Untitled Document


     
 
 
-
 
Untitled Document
मुख्य पृष्ठ
आपके पत्र
  संपादकीय
ज्योतिषीय समाचार
ज्योतिषीय सामग्री
सामयिक चर्चा
व्रत/पर्व
आवरण कथा
श्री हनुमान महिमा
सत्य कथा
ज्योतिष गंगा
हेल्थ कैप्सूल
    हस्तरेखा
 विचार गोष्ठी
अध्यात्म
पावन स्थल
ज्ञान सरिता
समस्या समाधान
वास्तु परामर्श
वास्तु समाधान
टोटके
राशिफल
शेयर बाजार
ग्रह स्थिति व्यापार
पुस्तक समीक्षा
पंचांग
राहुकाल
ग्रह स्पष्ट
प्रश्न जन्मपत्री
मुफ्त उपहार
क्या नास्तिक व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति का कारण उसके पूर्व जन्म के कर्मों का फल है?  
 (i)हां
 (ii) नहीं
 (iii)पता नहीं

  

 

पुस्तक समीक्षा

 

एन एस्ट्रॉलॉजिकल गाइड टु हील युअरसेल्पफ

ज्योतिष हमारे व्यक्तिगत और सामाजिक जीवन को समझने और उसे दिशा देने की प्राचीनतम पद्धति है। वहीं वनस्पति जगत हमारे जीवन का आधार है, जिसमें अन्य बातों के अतिरिक्त हर रोग का निदान है। रोगोपचार के लिए जड़ी बूटियों का उपयोग आदि काल से ही होता रहा है। इन जड़ी बूटियों का संबंध विभिन्न ग्रहों से है, अर्थात हर ग्रह की अपनी-अपनी जड़ी-बूटियां हैं। किसी ग्रह विशेष के बुरे प्रभाव से हुए रोग के निदान हेतु उसके प्रतीक जड़ी का उपयोग किया जाए, तो रोग के दूर होने की संभावना प्रबल हो जाती है। प्रस्तुत पुस्तक में इन्हीं तथ्यों के महत्व पर प्रकाश डाला गया है।

पुस्तक तीन खंडों में विभाजित है। जानकारी के अभाव में अक्सर लोग सही समय पर रोग के सही उपचार के लिए सही जड़ी बूटियों का उपयोग नहीं कर पाते। इसी बात को ध्यान में रखकर पहले खंड में जड़ी बूटियों का परिचय दिया गया है। वहीं, इनके रख रखाव और इनसे औषधि निर्माण की विधि पर भी प्रकाश डाला गया है, जिसे पढ़कर एक आम व्यक्ति भी दैनिक उपयोग में आने वाली दवाओं का निर्माण कर सकता है।

चिकित्सा ज्योतिष के अध्येताओं के लिए विभिन्न पौधों तथा जड़ी बूटियों की राषियों का ज्ञान आवष्यक होता है। इसके अभाव में किसी रोगी की चिकित्सा संभव नहीं है। पुस्तक के दूसरे खंड में इस तथ्य पर खास ध्यान दिया गया है। इस खंड में जहां कालपुरुष के अलग-अलग भावों की स्वामी राषियों पर प्रकाष डाला गया है, वहीं विभिन्न राषियों के प्रतीक पौधों तथा जड़ी बूटियों का विवरण भी दिया गया है।

मानव शरीर के विभिन्न अंगों पर राशि चक्र की विभिन्न राशियों का नियंत्रण है। इस तरह किसी व्यक्ति का स्वास्थ्य इन राशियों की अनुकूलता और प्रतिकूलता पर निर्भर करता है। पुस्तक के तीसरे और अंतिम खंड में इस पक्ष की विशद व्याख्या की गई है।

कुल मिलाकर पुस्तक सूचनाप्रद है और सरल एवं बोधगम्य भाषा के कारण पठनीय बन पड़ी है।

लेखिका: अदा मुइर

मूल्य  :  १२५/- रुपये, पृष्ठ : १७६

प्रकाशक  :  न्यू एज बुक्स, ए-४४, नारायणा पफेज-प्  नई दिल्ली-११००२८ ;भारत  फोन नं. ०११ २५८९५२१८

 डॉमेस्टिक वास्तु

वास्तु शास्त्र ज्योतिष का ही एक अंग है। इसका महत्व अति प्राचीन काल से रहा है। आज के वैज्ञानिक युग में भी इसकी प्रासंगिकता बनी हुई है, बल्कि इसमें और अधिक वृद्धि हुई है। एक दोषमुक्त घर हर व्यक्ति की कामना होती है। इसीलिए महानगरों के साथ-साथ छोटे-छोटे गांवों और कस्बों में रहने वाले लोग भी अपना घर वास्तु के नियमों के अनुरूप बनाना चाहते हैं। प्रस्तुत पुस्तक की रचना इन्हीं नियमों को ध्यान में रखकर की गई है।

मानव शरीर की तरह ही वास्तु शास्त्र भी पांच तत्वों के सिद्धांत पर आधारित है। गृह निर्माण में इन तत्वों के उपयोग पर पर्याप्त ध्यान दिया जाए, तो उसमें वास करने वालों का जीवन सुखमय हो सकता है। पुस्तक के विषय प्रवेश में इन तत्वों के महत्व का विशेष रूप से उल्लेख किया गया है।

वास्तु निर्माण में वास्तु पुरुष तथा ब्रह्मस्थान का स्थान अति महत्वपूर्ण होता है। किसी घर में रहने वाले लोगों के जीवन को सुखमय तथा सफल बनाने में इनकी भूमिका अहम होती है। इसी प्रकार दिशाओं, भूखंड के ऊर्जा स्तर और आकार आदि का भी अपना-अपना महत्व होता है। पुस्तक में भवन निर्माण के इन महत्वपूर्ण पहलुओं पर विस्तार से चर्चा की गई है।

अक्सर देखने में आता है कि लोग भवन निर्माण के समय अज्ञानतावश टैंक, मुख्यद्वार, खिड़कियों, सीढ़ियों, पूजास्थल, रसोई, भोजनकक्ष, बैठक, शयनकक्ष, अध्ययनकक्ष आदि को उचित स्थान नहीं दे पाते। फलस्वरूप उन्हें अनेक बाधाओं का सामना करना पड़ता है। इस बात को ध्यान में रखते हुए भवन के उक्त तमाम हिस्सों के उपयुक्त स्थान पर प्रकाश डाला गया है।

इन सबके अतिरिक्त दिशा-ग्रह संबंध, ग्रहजन्य दोषों तथा उनसे मुक्ति के उपायों, विभिन्न यंत्रों, फेंग शुई सामग्रियों तथा पिरामिडों के महत्व और उनके उपयुक्त स्थानों का विश्लेषण भी विशेष रूप से किया गया है। वहीं, वास्तु के कुछ महत्वपूर्ण सिद्धांतों तथा उपयुक्त रंगों पर प्रकाश डालने से भी विद्वान लेखक चूके नहीं हैं।

पुस्तक ज्ञानवर्धक है और वास्तु शास्त्र के छात्रों तथा अध्येताओं के लिए उपयोगी बन पड़ी है।
लेखक
: प्रमोद कुमार सिन्हा

मूल्य   : २००/- रुपये  पृष्ठ : १९५

प्रकाशक   : ऑल इंडिया फेडरेशन ऑफ एस्ट्रॉलॉजर्स सोसाइटीज, ग-३५, ओखला फेज-२, नई दिल्ली-११००२०

फोन : ०११-४०५४१०४०

डेली निरयण प्लैनेटरी इपफेमरिस
2001-2025

पंचांग भारतीय ज्योतिष का एक अभिन्न और महत्वपूर्ण अंग है। हिंदू संस्कृति में सभी धार्मिक एवं मांगलिक कार्यों तथा संस्कारों के सफल संपादन के लिए शुभ मुहूर्तों की गणना में इसकी भूमिका अहम होती है। इसलिए पंचांग का शुद्ध होना जरूरी होता है। इस दृष्टि से प्रस्तुत पुस्तक अत्यंत उपयोगी है।

ज्योतिषीय गणना में दैनिक भूकेंद्रीय निरयण ग्रह स्पष्ट का स्थान अति महत्वपूर्ण है। ज्योतिर्विदों की सुविधा को ध्यान में रखते हुए पुस्तक में वर्ष के हर मास की हर तिथि के निरयण ग्रह स्पष्ट का अलग-अलग चित्रांकन किया गया है।

ग्रहों का नक्षत्रों एवं निरयण राशियों में गोचर मनुष्य के जीवन की दिशा और दशा बदलने की क्षमता रखता है। इसलिए इसकी सुष्ठ और सुविवेचित गणना आवश्यक होती है। पुस्तक में ग्रह गोचर का विश्लेषण वैज्ञानिक ढंग से किया गया है।

गणना में लग्नारंभ की शुद्धि अति आवश्यक होती है। इसके अभाव में गणना त्रुटिपूर्ण होती है। इसे ध्यान में रखते हुए पुस्तक में लग्नारंभ शुद्धि की सारणी का चित्रांकन किया गया है। वहीं, निरयण षड्वर्ग गणना एवं साधन हेतु सारणियां दी गई हैं।

निरयण दशांश, षोडशांश तथा षष्ठ्यांश का भी ज्योतिष में महत्वपूर्ण स्थान है। षड्वर्ग की तरह इनकी गणना भी आवश्यक होती है। पुस्तक में इनकी सारणियां भी दी गई हैं। साथ ही इनकी प्रासंगिकता तथा गणना की संक्षिप्त विधि बताई गई है।

जन्मकालिक गणना के लिए अन्य बातों के अलावा आनुपातिक चंद्रकलाओं के अनुसार दशाशेष की गणना जरूरी होती है। पुस्तक में इसकी सारणी के साथ-साथ गणना की एक संक्षिप्त विधि सोदाहरण दी गई है। इसके अतिरिक्त विंशोत्तरी दशा, अंतर्दशा, प्रत्यंतरदशा और उनके स्वामियों तथा अवधि की सारणियां भी दी गई हैं, जो गणना में सहायक होंगी।

संक्षेप में चित्रपक्ष अयनांश पर आधारित पचीस वर्षों का यह पंचांग अपने आप में सूचनाप्रद और ज्योतिर्विदों के लिए अत्यंत उपयोगी है।

मूल्य     :  ३१५/- रुपये  पृष्ठ : ४०९

प्रकाशक :  सागर पब्लिकेशंस,  ७२, वेद मैंशन, नई दिल्ली-११०००१.  फोन नं.: ०११-२३३२०६४८

२०१० राशिपफल लाल किताब

विज्ञान के इस युग में जहां मानव जाति का उल्लेखनीय विकास हुआ है, वहीं अनेकानेक जटिल समस्याएं भी आई हैं। हर व्यक्ति आज किसी न किसी समस्या से ग्रस्त है। वह एक समस्यामुक्त जीवन की कामना तो रखता है किंतु समस्या के निदान के उचित उपाय की जानकारी के अभाव में यह संभव नहीं हो पाता। ऐसे में ज्योतिष एवं उसकी अनुषंगी विधाएं उसकी सहायता कर सकती हैं।

लाल किताब भारतीय ज्योतिष का ही एक अंग है। फलकथन में ज्योतिष की भांति इसका भी अपना अलग महत्व है। इसके सम्यक विश्लेषण से किसी व्यक्ति के जीवन में घटने वाली घटनाओं की जानकारी मिल सकती है। हर व्यक्ति यह जानने को उत्सुक रहता है कि उसका आने वाला वर्ष कैसा रहेगा। इस दृष्टि से प्रस्तुत पुस्तक एक उत्कृष्ट रचना है।

किसी व्यक्ति के जीवन, उसके उत्थान-पतन में ग्रहों, नक्षत्रों की भांति उसकी जन्मराशि की भूमिका भी अहम होती है। इसलिए फलकथनकार को इस बिंदु पर गंभीरता से विचार करना चाहिए। प्रस्तुत पुस्तक में इस तथ्य पर खास ध्यान दिया गया है। विभिन्न राशियों में जन्मे लोगों के लिए वर्ष २०१० कैसा रहेगा इसका संक्षिप्त किंतु सारगर्भित विश्लेषण किया गया है। फलादेश हर मास के साप्ताहिक आधार पर किया गया है। साथ ही हर राशि के अंत में उसके पूरे वर्ष के फलाफल का संक्षिप्त विवरण भी दिया गया है।

पुस्तक में फलकथन के साथ-साथ जीवन में घटने वाली अशुभ घटनाओं से मुक्ति के उपाय भी बताए गए हैं। ये उपाय अत्यंत सहज और सरल हैं, जिन्हें अपनाकर एक आम व्यक्ति भी अपने जीवन को सुखमय बना सकता है। पाठकों की सुविधा की दृष्टि से पुस्तक के आरंभ में उपायों की विधियां बताई गई हैं।

आम जन को ध्यान में रखते हुए पुस्तक की रचना आम बोलचाल की भाषा में की गई है। कुल मिलाकर यह एक उपयोगी और संग्रहणीय पुस्तक है।

लेखक   : बृजमोहन सेखड़ी (लाल किताब वाले)

मूल्य  : १२५/- रुपये पृष्ठ : १७६

प्रकाशक  : इंडिका पब्लिशर्स १६८०-८१, मेहता मार्केट,  नई सड़क दिल्ली-११०००६

 
Untitled Document
-
फ्यूचर पॉइंट द्वारा सर्वाधिकार सुरक्षित।