सतयुग के प्रारम्भ काल से ही लें तो महर्षि वाल्मीकि का उदाहरण सामने आता है, वे तो उनके उल्टे शब्द ‘ मरा” को ही जपते – जपते ब्रह्मामय हो गए। १५वीं – १६ वीं सदी में तुलसीदास ने “रामचरित मानस” लिखा। उसका हर शब्द मंत्र है। यदि।
विस्तृत विवरणभगवान राम की कुंडली में मंगल के सप्तम भाव में उच्चस्थ होने के कारण उनका विवाह माता सीता जैसी दिव्य कन्या से हुआ। कुंडली में मंगल स्थित राशि मकर का स्वामी शनि भी उच्चस्थ है। तथा शनि स्थित राशि का स्वामी शुक्र।
विस्तृत विवरणऊँ श्री राम – जिनमें योगोजन रमण करते है। रामचन्द्र – चंद्र के समान आनन्दमय एवं मनोहर राम | रामभद्र – कल्याणमय राम | शाश्वत – सनातन भगवान | राजीवलोचन – कमल के समान नेत्रों वाले | श्रीमान राजेन्द्र – श्री संपन्न राजाओं के भी राजा ( चक्द्रवती सम्राट ) |
विस्तृत विवरणपौराणिक तथ्यों के अनुसार भारतीय इतिहास का आंकलन सही नहीं है। यदि रामजन्म इसी २८वें महायुग में हुआ होता तो आज से लगभग ८ लाख ७० हजार वर्ष पूर्व का समय निकलता। किन्तु उनका जन्म तो २४वें महायुग में हुआ था।
विस्तृत विवरणज्योतिष विज्ञान की गणना के अनुसार, यदि सूर्य मेष राशि का और चंद्र पुनर्वसु नक्षत्र का हो, तो उस दिन नवमी तिथि का होना असंभव है। ऐसे में तुलसी दास जी का यह दोहा तथ्यपूर्ण है।
विस्तृत विवरणश्रीराम के जन्म की काल गणना के लिए यह समझना तो आवश्यक है की ब्रह्माजी की आयु कितनी है। ? मानव के ३६० दिनों का एक साल होता है और यह एक साल देवताओं का एक दिव्य दिन होता है। ऐसे ३६० दिव्य दिनों का एक वर्ष होता है।
विस्तृत विवरणअसंख्य उज्जवल किरणों से सुशोभित पुंज तथा ऊर्जा के भण्डार सूर्य देव हमारे सनातन और प्रत्यक्ष देवता है। मार्कण्डेय पुराण के अनुसार सूर्य ब्रह्म स्वरूप है। यह चराचर जगत की आत्मा है, अंधकार और अज्ञान का नाश करने वाले है।
विस्तृत विवरणराम नाम मणि दीप घर, जीह देहरी दुआर | तुलसी भीतर बाहरहु जो चाहसि उजियार | “राम’ शब्द महामंत्र है। यह केवल दशरथ नंदन कौशल्या तनय का ही नाम नहीं हैं। यह तो समस्त ब्रहमांड के नियंता, सब देवों के देव आदि शक्ति एवं सृष्टिकर्ता का नाम है जो संत कवि तुलसीदास जी द्वारा रचित रामचरितमानस के अनुसार।
विस्तृत विवरणहिंदू धर्म में एक ही आदर्श एवं मर्यादा पुरुष है- पुरुषोतम श्री राम। श्री राम का जन्म रामनवमी के दिन पुनर्वसु नक्षत्र में अभिजीत मुहूर्त में अयोध्या में हुआ। उस समय अधिकांश ग्रह उच्च या स्वराशि में स्थित थे। श्री राम की जीवन लीला का चित्रण हमारे ग्रंथ
विस्तृत विवरणमहालक्ष्मी का ही दूसरा नाम पदमावती है। वैष्णव संप्रदाय में श्री सूक्त और लक्ष्मी सूक्त अत्यंत प्रसिद्द सूक्त है। इनमें श्री विष्णु पत्नी लक्ष्मी के विविध रूपों का रहस्यपूर्ण वर्णन है। पदमावती के अनेक नामों का उल्लेख लक्ष्मी सहस्त्रनाम में है जो भगवती पदमावती
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