शिक्षा में रूकावटे दूर करने के लिए क्रिस्टल से बने कछुए का उपयोग प्रमुख होता है इस कछुए को सामने रखकर पढ़ना चाहिए. इससे बुद्धि तीव्र व् मन की एकाग्रता होती हैं. पढाई की टेबल उतर-पूर्व दिशा में रखें. सभी विध्न -बाधाएं दूर हो जायेंगी.
विस्तृत विवरणगत महीने अनेकों पाठकों ने सम्मोहन की उपयोगिता के बारे में काफी जानकारी मनागी हैं. आशा है, इस अंक में दी गई जानकारी आपके लिए उपयोगी रहेगी. हम सभी के मन में प्रकृति द्वारा दी गई एक अनूठी शक्ति निहितहै जिसका प्रयोग हम अपने
विस्तृत विवरणलाल-किताब का यह एक अनोखा सूत्र है.इसके उपयोग से व्यक्ति विशेष की विशेषताओं के बारे में सरलता से जान सकते हैं. ग्रह अकेले या इकठ्ठे हो कर जो हाल इंसान की दिमागी हालत का कर सकते हैं. वैसी ही हालत भाग्य की वह कुंडली में करेंगे
विस्तृत विवरणगठिया या आमवात रोग जोड़ों के दर्द से सम्बंधित है जो वर्तमान में युवाओं को भी अपने घेरे में ले रहा है और युवावस्था में ही लोगों को होने लगा है. इस रोग से पीड़ित लोगों को दैनिक कामकाज में भी बहुत तकलीफ का सामना करना पड़ता हैं.
विस्तृत विवरणस्वस्थ व्यक्ति को छ; से आठ घंटे सोना जरुरी हैं. इससे कम या ज्यादा कोई सोता है तो वह किसी बीमारी का लक्षण है व् ऐसे व्यक्ति अवसाद, नशे और निराशा जैसे मनोविकारों से घिरे होते हैं. अवसाद से घिरे लोगों को नींद ज्यादा अनियमित देखी गयी हैं.
विस्तृत विवरणआयुर्वेद और अन्य चिकित्सा प्रणालियों का मानना है की कब्ज आँतों में बसने वाला वह शैतान है जो अनेक प्रकार के रोगों को जन्म देता हैं और कब्ज के रहते किसी भी रोग का उपचार सुनिश्चित नहीं हो सकता. कब्ज निम्न आंत्र संस्थान से संबंधित रोग है जो वृहद् अंत की निष्क्रियता, कम
विस्तृत विवरणआधुनिक युग में मधुमेह का प्रभाव सभी उम्र के लोगों पर देखा जा सकता है. यह वह मीठा जहर है जो यकृत और क्लोम ग्रंथि में गड़बड़ी के कारण होता है. क्लोम ग्रंथि अमाशय के नीचे बीच में आड़ी पड़ी होती है.
विस्तृत विवरणकिसी भी जातक का स्वास्थ्य ठीक रहेगा या नहीं, यह मुख्यत: षष्ठ भाव एवं लग्न भाव में स्थित हैं, यह भी महत्वपूर्ण है. इसका विवेचन आगे किया गया है. जातक के विभिन्न समय में विभिन्न रोग उत्पन्न हो
विस्तृत विवरणअश्वगंधा तथा बहेड़े के चूर्ण को गुड़ में मिलाकर गोलियां बनायें। प्रातः सायं दो-दो गोली गरम पानी के साथ खाने से हृदय-शूल नहीं होता।
विस्तृत विवरणहृदय द्वारा रक्त फेफड़ों तक भेजा जाता है जहां रक्त में आक्सीजन घुल जाती है और रक्त में विद्यमान अनुपयोगी वायु के अंश फेफड़ों में आकर श्वांस द्वारा शरीर से बाहर निकल जाते हैं।
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