प्राचीन भारतीय धार्मिक साहित्य, अभिलेखों व् नविन एवं अर्वाचीन बंगला साहित्य में मान के इस स्थल की भूरी -भूरी प्रशंसा की गयी हैं. तंत्र -चूड़ामणि में जिन ५२ शक्तिपीठों का वर्णन किया गया हैं. उनमें कालिका देवी का क्रम ५२ वां हैं. ऐसे बंगाल में प्रचलित ५१ शक्तिपीठों में बीसवें क्रम में कालीघाट
विस्तृत विवरणदेवी-देवताओं को जब स्वरचित सृष्टि की मर्यादा की रक्षार्थ युगों-युगों में अपनी अलौकिक योगमाया का आश्रय लेकर पुरुष या स्त्रीरूप में पैदा होना पड़ता है. जब पुरुष वेश में अवतार लेते है, तब जगत उनकी ब्रह्मा, विष्णु, महेश आदि
विस्तृत विवरणशक्तिपीठों में आदि शक्ति मां शारदा का मंदिर आलौकिक ऊर्जा का केंद्र है। मां शारदा देवी मंदिर में मनौती पूरी होने का रहस्य पिरामिड एवं यंत्र है। मां शारदा की प्रतिमा के ठीक नीचे स्थित शिलालेख अपने अंदर मां का हिमा तथा इतिहास की अनेक पहेलियों का रहस्य समेटे हुए हैं।
विस्तृत विवरणआद्याशक्ति की उपासना ग्रहों के अनिष्ट परिणामों से रक्षा कर सकती है। सभी लोगों विशेषकर ज्योतिष फलादेश देने वालों को तो शक्ति उपासना बहुत शक्ति प्रदान करती है। महाकाली, महासरस्वती, महालक्ष्मी, नवदुर्गा, दशविद्या, गायत्री अनेक रूपों में की जाती है।
विस्तृत विवरणदुर्गा सप्तशती का पाठ दो प्रकार से होता है- एक साधारण व दूसरा सम्पुट। सप्तशती में कुल सात सौ मंत्र है। इस आलेख में प्रस्तुत है सप्तशती के सिद्ध सम्पुट मंत्रों का विवरण। इन मंत्रों का नवरात्र में जप करने से शीघ्र फल की प्राप्ति होती है।
विस्तृत विवरणभगवती मां दुर्गा की प्रसन्नता के लिए जो अनुष्ठान किए जाते हैं उनमें दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान विशेष कल्याणकारी माना गया है। इस अनुष्ठान को ही शक्ति साधना भी कहा गया है। श्री दुर्गा सप्तशती का अनुष्ठान कैसे करें आइए जानें इस लेख द्वारा।
विस्तृत विवरणभवनेश्वरी संहिता में कहा गया है जिस प्रकार से वेद अनादि है उसी प्रकार सप्तशती भी अनादि है। ऊँ ऐं हृीं क्लीं मंत्र तीनों महाशक्तियों के स्वरूप है। दुर्गा सप्तशती के 7०० श्लोक 7०० प्रयोगों के समान है। जिनको सिद्ध कर मनोवांछित फल की प्राप्ति संभव है। आइए जानें दुर्गा सप्तशती को सिद्ध कैसे करें
विस्तृत विवरणआद्याशक्ति की उपासना ग्रहों के अनिष्ट परिणामों से रक्षा कर सकती है। सभी लोगों विशेषकर ज्योतिष फलादेश देने वालों को तो शक्ति उपासना बहुत शक्ति प्रदान करती है। महाकाली, महासरस्वती, महालक्ष्मी, नवदुर्गा, दशविद्या, गायत्री अनेक रूपों में की जाती है।
विस्तृत विवरणजगतजननी, शक्ति स्वरूपा मां दुर्गा की उपासना एक ऐसा मार्ग है जिस पर चलकर मनुष्य सभी सुखों का उपभोग व अपने कर्तव्य का पालन करके मोक्ष प्राप्त करता है। प्रस्तुत है उनकी पूजा अर्चना के हेतु कुछ सरल सूत्र
विस्तृत विवरणनवरात्रों में मां भगवती की अनुकंपा, आशीर्वाद प्राप्त करने के लिए, उनकी आराधना एवं जागृत करने के लिए कुछ तरीके।
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