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कहां किसकी होगी सरकार

माह अक्तूबर में हरियाणा, महाराष्ट्र तथा अरुणाचल प्रदेश में विधान सभा चुनाव होने जा रहे हैं। राष्ट्र की तीन अलग-अलग दिशाओं के इन तीन राज्यों के विधान सभा चुनाव भारतीय राजनीति में अहम भूमिका निभाएंगे। ये चुनाव १३ अक्तूबर २००९ को होंगे। इस तिथि का मूलांक ०४, भाग्यांक ०७ तथा मासांक 01 है। इसके चलित का अंक है - ०६ (ऋणात्मक)। दिन मंगलवार है, जिसका अंक है-०९। मतगणना होनी है २२ अक्तूबर २००९ को। इसका मूलांक, भाग्यांक तथा मासांक मतदान वाले दिन के ही समान है। इसके चलित का अंक है-०९ (ऋणात्मक)। दिन गुरुवार है, जिसका अंक है ०३। चर्चा यह भी है कि चुनाव आयोग मतगणना की तिथि २० अक्तूबर से पहले करने की सोच रहा है। यदि ऐसा होता है, तो मतदान वाले चलित समय की प्रबलता बढ़ जाएगी।

यहां उक्त चुनावों का पूर्व ज्योतिषीय विश्लेषण प्रस्तुत है। सबसे पहले दो प्रमुख दलों का ज्योतिषीय विवेचन प्रस्तुत है। ये दल हैं - भारतीय जनता पार्टी और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस।

भारतीय जनता पार्टी

भारतीय जनता पार्टी अर्थात भाजपा की स्थापना ०६ अप्रैल १९८० को हुई। इसका मूलांक  ०६, भाग्यांक 01 तथा नामांक ०९ है। इसका आयु अंक है - ०३ (३० वां वर्ष)। इसका भाग्यांक मतदान तथा मतगणना के मूलांक के साथ मित्रता भाव रखता है। इसका मूलांक मतदान के चलित से समानता तथा मतगणना के चलित से मित्रता का भाव रखता है। इसका नामांक तथा आयु अंक ये दोनों भी मतदान तथा मतगणना के चलित से मित्रता का भाव रखते हैं। इन दोनों दिनों के अंकों के साथ भी भाजपा के अंक अनुकूल युति रखते हैं। भाजपा के साथ सबसे बड़ी समस्या यह है कि चलित वर्षांक ०२ (वर्ष-२००९) इसके पक्ष में नहीं है। यह अंक साझेदारी का है। इसके पक्ष में नहीं होने के कारण भाजपा को साझेदारी के मामले में हानि उठानी पड़ रही है और आगे भी उठानी पड़ेगी। इसी ने इसके राजनीतिक साझेदारों (तेदेपा, बीजद, इनेलोद आदि) को इससे अलग कर दिया। इसी अंक ०२ की नकारात्मकता के कारण भाजपा का प्रदर्शन महाराष्ट्र में अच्छा नहीं रहेगा क्योंकि वहां वह साझेदारी में (शिवसेना के साथ) चुनाव लड़ रही है। यह अंक परिवार/पारिवारिकता का भी है। इसके प्रतिकूल होने के कारण भाजपा को अपने परिवार के भीतर भी बड़ी कठिनाइयां झेलनी पड़ रही हैं और इस वर्ष अभी और झेलनी पड़ेंगी।

अब एक नजर भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के अंकों पर। राजनाथ सिंह का १० जुलाई २००९ से ५९वां वर्ष शुरू हुआ है। यहीं से इनका बुरा वक्त शुरू हो गया है। इनके मूलांक और भाग्यांक का भाजपा के मूलांक और भाग्यांक से ठीक-ठीक विपरीतता का समीकरण है। इसलिए भाजपा को इनके अध्यक्ष बने रहने का भारी नुकसान झेलना पड़ेगा। हालांकि इनका आयु अंक सोनिया गांधी के भाग्यांक तथा कांग्रेस के आयु अंक से समानता रखता है, किंतु अन्य अंकीय समीकरण पक्ष के नहीं हैं; विशेषकर पार्टी अध्यक्ष के रूप में कार्यकाल की शुरुआत के। इन प्रतिकूल परिस्थितियों को देखते हुए भाजपा का प्रदर्शन सत्ता में आने लायक होगा इसमें संदेह है।

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस अर्थात कांग्रेस के वर्तमान स्वरूप की स्थापना २जनवरी १९७८ को हुई। इसका अभी ३२वां वर्ष चल रहा है। इसका अंक बनता है-०५। इसकी राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी का

भाग्यांक इसके आयु अंक से समानता रखता है। पार्टी पर अभी अंक ०७ की दशा चल रही है। यह दशा इसके मूलांक की सहयोगी है। चलित वर्षांक इसकी स्थापना के मूलांक से समानता रखता है। इसलिए आगामी चुनाव कांग्रेस के लिए अधिक अनुकूल सिद्ध हो सकते हैं। अंक ०५ की अंक ०२ के साथ मित्रता कुछ कम रहती है। अतः थोड़ी परेशानी उठानी पड़ सकती है। मतदान तथा मतगणना के दिनों के मूलांक कांग्रेस के भाग्यांक तथा उनके भाग्यांक कांग्रेस के मूलांक के सहयोगी हैं। दोनों दिनों का चलित का समय कांग्रेस के नामांक का सहयोगी है। कांग्र्रेस का नामांक मतदान के दिन के साथ मित्रता तथा मतगणना के दिन के साथ समानता रखता है। अतः मतगणना का परिणाम कांग्रेस के पक्ष में हो सकता है।

अब बात करते हैं कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी की। अभी इनका ६३वां वर्ष चल रहा है। इनका मूलांक ०९ है, जो इनके नामांक तथा जन्म के मूलांक के साथ समानता रखता है। कांग्रेस का आयु अंक सोनिया के भाग्यांक के साथ समानता रखता है। ये दोनों अंक चलित वर्षांक ०२ के साथ कुछ कम मित्रता भाव रखते हैं। चूंकि अंक ०२ परिवार तथा संगठन की साझेदारी का प्रतिनिधि है, इसलिए कांग्रेस को अपने अंदर खींचातानी का सामना करना पड़ सकता है। साथ ही जहां साझेदार हैं (जैसे-महाराष्ट्र), वहां कुछ रस्साकसी देखने को मिल सकती है। हो सकता है कि मुख्यमंत्री पद को लेकर भारी खींचातानी हो।

अब तीनों राज्यों की बारी-बारी से बात करते हैं।

महाराष्ट्र का नामांक ०२ है। इसकी स्थापना 01 मई १९६० को हुई। अभी इसकी स्थापना का ५०वां वर्ष चल रहा है। इस पर अंक ०८ की दशा प्रभावी है, जो वर्ष २०१४ तक चलेगी। महाराष्ट्र तथा एनसीपी दोनों का भाग्यांक ०४  है। यह पितृ प्रभाव वाला अंक है। अतः अपनी स्थापना से ही एनसीपी कांग्रेस के साथ जूनियर पार्टनर के रूप में सत्ता में साझेदार है। यह साझेदारी एनसीपी के मूलांक के अगले वर्ष (१६वें वर्ष) अर्थात वर्ष २०१४ तक तो चलेगी। यही वर्ष २०१४ महाराष्ट्र पर प्रभावी वर्तमान दशा की सीमा-रेखा भी है। हां, एनसीपी के भाग्यांक के अगले वर्ष (१३वें वर्ष) अर्थात वर्ष २०१२ से वर्ष २०१४ के बीच महाराष्ट्र एनसीपी नेतृत्व में कुछ बड़ा फेरबदल देखने को मिल सकता है।

महाराष्ट्र का मूलांक तथा भाग्यांक दोनों क्रमशः कांग्रेस के भाग्यांक तथा संयुक्तांक से समानता रखते हैं। इसका नामांक कांग्रेस के मूलांक से समानता रखता है। इसका आयु अंक सोनिया गांधी के भाग्यांक तथा कांग्रेस के आयु अंक से समानता रखता है। अतः कांग्रेस को अच्छे परिणाम मिल सकते हैं।

भाजपा का मूलांक महाराष्ट्र के मूलांक से समानता तथा इसके भाग्यांक से अनुकूलता रखता है। यह आंकड़ा तो लाभदायक है, किंतु राजनाथ सिंह तथा पार्टी के अंकों का चलित का तालमेल प्रतिकूल है। अतः भाजपा को नुकसान उठाना पड़ेगा। वह सत्ता-सुख से वंचित रह सकती है। इसकी सीटें भी कम हो सकती हैं। यदि चुनाव परिणाम से पहले राजनाथ सिंह भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से विदा हो जाएं, तो पार्टी का भाग्य पलट सकता है, किंतु ऐसा होगा नहीं। इसी को तो भाग्य कहते हैं। भाजपा को नुकसान की प्रबल संभावना है।

अब एक नजर राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी अर्थात एनसीपी पर। इसकी स्थापना महाराष्ट्र के विशिष्ट वर्ष में हुई है। अतः दोनों की दशाएं समान चलती हैं। अभी इसकी स्थापना का ११वां वर्ष (अंक ०२) चल रहा है। यह स्थापना के मूलांक के साथ मित्रता भाव रखता है। यही चलित वर्षांक भी है। एनसीपी का भाग्यांक ०४ है, जो मतदान तथा मतगणना के मूलांक से समानता रखता है। २५ मई १९९९ को बनी एनसीपी की स्थापना का चलित अंक सोनिया गांधी के भाग्यांक तथा कांग्रेस के आयु अंक से समानता रखता है। एनसीपी तथा कांग्रेस के मूलांकों में सहयोगी भाव है। एनसीपी का आयु अंक कांग्रेस के मूलांक से समानता रखता है। यही साझेदारी का अंक भी है। अतः महाराष्ट्र में एनसीपी का कांग्रेस से गठजोड़ वर्ष २०१४ तक तो चलेगा ही, चाहे कितने ही झटके क्यों न लगें। हां, वर्ष २०१२ से २०१४ के बीच एनसीपी के राष्ट्रीय अथवा

महाराष्ट्र प्रदेश में शीर्ष नेतृत्व संबंधी परिवर्तन देखने को मिल सकता है। एनसीपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार के जन्म का मूलांक सोनिया गांधी के जन्म के मूलांक के साथ अनुकूलता रखता है। दोनों के जन्म का चलित का मासांक भी समान है। इनका संयुक्तांक भी सोनिया के उक्त दोनों अंकों से मेल खाता है। अतः भले ही सौ बातें हो जाएं, शरद पवार अभी लंबे समय तक सोनिया के साझेदार बने रहेंगे। चलित वर्षांक इनके भाग्यांक से मेल खाता है। मतदान तथा मतगणना के दिन के अंक तथा चलित इनके अनुकूल हैं। अतः मतगणना का परिणाम इनके लिए उत्साहवर्द्धक रह सकता है।

अब शिव सेना की बात करें

१९ जून १९६६ को बनी शिवसेना का अभी ४४वां वर्ष चल रहा है। यह अंक दोहरी पितृ समस्या से ग्रस्त है। इसलिए शिव सेना को इस वर्ष न सिर्फ सत्ता से वंचित रहना पड़ सकता है, बल्कि इसके पितृ पुरुष (बाल ठाकरे) को भी कई प्रकार की समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है। श्री ठाकरे का अभी ८३वां वर्ष (अंक ०२) चल रहा है। उम्र का यह वर्ष गलत निर्णय का अंक है। अंक 01 की दशा में चल रहे ठाकरे के लोकप्रिय नाम का अंक भी यही है, किंतु संयुक्तांक इनके प्रतिकूल है। इन्हें वर्ष २०११ तक अपने राजनीतिक वर्चस्व को लेकर परेशान रहना पड़ सकता है। शिव सेना के मूलांक और भाग्यांक की अवस्था कांग्रेस के मूलांक और भाग्यांक की अवस्था के सर्वथा विपरीत है। इस अवस्था के फलस्वरूप चुनाव-परिणाम भी सेना के प्रतिकूल होंगे।

कौन बनेगा महाराष्ट्र का मुख्यमंत्री?

वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक आर चह्‌वाण का मूलांक महाराष्ट्र के मूलांक तथा कांग्रेस के भाग्यांक से समानता रखता है। इनका नामांक ०५ है, जो सोनिया गांधी के भाग्यांक तथा कांग्रेस के आयु अंक से समानता रखता है। इनका आयु अंक ०७ (५२ वां वर्ष) कांग्रेस के मूलांक तथा चलित वर्षांक का सहयोगी है। इसलिए सोनिया का कुछ समर्थन (तृतीय भाव का) इन्हें मिल सकता है। अतः यदि २७ अक्तूबर तक मुख्यमंत्री का फैसला होता है, तब तो वह दौड़ में रह सकते हैं, अन्यथा उसके बाद आयु अंक ०८ (५३वां वर्ष) आरंभ हो जाने के कारण उनके लिए समस्याएं उठ खड़ी होंगी और आलाकमान का आशीर्वाद उन्हें नहीं मिल पाएगा। ऐसी स्थिति में कोई ऐसा व्यक्ति मुख्यमंत्री बन सकता है, जो उनसे कम से कम ०८ से १० वर्ष बड़ा हो। उम्र के ५५ वें वर्ष (२०१२) में उनकी तकदीर फिर जोर मारेगी।

पूर्व मुख्यमंत्री विलासराव देशमुख का भाग्यांक सोनिया गांधी के भाग्यांक तथा कांग्रेस के आयु अंक से समानता रखता है। इनका आयु अंक ०२ (६५ वां वर्ष) चलित वर्षांक तथा पार्टी के मूलांक से समानता रखता है। अतः ये मुख्यमंत्री पद की दौड़ में रहेंगे। यदि भारी खींचातानी या उठापटक चली तो जन्म के मूलांक ०८ की कृपा से परिणाम देशमुख के पक्ष में जा सकता है।

संभावित दलीय स्थिति-(सीटवार)

कांग्रेस-७७, एनसीपी-७०, भाजपा-४८, शिवसेना-५३, अन्य-४०

हरियाणा

01 नवंबर १९६६ को स्थापित हरियाणा का अभी ४३वां वर्ष चल रहा है। इस पर अभी अंक ०७ की दशा चल रही है। यही अंक इसका भाग्यांक भी है। हरियाणा के प्रमुख क्षेत्रीय दल भारतीय राष्ट्रीय लोकदल की स्थापना का विवरण उपलब्ध नहीं है। इसका नामांक ६४ है, जिसका मूलांक बनता है-०१। इसके मुखिया ओम प्रकाश चौटाला के नामांक का मूलांक ०३ है। 01 जनवरी १९३५ को जन्मे चौटाला का भाग्यांक हरियाणा के नामांक के साथ मित्रता भाव रखता है। इनके जन्म के मूलांक और भाग्यांक मतदान तथा मतगणना के मूलांक और भाग्यांक के साथ मित्रता भाव रखते हैं। इनका नामांक तथा आयु अंक (०३) मतदान तथा मतगणना के चलित अंक के साथ मित्रता

भाव रखता है। इन सारे तथ्यों को देखकर लगता है कि इनकी  स्थिति अच्छी होनी चाहिए, किंतु ऐसा है नहीं। इनकी बॉडी लैंग्वेज में अंक 01 (नेतृत्व), अंक ०२ (साझेदारी) तथा अंक ०३ (निर्णय) मृत अवस्था में है। चलित का वर्षांक ०२ भी इनके प्रतिकूल है। इन अंकों की मृत अवस्था के कारण ही चौटाला ने भाजपा से साझेदारी तोड़ने का फैसला कर अपने नेतृत्व को दुष्प्रभावित कर लिया है। इनके मूलांक और भाग्यांक की स्थिति कांग्रेस के मूलांक और भाग्यांक से विपरीत है। अतः इनकी स्थिति कांग्रेस से ठीक उल्टी होगी, अर्थात कांग्रेस सत्ता में आएगी जबकि भारतीय राष्ट्रीय लोकदल  सत्ता से बाहर रहेगा।

भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष का नामांक हरियाणा के मूलांक से समानता रखता है। यह मतदान व मतगणना के दिन के मूलांक से मित्रता भाव रखता है। यह पार्टी के भाग्यांक से भी मित्रता भाव रखता है। मगर पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजनाथ सिंह के अंकीय समीकरणों की विपरीतता का नुकसान पार्टी को हरियाणा में भी उठाना पड़ेगा।

कांग्रेस के प्रदेशाध्यक्ष का नामांक यथास्थिति बरकरार रखने वाला है तथा सोनिया गांधी के भाग्यांक और कांग्रेस के आयु अंक से समानता रखता है। अतः इस चुनाव में फूलचन्द मुलाना के नेतृत्व में कांग्रेस की प्रतिष्ठा में वृद्धि हो सकती है।

एनसीपी के प्रदेशाध्यक्ष के नामांक के वे ही समीकरण हैं, जो कि भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के हैं, मगर इनकी पार्टी तथा राष्ट्रीय अध्यक्ष शरद पवार के अंकीय समीकरणों की अनुकूलता दोनों पार्टियों के प्रदर्शन में अंतर पैदा करती है। एनसीपी हरियाणा में सीटों या वोट प्रतिशत के मामले में अपनी प्रतिष्ठा बचाने में सफल हो सकती है।

किसके सिर बंधेगा ताज?

मुख्यमंत्री भूपिन्दर सिंह हुड्डा का भाग्यांक सोनिया गांधी के नामांक तथा जन्म के मूलांक से समानता रखता है। १५ सितंबर १९४७ को जन्मे हुड्डा का जन्म का चलित सोनिया के भाग्यांक से समानता रखता है। अतः इन पर सोनिया की विशेष कृपा रहेगी। मतगणना के समय हुड्डा का ६३वां वर्ष चल रहा होगा। इसका मूलांक भी सोनिया के अंकों से अच्छा मेल रखता है। इनका नामांक हरियाणा के भाग्यांक एवं आयु अंक से तथा इनका भाग्यांक और आयु अंक राज्य की स्थापना के चलित के अंक से समानता रखता है। अपने भाग्यांक तथा आयु अंक की इसी प्रबल युति के कारण हुड्डा एक बार फिर हरियाणा का राज संभाल लें तो कोई आश्चर्य नहीं।

मुख्यमंत्री पद की एक प्रबल दावेदार मानी जाने वाली कुमारी शैलजा की भी चर्चा कर ली जाए। २४ सितंबर १९६२ को जन्मीं शैलजा के मूलांक, भाग्यांक, नामांक तथा जन्म के चलित के अंक में समानता है। ये अंक हुड्डा के नामांक से समानता रखते हैं। इनका आयु अंक सोनिया गांधी के नामांक एवं जन्म के मूलांक का सहयोगी है। इस अंक की यही स्थिति हुड्डा के अंकों के साथ है। अतः शैलजा का नाम मुख्यमंत्री के लिए उछल सकता है, लेकिन हुड्डा के अंक इनके अंकों से कहीं अधिक सशक्त हैं। ऐसे में शैलजा के मुख्यमंत्री बनने की संभावना कम है।

संभावित दलीय स्थिति (सीटवार)

           कांग्रेस-             ६९

           भाजपा-             ०३

           इनेलोद-             ०९

           एनसीपी-             ०२

           अन्य-             ०७

अरुणाचल प्रदेश

वर्ष १९८७ में स्वतंत्र राज्य के रूप में अस्तित्व में आए अरुणाचल प्रदेश का अभी २३वां वर्ष (अंक-०५) चल रहा है तथा उस पर अभी अंक ०८ की दशा प्रभावी है। इसकी पहली चौथाई में मुख्य मंत्री बदला (वर्ष २००७ में), दूसरी चौथाई में चुनाव हो रहे हैं (वर्ष २००९ में), तीसरी चौथाई (वर्ष २०११-१२) में मुख्यमंत्री बदल सकता है तथा चौथी चौथाई (वर्ष २०१३-१४) में अगले चुनाव होंगे। इस प्रकार स्पष्ट है कि अगला मुख्यमंत्री अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर पाएगा।

भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष का नामांक मतदान तथा मतगणना के अंकों के साथ विषमता रखता है। साथ ही यह प्रदेश के नामांक, मूलांक तथा भाग्यांक के साथ भी विखंडन पैदा करता है। पार्टी का राष्ट्रीय समीकरण भी प्रतिकूल हैं। अतः पार्टी की सीटें पिछली बार से कम हो सकती हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष नबाम टुकी का नामांक मतदान तथा मतगणना के अंकों से विषमता रखता है। राज्य के

अंकों के साथ भी इसकी यही स्थिति है। फिर भी संभव है कि सीटों का नुकसान कांग्रेस को न झेलना पड़े क्योंकि पार्टी, सोनिया गांधी तथा मुख्यमंत्री के अंक मामला संभाल लेंगे। किंतु बहुत संभव है कि टुकी के अंकों की विषमता का खामियाजा पार्टी को भुगतना पड़े। संभव यह भी है कि चुनाव परिणाम के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर उठापटक  हो। इनका अधिक समय तक अध्यक्ष पद पर रहना पार्टी के हित में नहीं है। तब पितृदोह की स्थिति पैदा हो सकती है।

एनसीपी के प्रदेशाध्यक्ष का नामांक राज्य के नामांक का मित्र है। मतदान तथा मतगणना के चलित के अंक भी इनके सहयोगी हैं। किंतु इन दिनों के अंक पक्ष में नहीं हैं। फिर भी पार्टी के राष्ट्रीय समीकरणों के पक्ष में होने के कारण वोट के प्रतिशत में कुछ बढ़ोतरी हो सकती है।

किसके हिस्से आएगी गद्दी?

सबसे पहले बात करते हैं मुख्यमंत्री दोरजी खांडू की। ०३ मार्च १९५५ को जन्मे खांडू का नामांक राज्य के आयु अंक से समानता रखता है। इनका आयु अंक राज्य के नामांक से समानता रखता है। जन्म का मूलांक, मासांक तथा चलित का अंक इनके आयु अंक का सहयोगी है। इसीलिए इन्हीं के फिर से मुख्यमंत्री बनने के अच्छे योग हैं। उम्र के ५३वें वर्ष में राज्य के मूलांक  भाग्यांक के साथ विखंडन होने से इनके साथी साथ छोड़ देंगे, तब समर्थन के अभाव में इन्हें पद-त्याग करना पड़ सकता है।

पूर्व मुख्यमंत्री गीगोंग अपांग का जन्म ०८ जुलाई १९४९ को हुआ। इन पर अभी अंक 01 की दशा प्रभावी है। यह दशा नामांक तथा जन्म के मूलांक के साथ विषमता रखती है। चलित का वर्षांक इनके भाग्यांक तथा आयु अंक के साथ अनुकूलता रखता है। अतः मुख्यमंत्री पद के लिए अपांग दौड़ में रहेंगे, किंतु जन्म के मूलांक और भाग्यांक की युति के कारण अभी इनकी साझेदारी और समर्थन का अंक ०२ दुर्बल है। इसी की दुर्बलता के कारण अपने पहले कार्य काल के २० वें वर्ष में प्रवेश करते ही इन्हें मुख्यमंत्री पद से हाथ धोना पड़ा था। यही अंक अभी चलित वर्षांक है। ऐसे में वे मुख्यमंत्री बनने के लिए पर्याप्त समर्थन नहीं जुटा पाएंगे। इनके लिए वर्ष २०११ विशेष भूमिका निभा सकता है। उस समय इनका ६२वां/ ६३वां तथा अरुणाचल प्रदेश का २४वां/२५वां वर्ष चल रहा होगा। तब इन्हें फिर से मुख्यमंत्री का पद मिल सकता है।

एक और पूर्व मुख्यमंत्री मुकुट मिथि का पूर्ण जन्म-विवरण उपलब्ध नहीं है। इनका मात्र जन्म वर्ष मिला है और वह है १९५४। इनके जन्म का वर्षांक तथा आयु अंक मुख्यमंत्री दोरजी खांडू के अंकों से समानता रखता है। साथ ही नामांक का भी सहयोग मिल रहा है। अतः ये मुख्यमंत्री पद के लिए दौड़ में बने रहने की पूरी कोशिश तो करेंगे, किंतु प्रदेश के मूलांक, भाग्यांक तथा चलित वर्षांक के अनुकूल नहीं होने के कारण अंतिम परिणाम इनके पक्ष में आता नहीं दिख रहा है।

संभावित दलीय स्थिति (सीटवार)

            कांग्रेस            ४१

            एनसीपी      ०२

            भाजपा         ०६

            अन्य            ११

आलेख में व्यक्त विचार लेखक के अपने विचार हैं। इनमें आने वाले किसी भी व्यतिरेक का दायित्व पत्रिका तथा संपादक-मंडल पर नहीं है।

 

 
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