द्वादश भावस्थ ग्रह जिन वस्तुओं से सम्बंध रखता है. उन वस्तुओं का व्यय होता है. इसी प्रकार द्वादश भाव का स्वामी जिस भाव में हों, मनुष्य को उस भाव से अर्थात उस भाव सम्बन्धी वस्तुओं से पृथक कर देता है....
विस्तृत विवरणअगर किसी व्यक्ति की जन्म कुंडली में दशम भाव में सूर्य के साथ मंगल हो और मंगल अस्त न हो तो सोने पर सुहागा. सूर्य के साथ चन्द्रमा हो और चन्द्रमा अस्त हो तो मानसिक रोग अवश्य होता है. साथ-साथ अस्वाभाविक चिन्ताधारा और नेता होते हुए भी जनता के सामने जातक....
विस्तृत विवरणसप्तम भाव जीवन साथी का भाव है. सप्तम भाव से वैवाहिक जीवन की स्थिति, जीवन साथी का आचार-विचार, जीवन साथी का स्वभाव, व्यापार, साझेदारी व्यापार का विश्लेषण किया जा सकता है. अगर किसी जातक की कुंडली के सप्तम भाव में अग्नि तत्व राशि और उसमें सूर्य स्थित हो तो व्यक्ति का जीवन साथी स्वाभिमानी होता है....
विस्तृत विवरणनौ ग्रहों में से सूर्य को राजा का स्थान प्राप्त हैं. जब व्यक्ति की कुंडली में सूर्य पंचम भाव, अग्नि तत्व राशि स्थित हों तो इस प्रकार बनने वाला ज्योतिषीय योग व्यक्ति के जीवन की घटनाओं को किस प्रकार प्रभावित करना हैं. इस योग से प्राप्त होने वाले फलों का विश्लेषण इस आलेख में किया गया है.
विस्तृत विवरणवैदिक ज्योतिष शास्त्रों में सूर्य पिता, आत्मा, अनुशासन का कारक ग्रह कहा गया है. किसी व्यक्ति की कुंडली में जब सूर्य मेष, सिंह और धनु राशि में हों और सूर्य की स्थिति लग्न से चतुर्थ भाव में हो तो व्यक्ति को प्राप्त होने वाले फल कुछ इस प्रकार के होते है.
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