यदि हमारे पूर्वजों में किसी प्रकार के अशुभ कार्य किये हों एवं अनैतिक रूप से धन एकत्रित किया होता है, तो उसके दुष्परिणाम आने वाली पीढ़ियों को भुगतने पड़ते है। क्योंकि आगे आने आली पीढ़ियों के भी कुछ ऐसे अशुभ कर्म होते है की वे उन्हीं पूर्वजों के यहाँ पैदा होते है।
विस्तृत विवरणशास्त्रों में अनेक लोकों का वर्णन मिलाता है, जैसे – ब्रह्मालोक, सूर्यलोक, चंद्रलोक, पितृलोक, मृत्युलोक, पाताललोक आदि। सूर्यलोक और चंद्रलोक के बीच स्वर्गलोक की स्थिति है और चंद्रलोक से नीचे पितृलोक है। बहुत से विद्वान चंद्रलोक को ही पितृ लोक मानते है
विस्तृत विवरणपितृ दोष निवारण का अनुकूल समय पितृ पक्ष : पितृ (पितर) पूजा भारतीय संस्कृति का मूलाधार है. “श्रद्धय यात क्रियते तत श्राद्धम” पितरों को प्रसन्न करने के लिए श्रद्धा द्वारा हविष्ययुक्त (पिंड) प्रदान करना ही श्राद्ध कहलाता है. श्राद करने से पितर संतुष्ट होते हैं,
विस्तृत विवरणइस वर्तमान सदी में देश के सामजिक माहौल में बहुत तेजी से बदलाव आया है। पहले वृद्धों की सेवा को पुन्य का कार्य समाजः जाता था, किंतु आज वृद्धों के प्रति पारंपरिक आदर का बहाव लुप्त होता जा रहा है। संवेदनहीनता इस हद तक बढ़ गई है की लोग अपने
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