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विनहर्ता गणेशजी की मूर्ति

 


फ्यूचर समाचार के नवंबर २००९ अंक के साथ मुफ्त उपहार विनहर्ता गणेशजी की मूर्ति  दी जा रही है। मानव जाति का सभी प्रकार से परित्राण करने वाले, इहलौकिक-पारलौकिक कल्याणकारी उपायों का ज्ञान देने वाले, कलयुग के कल्याणकारी देव श्री गणेश ही हैं। यथा कलौ चण्डी विनायकः, अर्थात कलयुग में गणेश और चंडी मां कल्याणकारी माने गये हैं। आदि-व्याधि, शोक-संताप, दीनता- हीनता, दरिद्रता, ममता, संकल्प, विकल्प उत्पन्न करने वाले गणेश ही हैं। इनको प्रजा का स्वामी, विद्यार्थियों का हितैषी, व्यवसायों का दाता माना गया है। सभी देवगणों का स्वामी गणेश को ही माना जाता है।

उत्तम व्यवसाय या व्यवसाय की वृद्धि और लाभ के लिए श्री गणेश का लॉकेट अनमोल है। प्रस्तुत विधि द्वारा गणेश जी की मूर्ति प्रतिष्ठा एवं उपयोग करने से व्यवसाय में निरंतर लाभ होता है।

गणेष मूर्ति की प्रतिष्ठा विधि : सर्वप्रथम साधक सुबह सूर्योदय से पूर्व उठ कर शौच, स्नानादि कर के स्वच्छ लकड़ी के पट्टे पर सिंदूर से स्वस्तिक बनाए। स्वस्तिक पर दूर्वां रख कर, श्री गणेश जी की मूर्ति को रखें और अपने मस्तक पर सिंदूर का तिलक लगा कर पीला वस्त्र धारण कर के, शुद्ध मन से गणेशजी के मूर्ति के सम्मुख बैठें और गुरु का स्मरण करें।

संकल्पादि कर के गणेशजी की मूर्ति को दूध, दही, घी, शक्कर, शहद के मिश्रण से बने पंचामृत से स्नान करा कर, पुनः गंगा जल से स्नान कराएं, धूप, दीप, जला कर चंदन का लेप करें। तत्पश्चात अक्षत, दूर्वा, सुपारी, लड्डू का भोग लगाएं। भोगादि के पश्चात शुद्ध जल को एक कटोरी में ले कर पीले पुष्प, तिल, चावल, सिंदूर, पैसा, सुपारी, दूर्वा आदि जल में डाल कर, गणेश मूर्ति को स्वच्छ जल से धोकर धारण करें और निम्न मंत्र का जप करें।

मंत्र : क्क गं गणपयते नमः।

विनहर्ता गणेशजी की मूर्ति से लाभ : उपर्युक्त विधि के अनुसार श्री गणेश मूर्ति धारण करने से ग्रहों के प्रतिकूल प्रभाव नष्ट हो जाते हैं। साधक अपने मन में प्रसन्नता व शांति अनुभव करता है तथा व्यवसाय के विन नष्ट हो कर व्यावसायिक लाभ होने लगता है और निरंतर धन वृद्धि होती है।

गणेशजी की मूर्ति को यदि आप धारण नहीं करना चाहते हों तो इसे अपने पूजा स्थान पर या वाहन में रखें।

      गणेषजी की मूर्ति को लाल कपड़े में लपेट कर तिजोरी अथवा गल्ले में रखने से तथा नित्य धूप-अगरबत्ती दिखाने से श्री गणेशजी की कृपा से निरंतर लक्ष्मी की वृद्धि होती है।

      दूर्वां के साथ चांदी के आसन पर गणेश जी की मूर्ति को स्थापित कर के नित्य पूजा- उपासना करने से साधक निर्भीक होता है।

      वाहन चालक यात्रा के समय इस मूर्ति को अपने वाहन में लगाने से यात्रा सफल सुखद एवं मंगलकारी होती है।

      गणेशजी की मूर्ति धारण करके जप करने से बुद्धि का विकास होता है एवं अध्ययन में सफलता मिलती है।

            कोर्ट-कचहरी के कार्य में साथ में रख कर ले जाने से कानूनी कार्य सफल होते हैं।

 

नोट : फ्यूचर पॉइंट द्वारा दिया जाने वाला उपहार पाठक को पत्रिका के साथ बुक स्टाल से तथा पत्रिका के सदस्यों को प्रत्येक चार महीने के अंतराल पर एक साथ चारों महीनों के उपहार कोरियर द्वारा भेजे जाते हैं।

 
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