घर के पूजा गृह में दीपावली के दिन \'श्री यंत्र\' की स्थापना करें। महालक्ष्मी कमलगट्टे की असली माला पहनायें। दीपावली के दिन शास्त्रोक्त विधि से मां लक्ष्मी की पूजा करें। श्री सूक्त का यथेष्ट पाठ, धन प्राप्ति के लिए अचूक उपाय माना जाता है। लक्ष्मी गायत्री मंत्र का जप करे।
विस्तृत विवरणग्रहों की प्रतिकूल स्थिति जीवन पर नकारात्मक प्रभाव डालती है। यंत्र धारण अथवा यंत्र स्थापना द्वारा ग्रह दोष निवारण संभव है।
विस्तृत विवरणएक समारात्मक ऊर्जा से भरपूर वातावरण व्यक्ति को अधिक सफलता प्रदान करता है। धर, व्यवसाय, कार्यालय एवं गाड़ी आदि में इस यंत्र की स्थापना से लाभ पाया जा सकता है।
विस्तृत विवरणश्री यंत्र को लक्ष्मी प्राप्ति यंत्र कहा जाता है। जन्म कुंडली में सूर्य ग्रह पीड़ित होने पर श्रीयंत्र की पूजा का विधान शास्त्रों में वर्णित है। इसे यंत्रराज की संज्ञा भी दी गई है।
विस्तृत विवरणकालसर्प योग के समस्त उपायों में नाग-नागिन को ही श्रेष्ट मान कर पूजा की जाती है. इसकी शान्ति चाहे जब की जाए, परन्तु शान्ति करने के समय कालसर्प यंत्र को ही आधार मन कर नागों की पूजा करना श्रेष्ठ होता है.
विस्तृत विवरणश्रीयंत्र नाम से ही स्पष्ट है की यह श्री अर्थात लक्ष्मी जी का यंत्र है। इस यंत्र में लक्ष्मी का साक्षात वास माना गया है। लक्ष्मी जी स्वयं कहती है की श्रीयंत्र तो मेरा आधार है, इसमें मेरी आत्मा वास करती है। श्रीयंत्र सभी यंत्रों में श्रेष्ठ माना गया है, इसलिए इसे यंत्रराज भी कहते है।
विस्तृत विवरणलक्ष्मी जी की कृपा पाने के लिए आप भी निम्न प्रयोग करके देखें। दीपावली की महानिशा में अथवा रोहिणी नक्षत्र में चंद्र की होरा में निम्न यंत्र शुद्ध चांदी पर उभरे हुए अक्षरों में सुंदरता से बनवा लें। फिर लक्ष्मी जी के बीज मंत्र से विनियोग, न्यास, ध्यान आदि स्वयं कर लें।
विस्तृत विवरणश्री यंत्र शिव व् शिवा का विग्रह यंत्र है। विद्या व धन की प्राप्ति के लिए श्री यंत्र की साधना की जाती है। श्री यंत्र ताम्र पत्र पर सपाट व् रजत स्वर्ण आदि पर कूर्माकार या सुमेरु पर्वत के सामान ऊपर से उठे हुए आकार का मिलता है।
विस्तृत विवरणसभी शंकरपीठों में भगवती त्रिपुरसुंदरी की उपासना श्रीयंत्र में की जाती है। जिसे श्री चक्र भी कहा जाता है। यह श्रीयंत्र अथवा श्रीचक्र भगवान शिव और माँ शिवा दोनों का शरीर है। श्रीयंत्र की उत्पति स्वयं में अनेकानेक रहस्यों को समेटे हुए है। एक बार जब भगवान ने सभी मंत्रों।
विस्तृत विवरणश्रीयंत्र का उल्लेख तंत्रराज, ललिता सहस्त्रनाम, कामकलाविलास, त्रिपुरोपनिषद आदि विभिन्न प्राचीन भारतीय ग्रंथों में मिलता है। महापुराणों में श्री यंत्र को देवी महालक्ष्मी का प्रतीक कहा गया है। इन्हीं पुराणों में वर्णित महालक्ष्मी स्वयं कहती है।
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