूर्य व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाना और इसी दिन शुक्र का कुंभ राशि में आकर इनसे संबंध तोड़ना तथा मंगल के साथ षडाष्टक योग में आना ये सभी योग बाजार को तेजी की तरफ ले जाएंगे। इसी दिन सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर अश्लेषा, विशाखा व श्रवण नक्षत्रों को वेधना भी बाजार में तेजी का सूचक है। ०९ फरवरी को वक्री गति के शनि का पुनः उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में आकर पुनर्वसु नक्षत्र को वेधना सोने व चांदी की तेजी में वृद्धि का संकेत देता है। किंतु १२ फरवरी को शुक्र का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेधना चांदी के बाजार में मंदी का माहौल पैदा करेगा, लेकिन सोने में तेजी ही रखेगा। १३ फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में आकर गुरु व शुक्र से राशि संबंध बनाना और फाल्गुन मास की संक्रांति का ३० मुहूर्ती में होना ये दोनों योग दोनों बाजारों की पूर्व की स्थिति में और वृद्धि करेगा। इसी दिन शनैचरी आमावस्या का होना तथा बुध का श्रवण नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना ये दोनों योग सोने में बदलाव का संकेत देते हैं। १५ फरवरी सोमवार को चंद्र दर्शन का १५ मुहूर्ती होना भी बाजार में मंदी का सूचक है। १८ फरवरी को गुरु का अस्त होना भी मंदी ही दर्शाता है। १९ फरवरी को सूर्य का शतभिषा नक्षत्र में आकर पुष्य व स्वाति नक्षत्रों को वेधना बाजारों में मंदी का रुख बनाए रखेगा। २१ फरवरी को अतिचारी अवस्था के बुध का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर वाम दृष्टि से अश्लेषा नक्षत्र को वेधना सोने को पुनः तेजी के माहौल में ले जाएगा, किंतु  चांदी में मंदी ही बनाए रखेगा। २२ फरवरी को शुक्र का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा नक्षत्र को वेधना चांदी में चल रही मंदी की लहर को और आगे ले जाएगा और सोने के बाजार में भी मंदी का माहौल पैदा करेगा। २६ फरवरी को बुध का कुंभ राशि में आकर सूर्य, गुरु व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाना तथा इसी दिन उसका अस्त  होना ये दोनों योग भी चांदी में  मंदी का ही संकेत देते हैं। सोने में भी ये योग उतार-चढ़ाव करते हुए मासांत तक मंदी का ही वातावरण उत्पन्न करेंगे।

गुड़ व खांड

मासारंभ में 01 फरवरी को शुक्र का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर विशाखा नक्षत्र को वेधना खांड को मंदी के माहौल में रखेगा। किंतु शुक्र का सूर्य से संबंध व वक्री गति के मंगल की दृष्टि ये दोनों योग गुड़ के बाजार में तेजी का वातावरण उत्पन्न करेंगे। ०३ फरवरी को शुक्र का इसी नक्षत्र में उदय होना बाजार की पूर्व की स्थिति को आगे बढ़ाएगा। इसी दिन बुध का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में आकर पूर्वाभाद्रपद व मृगशिरा नक्षत्रों को वेधना बाजारों के पूर्व के रुख में और वृद्धि करेगा। ०४ फरवरी को गुरु का शतभिषा नक्षत्र में चरण बदलना बाजारों में तेजी का सूचक है। ०६ फरवरी को बुध का मकर राशि में प्रवेश कर सूर्य व शुक्र से संबंध बनाना और इसी दिन शुक्रा का कुंभ राशि में प्रवेश कर इनसे संबंध तोड़ना तथा मंगल से षडाष्टक योग में आना खांड को तो तेजी के रुख में ही रखेगा, लेकिन गुड़ में बदलाव लाएगा। इसी दिन सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर अश्लेषा, विशाखा व श्रवण नक्षत्रों को वेधना चल रहे रुख को और बढ़ाएगा। ०९ फरवरी को वक्री गति के शनि का पुनः उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में आकर पुनर्वसु नक्षत्र को वेधना बाजारा में मंदी का माहौल पैदा करेगा। किंतु १२ फरवरी को शुक्र का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेधना बाजारों में तेजी का संकेत देता है। १३ फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में प्रवेश कर गुरु व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाना, फाल्गुन मास की संक्रांति का ३० मुहूर्ती होना, इसी दिन बुध का श्रवण नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना और श्नैश्चरी अमावस्या का होना ये सभी योग बाजार में मंदी का संकेत देते हैं। १५ फरवरी सोमवार को चंद्र दर्शन का १५ मुहूर्ती होना भी बाजार में मंदी का ही सूचक है। १९ फरवरी को सूर्य का शतभिषा नक्षत्र में आकर पुष्य व स्वाति नक्षत्रों को वेधना दोनों जिंसों के बाजारों में पुनः तंजी का वातावरण उत्पन्न करेगा। २२ फरवरी को शुक्र का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा नक्षत्र को वेधना बाजार की पूर्व की स्थिति में और वृद्धि करेगा। २६ फरवरी को बुध का कुंभ राशि में आकर सूर्य, गुरु व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाना तथा इसी दिन अस्त भी होना गुड़ व खांड की तेजी पर अंकुश लगाएगा जो मासांत तक चलेगा।

अनाज व दालवान

मासारंभ में 01 फरवरी को शुक्र का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर विशाखा नक्षत्र को वेधना गेंहू, जौ, चना, ज्वार, बाजरा इत्यादि अनाजों को तेजी के वातावरण में रखेगा। शुक्र पर वक्री मंगल की पूर्ण दृष्टि का होना मूंग, उड़द, मोठ, अरहर इत्यादि दालवान को भी तेजी की लहर में ही रखेगा। किंतु ०३ फरवरी को शुक्र का इसी नक्षत्र में उदय होना अनाजों तथा दालवान में मंदी का वातावरण उत्पन्न करेगा। ०४ फरवरी को गुरु का शतभिषा नक्षत्र में चरण बदलना अनाजों में मंदी का ही संकेत देता है। ०६ फरवरी को बुध का मकर राशि में प्रवेश कर सूर्य व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाना तथा इसी दिन शुक्र का कुंभ राशि में प्रवेश कर इनसे संबंध तोड़ना व मंगल से षडाष्टक योग में आना और इसी दिन सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर अश्लेषा, विशाखा व श्रवण नक्षत्रों को वेधना ये सभी योग अनाजों व दालवान में मंदी की लहर को चलाए रखेंगे। ०९ फरवरी को वक्र गति के शनि  का उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर पुनर्वसु नक्षत्र को वेधना बाजारों की पूर्व की स्थिति में और वृद्धि करेगा। १२ फरवरी को शुक्र का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेधना गेंहू इत्यादि अनाजों में तेजी का वातावरण उत्पन्न करेगा किंतु   दालवान को पूर्ववत्‌ ही रखेगा। १३ फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में आकर गुरु और शुक्र के साथ राशि संबंध बनाना और फाल्गुन मास की संक्रांति का ३० मुहूर्ती होना तथा इसी दिन श्नैश्चरी अमावस्या का होना और बुध का श्रवण नक्षत्र में आकर वाम दृष्टि से धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना ये सभी योग अनाजों व दालवान के बाजर में मंदी का ही संकेत देते हैं। १५ फरवरी सोमवार को चंद्र दर्शन का १५ मुहूर्ती होना भी बाजार में मंदी का सूचक है। १८ फरवरी को गुरु का अस्त हो जाना बाजार को पूर्ववत ही रखता है। किंतु १९ फरवरी को सूर्य का शतभिषा नक्षत्र में आकर पुष्य व स्वाति नक्षत्रों को वेधना गेंहू, जौ, चना, ज्वार इत्यादि अनाजों में तेजी का माहौल उत्पन्न करेगा। २१ फरवरी को अतिचारी अवस्था के बुध का धनिष्ठा में आकर वाम दृष्टि से अश्लेषा नक्षत्र को वेधना अनाजों में तेजी ही बनाए रखेगा। किंतु २२ फरवरी को शुक्र का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा नक्षत्र को वेधना अनाजों के बाजार को पुनः मंदी की लहर में ले जाएगा। मूंग, मोठ, उड़द इत्यादि दालवान में भी मंदी रहेगी। २६ फरवरी को बुध का कुंभ राशि में आकर सूर्य, गुरु व शुक्र के साथ राशि संबंधन बनाना तथा इसी दिन उसका अस्त भी होना दोनों जिंसों के बाजारों को मासांत तक मंदी के वातावरण में ही रखेगा।

घी व तेलवान

मासारंभ में 01 फरवरी को शुक्र का धनिष्ठा नक्षत्र में प्रवेश कर विशाखा नक्षत्र को वेधना तेल, तेलवान व घी के बाजार में मंदी का वातावरण उत्पन्न करेगा। ०३ फरवरी को शुक्र का इसी नक्षत्र में उदय होना घी के बाजार में मंदी ही दर्शाता है। इसी दिन बुध का उत्तराषाढ़ा नक्षत्र में आकर पूर्वा भाद्रपद व मृगशिरा नक्षत्रों को वेधना तेलों के बाजार में भी मंदी का वातावरण बनाए रखेगा। ०४ फरवरी को गुरु का शतभिषा नक्षत्र में चरण बदलना बाजार की स्थिति को पूर्ववत ही रखेगा। किंतु ०६ फरवरी को बुध का मकर राशि में आकर सूर्य व शुक्र से राशि संबंध बनाना तथा इसी दिन शुक्र का कुंभ राशि में आकर इनसे संबंध तोड़ना और मंगल से षडाष्टक योग में आना तथा इसी दिन सूर्य का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर अश्लेषा, विशाखा व श्रवण नक्षत्रों को वेधना ये सभी योग तेल व घी के बाजार में तेजी का वातावरण उत्पन्न करेगा। ०९ फरवरी को वक्री गति के शनि का उत्तरा फाल्गुनी नक्षत्र में प्रवेश कर पुनर्वसु नक्षत्र को वेधना तेलों की तेजी को आगे बढ़ाएगा। १२ फरवरी को शुक्र का शतभिषा नक्षत्र में आकर स्वाति नक्षत्र को वेधना बाजार को पूर्ववत ही रखेगा। १३ फरवरी को सूर्य का कुंभ राशि में आकर गुरु व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाना, फाल्गुन मास की संक्रांति का ३० मुहूर्ती होना, श्नैश्चरी अमावस्या का आना तथा बुध का श्रवण नक्षत्र में आकर वाम दृष्टि से धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना ये सभी योग तेलों में तेजी का संकेत देते हैं। इन योगों के फलस्वरूप घी में भी तेजी आएगी। १५ फरवरी सोमवार को चंद्र दर्शन का १५ मुहूर्ती होना भी घी व तेल में तेजी का ही सूचक है। किंतु १८ फरवरी को गुरु का अस्त होना तेल व घी के बाजर की तेजी पर अंकुश लगाएगा। १९ फरवरी को सूर्य का शतभिषा नक्षत्र में आकर पुष्य व स्वाति नक्षत्र को वेधना तेलों के बाजर को पुनः तेजी के माहौल में ले जाएगा, किंतु घी के बाजार को मंदी के रुख में ही रखेगा। २१ फरवरी को अतिचारी बुध का धनिष्ठा नक्षत्र में आकर वाम दृष्टि से अश्लेषा नक्षत्र को वेधना तेलों की तेजी की लहर को और बढ़ाएगा, किंतु घी में मंदी बढ़ेगी। २२ फरवरी को शुक्र का पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र में आकर चित्रा नक्षत्र को वेधना घी में मंदी की लहर को और बढ़ाएगा। २६ फरवरी को बुध का कुंभ राशि में आकर सूर्य, गुरु व शुक्र के साथ राशि संबंध बनाना तथा इसी दिन उसका अस्त भी होना ये योग घी के बाजार में चल रही मंदी को और बढ़ाएंगे। इन योगों के फलस्वरूप तेलों में भी मंदी आएगी।

नोट : उपर्युक्त फलादेश पूरी तरह ग्रह स्थिति पर आधारित है, पाठकों का बेहतर मार्ग दर्शन ही इसका मुख्य उद्देश्य है। इसके साथ-साथ संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए जो बाजार को प्रभावित करते हैं। कृपया याद रखें कि व्यापारी की सट्टे की प्रवृत्ति और निर्णय लेने की शक्ति में कमी तथा भाग्यहीनता के कारण होने वाले नुकसान के लिए लेखक, संपादक एवं प्रकाशक जिम्मेवार नहीं हैं।           

      

नोट : उपर्युक्त फलादेश पूरी तरह ग्रह स्थिति पर आधारित है। पाठकों का बेहतर मार्गदर्शन ही इसका मुख्य उद्देश्य है। कोई निर्णय लेने से पहले निवेशक को उन अन्य संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए, जो बाजार को प्रभावित करते हैं। कृपया याद रखें कि व्यापारी की सट्टे की प्रवृत्ति और निर्णय लेने की शक्ति में कमी तथा भाग्यहीनता के कारण होने वाले नुकसान के लिए लेखक, संपादक एवं प्रकाशक जिम्मेवार नहीं हैं।

 

   

 
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