मनुष्य के जीवन की दिशा ओर दशा निर्धारण में हाथों की तरह ही पैरों की भूमिका भी अहम होती है. उसके व्यक्तित्व का विकास हाथों की रेखाओं पर निर्भर करता है. कमोवेश उसी तरह पैरों पर भी निर्भर करता है. पैरों का आकार....
विस्तृत विवरणविद्धान व्यक्ति कों शुभ मुहूर्त के मध्याहन में शरीर के लक्षणों कों देखकर उनका फल कथन करना चाहिए. पहले जातक की आयु देखकर ही लक्षण देखना चाहिए. क्योकि कम आयु के जातक के सभी लक्षण सही एवं स्पष्ट परिलक्षित नहीं होते है.....
विस्तृत विवरणजिस स्त्री की पलकें छोटी और घनी होती है. वह भाग्याशाली होती है. वह अपने भाग्य से जीवन का हर सुख प्राप्त करती है. उसका विवाह धनी व्यक्ति से होता है. भौहें कमानीदार हों और सिर के बाल काले और बिना मुड़े नीचे की ओर जाएं तो स्त्री सब के लिए शुभ होती है...
विस्तृत विवरणसुंदर श्वेत आँखों वाला व्यक्ति शांतिप्रिय, कोमल ह्रदय लोकप्रिय, विचारवान, न्यायप्रिय, प्रतिभाशाली दयालु, धार्मिक और चतुर होता है। छोटी आँखों वाले लोग अशिक्षित, अविवेकी, दिखावा पसंद और स्वार्थी होते है। जिस व्यक्ति की एक आंख छोटी हो और ।
विस्तृत विवरणशंख के समान गर्दन वाला व्यक्ति राजा होता है। भैंस के समान मोटी गर्दन वाला व्यक्ति बलवान होता है। बैल के समान गर्दन वाला व्यक्ति अल्पायु होता है। लंबी गर्दन वाला व्यक्ति भोगी होता है। टेढ़ी गर्दन वाला व्यक्ति चुगलखोर होता है।
विस्तृत विवरणग्रहों की दो श्रेणियाँ है। एक श्रेणी में वे ग्रह है, जो मस्तिष्क को निरंतर उर्जावान रखते है। सूर्य, चंद्र गुरु, शुक्र और राहू इसी श्रेणी के ग्रह है, जो मस्तिष्क की उर्वरता को बढाते है, इसके विपरीत मंगल ,बुध, शनि और केतु हमेशा यथास्थिति ।
विस्तृत विवरणकहा जाता है, की पूर्व काल में शंकर जी के आशीर्वाद से उनके ज्येष्ठ पुत्र स्वामी कार्तिकेय ने, जनमानस की भलाई के लिए, हस्त रेखा, शास्त्र की रचना की। जब यह शास्त्र पूरा होने को आया, तो गणेश जी ने, आवेश में आकर प्रतिलिपियों को शंकर जी को वापस कर दिया और शंकर ।
विस्तृत विवरणमहिष आकृति वाले लोग कुछ घमंडी होते है। उनके लग्न में मंगल या शनि हो सकता है। अथवा दोनों का संबंध भी हो सकता है। क्रोध की अवस्था में वे कभी–कभी आक्रमण भी करते है। ऐसे लोग प्राय: सैनिक सिपाही होते है। किन्तु वे ।
विस्तृत विवरणहमारे प्राचीनकाल के ग्रंथों में स्वप्न विज्ञान को काफी महत्त्व दिया गया है। स्वप्न परमात्मा के पूर्व संकेत होते है। स्वप्न का प्रभाव निश्चित रूप से हर मनुष्य पर पडता है। यदि कोई अच्छा सा स्वप्न दिखाई दे तो हम खुश होते है। किंतु बुरा दिखाई दे तो घबरा कर तुरंत
विस्तृत विवरणप्राचीन काल में स्वर विज्ञान से भी फल कथन किया जाता था। इसका आधार स्वास –प्रश्वास (स्वर) को बनाया जाता है। स्वर तीन प्रकार के होते है। दायां स्वर: मेरुदंड के दायें भाग से नासिका के दायें छिद्र में आई हुई प्राण वायु का नाम दायां स्वर है।
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