Untitled Document


     
 
 
-
 
Untitled Document
मुख्य पृष्ठ
आपके पत्र
  संपादकीय
ज्योतिषीय समाचार
ज्योतिषीय सामग्री
सामयिक चर्चा
व्रत/पर्व
आवरण कथा
श्री हनुमान महिमा
सत्य कथा
ज्योतिष गंगा
हेल्थ कैप्सूल
    हस्तरेखा
 विचार गोष्ठी
अध्यात्म
पावन स्थल
ज्ञान सरिता
समस्या समाधान
वास्तु परामर्श
वास्तु समाधान
टोटके
राशिफल
शेयर बाजार
ग्रह स्थिति व्यापार
पुस्तक समीक्षा
पंचांग
राहुकाल
ग्रह स्पष्ट
प्रश्न जन्मपत्री
मुफ्त उपहार
क्या नास्तिक व्यक्ति को शुभ फलों की प्राप्ति का कारण उसके पूर्व जन्म के कर्मों का फल है?  
 (i)हां
 (ii) नहीं
 (iii)पता नहीं

  

 

मुहूर्त प्रश्नावली

 

मुहूर्त किसे कहते हैं?

किसी भी कार्य विशेष के लिए पंचांग शुद्धि द्वारा निश्चित की गई समयावधि को ÷मुहूर्त' कहा जाता है।

मुहूर्त निकालने के मुख्य नियम क्या हैं?

तिथि, वार, नक्षत्र, योग एवं करण इन्हीं के आधार पर शुभ समय निश्चित किया जाता है। लग्न शुद्धि के साथ-साथ इन पांचों का शुभ होना परम आवश्यक है। इन सबके आधार पर ही शुभ व शुद्ध मुहूर्त निकाला जाता है।

किन कार्यों का मुहूर्त निकालकर काम करना चाहिए व किनका नहीं?

दैनिक व नित्य कर्मों को करने के लिए कोई मुहूर्त नहीं निकाला जाता है, परंतु विशिष्ट कर्मों व कार्यों की सफलता हेतु मुहूर्त निकलवाना चाहिए ताकि शुभ घड़ियों का अधिकाधिक लाभ प्राप्त हो सके।

यदि मुहूर्त न निकल रहा हो, तो आवश्यकता में क्या करें?

यदि आवश्यकता के अनुसार मुहूर्त न निकल रहा हो, तो केवल शुभ योग देखकर और अति आवश्यकता में अभिजित मुहूर्त या गोधूलि के समय अथवा केवल लग्न शुद्धि कर कार्य कर सकते हैं।

गोधूलि व अभिजित मुहूर्त को इतनी अधिक मान्यता क्यों है?

गोधूलि व अभिजित मुहूर्त में सूर्य केंद्र में स्थित होता है, जो इन मुहूर्तों की महत्ता को बढ़ाता है।

किसी वर्ष विवाह गृहप्रवेश मुहूर्त नहीं होता - ऐसा क्यों होता है?

विवाह मुहूर्त लगभग १५ जनवरी से १५ मार्च, १५ अप्रैल से १५ जुलाई व १५ नवंबर से १५ दिसंबर के बीच ही होते हैं। इसमें भी कभी-कभी गुरु और शुक्र अस्त हो जाते हैं। गुरु लगभग ३ सप्ताह एवं शुक्र २ माह अस्त रहता है। इस प्रकार जब ये ग्रह अस्त होते हैं लगभग मुहूर्त की एक ऋतु बीत जाती है और ऐसा लगता है कि वर्ष में मुहूर्त ही नहीं है।

यदि एक मुहूर्त किसी एक कार्य के लिए शुद्ध हो, तो क्या अन्य कार्यों के लिए शुद्ध नहीं हो सकता?

मुहूर्त शास्त्र के अनुसार प्रत्येक घड़ी का अपना महत्व होता है। फिर कार्य  के अनुरूप ही नक्षत्र, तिथि, और वार का चयन कर मुहूर्त बताया जाता है। इसलिए यह आवश्यक नहीं है कि एक मुहूर्त किसी एक कार्य के लिए शुद्ध हो, तो वह अन्य कार्यों के लिए भी शुद्ध होगा।

राहुकाल, चौघड़िया, होरा एवं लग्न शुद्धि - समय शुद्धि की इन चार पद्धतियों में से कौन सी कब अपनानी चाहिए?

प्रतिदिन लगभग 1 घंटा ३० मिनट की अवधि राहुकाल की अवधि मानी गई है। राहु काल में कोई भी शुभ कार्य प्रारंभ करना या उसके लिए बाहर निकलना मना किया गया है। राहुकाल में प्रारंभ किए गए शुभ कार्य को ग्रहण लग जाता है। यदि अकस्मात यात्रा करने का मौका आ पड़े, तो उस अवसर के लिए विशेष रूप से चौघड़िया मुहूर्त का उपयोग होता है। इसी प्रकार होरा मुहूर्त कार्य सिद्धि के लिए पूर्ण फलदायक व अचूक माने जाते हैं, जो दिन रात के २४ घंटों में घूमकर मनुष्य को कार्य सिद्धि के लिए अशुभ समय में भी सुसमय, सुअवसर प्रदान करते हैं। सूर्य का होरा राज सेवा के लिए, चंद्रमा का होरा सभी कार्यों के लिए, वाद मुकदमे  के लिए मंगल का होरा, ज्ञानार्जन के लिए बुध का होरा, प्रवास के लिए शुक्र, विवाह के लिए गुरु व द्रव्य संग्रह के लिए शनि का होरा उत्तम होता है। प्रत्येक कार्य के लिए लग्न शुद्धि शुभ भविष्य को दर्शाती है।

तीन ज्येष्ठ हों, तो क्या विवाह करना अशुभ है?

परंपरा के अनुसार तीन ज्येष्ठ होने पर विवाह करना शुभ फलदायी नहीं माना जाता। इस योग में विवाह होने पर वर पक्ष अथवा वधू पक्ष में हानि होने की संभावना मानी जाती है। लेकिन मुहूर्त शास्त्र में उल्लेख नहीं हैं।

किसी कार्य को करने की शुभ तारीख ज्ञात करने के लिए शुभ योग की गणना करें या पंचांग शुद्धि से देखें?

पंचांग शुद्धि के द्वारा दिन निर्धारण करना मुहूर्त शास्त्र के अनुसार श्रेयस्कर माना गया है। यदि समयावधि के अनुसार शुभ तारीख न बनती हो तो शुभ योगों की गणना कर कार्य करना उचित माना जाता है।

विवाह काल में यदि सूतक पड़े, तो क्या विवाह करना उचित होगा?

विवाह काल में यदि सूतक पड़ जाए, तो विवाह करना उचित नहीं माना जाता। ऐसी स्थिति में सूतक शुद्धि कर लेनी चाहिए। सूतक काल में शास्त्रों के अनुसार पूजा-पाठ व वैदिक अनुष्ठान वर्जित हैं।

अबूझ मुहूर्त में विवाह करना उचित है या केवल मुहूर्त की तारीख में ?

अबूझ मुहूर्त में विवाह करना उचित है, परंतु मुहूर्त की तारीखें विवाह के लिए उपयुक्त हों, तो उनमें विवाह करना श्रेयस्कर होता है , क्योंकि ये मुहूर्त पंचांग द्वारा शुद्धीकरण कर निकाले जाते हैं। अबूझ मुहूर्त को केवल शुभ तारीखें न मिलने पर अपनाना चाहिए।

अबूझ मुहूर्त में तारा आदि डूबे हों या अन्य कोई कारण हो, तो भी क्या इनमें विवाह करना शुभ होगा?

अबूझ मुहूर्त के समय तारा डूबा हो अथवा अन्य कोई कारण हो, तो इसमें विवाह करना ठीक नहीं है, क्योंकि अबूझ मुहूर्त शुभ मुहूर्त से कम फलदायी माना गया है।

यदि वर व कन्या का मिलान शुभ न हो, तो क्या शुभ मुहूर्त में विवाह कर दोष दूर किया जा सकता है?

शुभ मुहूर्त में विवाह कर व दोष संबंधी दान-पूजा करवाकर मिलान दोष दूर तो नहीं, परंतु कम अवश्य किया जा सकता है। शुभ मुहूर्त में विवाह करवाने से दोष कुछ अवधि के लिए टल जाता है।

यदि वास्तु दोष हो, तो क्या शुभ मुहूर्त में प्रवेश कर वास्तु दोष से मुक्ति पाई जा सकती है?

शुभ मुहूर्त में प्रवेश कर वास्तु दोष से मुक्ति तो नहीं पाई जा सकती, परंतु वास्तु दोष कम अवश्य किया जा सकता है। पूर्ण रूप से वास्तु दोष को तभी दूर किया जा सकता है, जब घर वास्तु आधारित नियमों के अनुसार बनाया गया हो।

क्या मुहूर्त के द्वारा भविष्य को बदला जा सकता है?

जिस प्रकार किसी बालक के जन्म समय के ग्रह उसके भविष्य को बताते हैं, उसी प्रकार मुहूर्त आने वाले समय में जो कार्य होना है, उसका भविष्य बताता है। शुभ मुहूर्त में कार्य कर भविष्य तो नहीं बदला जा सकता, परंतु कुछ दोष अवश्य कम किए जा सकते हैं। शुभ मुहूर्त में कार्य तभी सफल होता है जबकि आपके पूर्व जन्म के कर्म व भाग्य अनुकूल हों।  

 
 
Untitled Document
-
फ्यूचर पॉइंट द्वारा सर्वाधिकार सुरक्षित।