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  ग्रह स्थिति 

शेयर बाजार : तेजी मंदी
 ग्रह स्थिति दिसंबर   शेयर बाजार : तेजी मंदी दिसंबर

ग्रह स्थिति एवं व्यापार 

डॉ. जगदंबा प्रसाद गौड़

डॉ. जगदंबा प्रसाद गौड़

नवंबर मास में गोचर ग्रह परिवर्तन

इस मास ग्रहों का राशि परिवर्तन इस प्रकार होगा।

सूर्य १६ नवंबर को दोपहर ११ बजकर ११ मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। बुध १२ नवंबर को प्रातः १० बजकर ०९ मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा तथा २८ नवंबर को रात्रि १० बजकर २६ मिनट पर उसका उदय होगा। शुक्र ग्रह ०३ नवंबर को प्रातः १० बजकर ४४ मिनट पर तुला राशि में तथा २७ नवंबर को प्रातः ०८ बजकर ५८ मिनट पर वृश्चिक राशि में प्रवेश करेगा। राहु १७ नवंबर को दोपहर १४ बजे धनु राशि में तथा केतु उसी दिन अर्थात १७ नवंबर को १४ बजे मिथुन राशि में प्रवेश करेगा। नेप्च्यून ०४ नवंबर को रात्रि ११ बजकर ४३ मिनट पर मार्गी गति में आएगा। शेष ग्रह मंगल, गुरु, शनि व यूरेनस की स्थिति पूर्ववत रहेगी। 

गोचर फल विचार :

मासारंभ में 01 नवंबर को रविवार है और इस मास पांच रविवार आएंगे। यह योग अशांतिकारक और अशुभ है जो शासकों में आपसी विरोधाभास व संघर्ष को बढ़ावा देगा। वहीं इस योग के फलस्वरूप प्राकृतिक आपदाएं आएंगी जिससे जनमानस में भय उत्पन्न होगा और खड़ी फसलों को हानि पहुंचेगी। कुछ प्रांतों में राजनैतिक उथलपुथल व बदलाव की भी संभावना है। सीमाओं पर युद्ध के बादल मंडलाएंगे। ÷÷यत्र मासे रविवाराः जायन्ते पंचसततम्‌। दुर्भिक्षं छत्रभंगश्च वहिण दाहो महर्घता।''

किंतु इस मास पांच सोमवारों का आना ऊपर वर्णित फलों में कुछ न्यूनता लाएगा। शांति के प्रयासों में वृद्धि होगी। धन-धान्य में वृद्धि होगी, जिससे जनमानस में शांति का संचार होगा। ÷÷सोमस्य पंचवारा यत्र मासे भवतिहि। धन-धान्य समृद्धि स्यात सुखं भवति सदा।''

मासारंभ में ही मंगल का राहु तथा नीच राशि स्थित गुरु से समसप्तक योग में रहना विघटनकारी तथा विस्फोटक स्थितियों के उत्पन्न होने का संकेत देता है, जिससे जन-धन की हानि हो सकती है। वहीं किसी देश या प्रांत में राजनैतिक हलचल के कारण सत्ता परिवर्तन की स्थिति भी उत्पन्न हो सकती है।  ०४ नवंबर को नेप्च्यून का मार्गी गति में आना नए-नए अनुसंधानों व आविष्कारों में वृद्धि और सफलता का सूचक है। १६ नवंबर को सूर्य का तुला राशि में प्रवेश कर बुध के साथ राशि संबंध बनाना और शनि से दृष्टित होना तथा राहु व मंगल का पहले से ही समसप्तक योग में होना ये सारे योग देश के पूर्वी हिस्सो में उग्रवादी ताकतों के विघटनकारी कार्यों में वृद्धि का संकेत देते हैं। इनके फलस्वरूप जन-धन की हानि होगी। वहीं यह समय शासकों के लिए अग्नि परीक्षा का समय होगा। ये योग किसी प्रतिष्ठित व्यक्ति के लिए भी हानिकर हो सकते हैं। ये योग पूर्वोत्तर प्रदेशों में प्राकृतिक प्रकोपों का संकेत भी देते हैं।

१७ नवंबर को राहु का धनु राशि में प्रवेश तथा शनि से चतुर्दश योग में आना सीमाओं पर युद्ध के संकेत देता है। इस योग के फलस्वरूप प्राकृतिक प्रकोप आ सकते हैं जिससे जन-धन की हानि हो सकती है। दैनिक उपयोगी वस्तुएं महंगी होंगी जिससे आम जनता बगावत पर उतर सकती है। वहीं शासकों की पूर्व की छवि पर दाग लगेगा। यह योग पुराने धार्मिक व राजनैतिक मुद्दों को पुनः उछालेगा।  

सोना और चांदी  मासारंभ में ०३ नवंबर को शुक्र का तुला राशि में प्रवेश कर सूर्य व बुध के साथ राशि संबंध बनाना और मंगल से दृष्टित होना सोने व चांदी के पूर्व से चल रहे मंदे की लहर में बदलाव लाकर तेजी उत्पन्न करेगा। ०६ नवंबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना चांदी की तेजी की लहर को आगे बढ़ाएगा। इसी दिन सूर्य भी विशाखा में प्रवेश कर धनिष्ठा के साथ-साथ कृत्तिका और अनुराधा नक्षत्रों को वेधेगा। यह योग सोने की तेजी में भी वृद्धि करेगा। ०८ नवंबर को शुक्र का स्वाति नक्षत्र में प्रवेश कर शतभिषा और ज्येष्ठा नक्षत्रों को वेधना चांदी में बदलाव लाकर मंदे की लहर पैदा करेगा। ०९ नवंबर को मंगल का आश्लेषा नक्षत्र में आकर अनुराधा नक्षत्र को वेधना चांदी को मंदे के वातावरण में ही रखेगा। अनुराधा नक्षत्र को सूर्य भी वेध रहा है। इस योग के फलस्वरूप सोने के बाजार में अंतर्राष्ट्रीय राजनैतिक हस्तक्षेप से कुछ ठहराव की स्थिति पैदा हो सकती है। १२ नवंबर को बुध का वृश्चिक राशि में आकर शनि से दृष्टित होना सोने के बाजार को कुछ तेजी में ले जा सकता है। १४ नवंबर को बुध का अनुराधा नक्षत्र में आकर आश्लेषा नक्षत्र को वेधना चांदी में पूर्व से चल रहे मंदे को बनाए रखकर सोने के बाजार में भी मंदे का माहौल पैदा करेगा। १६ नवंबर को सूर्य का वृश्चिक राशि में आकर बुध से राशि संबंध बनाना व शनि की उस पर दृष्टि तथा मार्गशीर्ष मास की संक्रांति का ४५ मुहूर्ती होना ये सारे योग तेजी का संकेत देते हैं। १७ नवंबर को राहु का धनु राशि में प्रवेश और शनि से चतुर्थ होना बाजार के स्टॉकिस्टों पर राजनैतिक अंकुश लगाने के लिए कदम उठाने पर विवश करेगा, जिससे बाजार में बदलाव आ सकता है। १८ नवंबर को चंद्र दर्शन का १५ मुहूर्ती होना बाजार में मंदे की लहर को आगे बढ़ाएगा। १९ नवंबर को शुक्र का  विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा व अनुराधा नक्षत्रों को वेधना चांदी के मंदे को और आगे ले जाएगा। इसी दिन सूर्य का अनुराधा में आकर भरणी, विशाखा व आश्लेषा नक्षत्रों को वेधना सोने में भी मंदे का ही संकेत देता है। २२ नवंबर को बुध का ज्येष्ठा नक्षत्र में आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना भी बाजार में मंदे का ही सूचक है। २७ नवंबर को शुक्र भी वृश्चिक राशि में आकर सूर्य व बुध से संबंध बनाएगा जिससे चांदी के मंदे में और वृद्धि होगी। २८ नवंबर को बुध का उदय होना भी मंदे का सूचक है। २९ नवंबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में आकर भरणी नक्षत्र को वेधना चांदी में मंदे के वातावरण को बनाए रखेगा।  

गुड़ व खांड

मासारंभ में ०३ नवंबर को शुक्र का तुला राशि में प्रवेश कर सूर्य व बुध से राशि संबंध बनाना तथा मंगल की उस पर दृष्टि ये योग गुड़ व खांड के बाजार को तेजी के वातावरण में ले जाएंगे। ०६ नवंबर को बुध का विशाखा में प्रवेश कर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना खांड में तेजी का सूचक है। इसी दिन सूर्य का भी विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा के साथ-साथ कृत्तिका और अनुराधा नक्षत्रों को वेधना दोनों बाजारों में तेजी की लहर को और बढ़ाएगा। ०८ नवंबर को शुक्र का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को वेधना बाजार को मंदे के रुख में ले जाएगा। ०९ नवंबर को मंगल का आश्लेषा नक्षत्र में आकर सूर्य से वेधित होना और अनुराधा नक्षत्र को वेधना ये योग खांड की तेजी को बढ़ाएंगे। १२ नवंबर को बुध का वृश्चिक राशि में प्रवेश और शनि की उस पर दृष्टि ये योग खांड की तेजी में और वृद्धि करेंगे। १४ नवंबर को बुध का अनुराधा नक्षत्र में आकर आश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजार की पूर्व की लहर को आगे ले जएगा। १६ नवंबर को सूर्य का वृश्चिक राशि में प्रवेश कर बुध से संबंध बनाना व शनि द्वारा दृष्टित होना तथा मार्गशीर्ष  मास की संक्रांति का ४५ मुहूर्ती होना ये सारे योग बाजार में तेजी का ही संकेत देते हैं। १७ नवंबर को राहु का धनु राशि में प्रवेश बाजारों में तेजी का सूचक है। लेकिन यह योग बाजार के स्टॉकिस्टों पर राजनैतिक अंकुश लगाने के लिए कदम उठाने पर विवश करेगा। १८ नवंबर बुधवार  को चंद्र दर्शन का १५ मुहर्ती होना बाजार में मंदे का सूचक है। १९ नवंबर को शुक्र का विशाखा नक्षत्र में प्रवेश कर धनिष्ठा व अनुराधा नक्षत्रों को वेधना गुड़ व खांड में मंदे की लहर को और आगे बढ़ाएगा। इसी दिन सूर्य का अनुराधा नक्षत्र में आकर भरणी, आश्लेषा व विशाखा नक्षत्रों को वेधना बाजार में मंदे का ही संकेत देता है। २२ नवंबर को बुध का ज्येष्ठा नक्षत्र में आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना  भी बाजार के मंदे की लहर को और आगे ले जाएगा। २७ नवंबर को शुक्र का वृश्चिक राशि में प्रवेश कर सूर्य व बुध से राशि संबंध बनाना बाजार के पूर्व से चल रहे मंदे को और बढ़ाएगा। २८ नवंबर को बुध का उदय होना  मंदे को और आगे ले जाएगा। २९ नवंबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में आकर भरणी नक्षत्र को वेधना गुड़ व खांड के बाजार में मंदे के वातावरण में और वृद्धि का संकेत देता है।  

अनाज व दालवान :  

मासारंभ के पूर्व ही बुध का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा को तथा शुक्र का चित्रा में आकर पूर्वा भाद्रपद नक्षत्र को वेधना ये दोनों योग अनाज व दालवान के बाजार में मंदे के सूचक हैं। ०३ नवंबर को शुक्र का तुला राशि में प्रवेश कर सूर्य व बुध से राशि संबंध बनाना अनाजों के बाजार में कुछ तेजी ला सकता है, लेकिन दालवान को पूर्व की स्थिति में ही रखेगा। ०४ नवंबर को नेप्च्यून का मार्गी गति में आना आगे चलकर अनाजों में तेजी का ही संकेत देता है। ०६ नवंबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना मूंग, मौठ, मसूर, अरहर, उड़द इत्यादि दालों में कुछ तेजी का वातावरण बनाएगा। इसी दिन सूर्य का भी विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा, कृत्तिका और अनुराधा नक्षत्रों को वेधना गेहूं, जौ, ज्वार, बाजरा, चना इत्यादि अनाजों में भी थोड़ी तेजी का रुख पैदा करेगा। ०८ नवंबर को शुक्र का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को वेधना अनाजवान को मंदे के माहौल में ले जाएगा। ०९ नवंबर को मंगल का आश्लेषा नक्षत्र में आकर अनुराधा नक्षत्र को वेधना दोनों बाजारों में मंदे का सूचक है। १२ नवंबर को बुध का वृश्चिक राशि में आना बाजार में उतार-चढ़ाव तो लाएगा, लेकिन स्थिति पुनः पूर्ववत ही बनेगी। १४ नवंबर को बुध का अनुराधा नक्षत्र में आकर आश्लेषा नक्षत्र को वेधना गेहूं, जौ, चना इत्यादि अनाजों तथा मूंग, मौठ, मसूर इत्यादि दालवान में मंदे का ही सूचक है। १६ नवंबर को सूर्य का वृश्चिक राशि में आकर बुध के साथ राशि संबंध बनाना तथा शनि से दृष्टित होना व मार्गशीर्ष मास की संक्रांति का ४५ मुहूर्ती होना बाजारों में मंदे का ही संकेत देता है। १७ नवंबर को राहु का धनु राशि में आना बाजार में उतार-चढ़ाव की स्थिति बनाएगा। बाजार के स्टॉकिस्टों पर राजनैतिक अंकुश लगाने के लिए कदम उठाए जाएंगे। १८ नवंबर बुधवार को चंद्रदर्शन का १५ मुहूर्ती होना भी मंदे का सूचक है। १९ नवंबर को सूर्य का अनुराधा नक्षत्र में आकर भरणी, आश्लेषा व विशाखा नक्षत्रों को वेधना बाजारों में मंदा बनाए रखेगा। २२ नवंबर को बुध का ज्येष्ठा नक्षत्र में आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना बाजारों की पूर्व की लहर में और वृद्धि करेगा। २७ नवंबर को शुक्र का सूर्य के साथ वृश्चिक राशि में संबंध बनाना मूंग, मौठ, मसूर इत्यादि दालवानों के बाजार के मौजूदा रुख में बदलाव ला सकता है। २८ नवंबर को बुध का उदय होना बाजारों की पूर्व की स्थिति में वृद्धि करेगा। २९ नवंबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में प्रवेश कर भरणी नक्षत्र को वेधना अनाज व दालवान के मंदे के वातावरण में और वृद्धि का संकेत देता है।   

घी व तेलवान

मासारंभ में ०३ नवंबर को शुक्र का तुला राशि में प्रवेश कर सूर्य व बुध से राशि संबंध बनाना व मंगल से दृष्टित होना ये योग तेल, तेलवान व घी के बाजार में तेजी के सूचक हैं। ०६ नवंबर को बुध का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा नक्षत्र को वेधना घी के बाजार को मंदे में ले जाएगा। इसी दिन सूर्य का भी विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा, कृत्तिका व अनुराधा नक्षत्रों को वेधना तेलों के बाजार में तेजी लाएगा। ०८ नवंबर को शुक्र का स्वाति नक्षत्र में आकर शतभिषा नक्षत्र को वेधना घी के मंदे की लहर को और आगे ले जाएगा। ०९ नवंबर को मंगल का आश्लेषा नक्षत्र में आकर अनुराधा नक्षत्र को वेधना तेल के बाजार में भी मंदे का वातावरण उत्पन्न करेगा। १२ नवंबर को बुध का वृश्चिक राशि में प्रवेश और शनि की उस पर दृष्टि ये दोनों योग दोनों बाजारों में तेजी का संकेत देते हैं। लेकिन बुध इस समय अस्त है, जो बाजार को दो तरफा भी ले जा सकता है। व्यापारीगण बाजार की वर्तमान स्थिति को विशेष ध्यान में रखें। १४ नवंबर को बुध का अनुराधा नक्षत्र में प्रवेश कर आश्लेषा नक्षत्र को वेधना बाजार की पूर्व की स्थिति में और वृद्धि करेगा। १६ नवंबर को सूर्य का वृश्चिक राशि में आकर बुध से राशि संबंध बनाना व शनि द्वारा दृष्टित होना ये दोनों योग घी व तेलों में पुनः तेजी का संकेत देते हैं। १७ नवंबर को राहु का धनु राशि में प्रवेश घी व तेलवान में तेजी का ही सूचक है। शनि से चतुर्थ होने के कारण बाजार पर राजनैतिक अंकुश लगाने के लिए पग उठाए जाएंगे। १८ नवंबर बुधवार को चंद्र दर्शन का १५ मुहूर्ती  होना भी बाजार में बदलाव का संकेत देता है। १९ नवंबर को शुक्र का विशाखा नक्षत्र में आकर धनिष्ठा और अनुराधा नक्षत्रों को तथा सूर्य का अनुराधा नक्षत्र में आकर भरणी, आश्लेषा व विशाखा नक्षत्रों को वेधना ये योग घी व तेल के बाजार में मंदे के सूचक हैं। २२ नवंबर को बुध का ज्येष्ठा नक्षत्र में आकर पुष्य नक्षत्र को वेधना भी तेलों में मंदे का ही संकेत देता है। २७ नवंबर को शुक्र का वृश्चिक राशि में आकर सूर्य व बुध से राशि संबंध बनाना व शनि से दृष्टित होना ये योगा घी व तेल में पुनः तेजी का वातावरण उत्पन्न कर सकते हैं। २८ नवंबर को बुध का उदय होना भी तेलों में तेजी का ही संकेत देता है। किंतु २९ नवंबर को शुक्र का अनुराधा नक्षत्र में आकर भरणी नक्षत्र को वेधना घी को पुनः मंदे के रुख में ले जाएगा।  

      

नोट : उपर्युक्त फलादेश पूरी तरह ग्रह स्थिति पर आधारित है। पाठकों का बेहतर मार्गदर्शन ही इसका मुख्य उद्देश्य है। कोई निर्णय लेने से पहले निवेशक को उन अन्य संभावित कारणों पर भी ध्यान देना चाहिए, जो बाजार को प्रभावित करते हैं। कृपया याद रखें कि व्यापारी की सट्टे की प्रवृत्ति और निर्णय लेने की शक्ति में कमी तथा भाग्यहीनता के कारण होने वाले नुकसान के लिए लेखक, संपादक एवं प्रकाशक जिम्मेवार नहीं हैं।

 

   

 
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