व्रतों के प्रभाव से कायिक, वाचिक, मानसिक और संसर्गजनित, पाप, उपपाप और महापापादि भी दूर हो जाते है. व्रतों के प्रभाव से मनुष्यों की आत्मा शुद्ध होती है. संकल्प शक्ति में वृद्धि होती हिया, बुद्धि, विचार, चतुराई या ज्ञान तंतुओं का समग्र विकास होता है
विस्तृत विवरणयह व्रत आश्विन माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को किया जाता है। व्रती प्रात:काल नित्य कर्मों, स्नानादि से निवृत होकर भगवान विष्णु का भक्ति भाव से पूजन आदि करके भोग लगाते है। फिर यथासंभव ब्रह्माण को भोजन करा कर दान एवं
विस्तृत विवरणश्रीगणेश संकटों से उबारने वाले देवता है और संकष्टी चतुर्थी व्रत की महिमा सर्वविधित है। जब कोई भारी कष्ट में हो, संकटों और मुसीबतों से घिरा हों, या किसी अहित की आशंका हो, तो संकष्टी चतुर्थी का व्रत करने से अतिशय लाभ होता है। कहा जाता है की यह व्रत करके
विस्तृत विवरणकहा जाता है की इसी एकादशी का व्रत करके श्रीराम समुद्र पर सेतु निर्माण करा पाने में सक्षम हुए थे और इसी के प्रभाव से उन्होंने रावण पर विजय प्राप्त की थी। यह व्रत फालगुन मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी को रखा जाता है
विस्तृत विवरणकामदा एकादशी व्रत पुरुषोतम मास (अधिकमास या मलमास) में करने का विधान है। इसे पदमिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। एक समय धर्मावतार धर्मराज युधिष्ठर ने भगवान श्रीकृष्ण को सानंद सिंहासनरुढ देखकर उनके चरणों में नतमस्तक हो पूछा – हे देवकीनंदन
विस्तृत विवरणकमला एकादशी व्रत पुरुषोतम मास (अधिक मास या मल मास) में करने का विधान है। एक समय सत्यवती पांडुनंदन धर्मराज युद्धिष्ठिर ने गोपिका बल्लभ, चितचोर, जगत नियंता भगवान श्री कृष्ण से सादर पूछा – भगवन, मैं पुरुषोतम मास की
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