दीपावली की रात यानि कालरात्रि, महानिशा, महाकृष्णा, दिव्यरजनी, तंत्र-मंत्र साधना के लिये ये रात अति उतम रात है। शास्त्रों में तो दिवाली का संपूर्ण दिन ही विभिन्न साधना व् उपासना के लिये उपयुक्त माना गया है। इस दिन की जाने वाली पूजा से सुख, धन, सौभाग्य, सिद्धि व् आरोग्य मिलता है।
विस्तृत विवरणदिवाली को पौराणिक ग्रंथों में कालरात्रि का नाम दिया गया है जो की अशुभ रात्रि का प्रतीक है जिससे यह प्रश्न उठता है की जो रात्रि अशुभ हैं उसमें लक्ष्मी पूजन का विधान क्यों हैं? इस प्रश्न का समाधान \'तांत्रिक रहस्य\' में दिया गया है। \'शक्ति संगम\' तंत्र के काली खंड में अनेक विशिष्ट रात्रियों का उल्लेख है
विस्तृत विवरणहमारे धार्मिक ग्रंथों में दीपदान की अत्यंत महिमा बताई गई है\' दीपदान\' एक ऐसा दान है जिसके करने से मनुष्य को इस लोक में अत्यंत तेजोमय शरीर की प्राप्ति होती है तथा मृत्यु के बाद सूर्य लोक की प्राप्ति होती है। कार्तिक मास में पूरे मास एवं विशेषकर दीपावली पर धन त्रयोदशी से लेकर यम द्वितीया तक दीपदान करना पूर्णतया फलदायक होता है।
विस्तृत विवरणलक्ष्मी, ऐश्वर्य भोग-विलास, सुख-समृद्धि, आरोग्य, आयुष्य आदि के लिए प्रत्येक व्यक्ति अपने-आने बुद्धि-विवेक से कोई न कोई कर्म अवश्य करता रहता है। यदि अपेक्षित परिणामों से आप संतुष्ट नहीं हुए हों तो इस दीपावली में संयम और आस्था से यह उपाय भी करके देखें।
विस्तृत विवरणपाश्चात्य विद्वानों का कथन है की जिन देशों में एवं जातियों में जितने अधिक उत्सव मनायें जाते हैं,वे देश तथा जातियां उतने ही समृद्ध एवं उन्नत समझे जाते है। इस कथन की कसौटी पर यदि भारत को देखा ज़ाए तो विदित होगा। विश्व में भारत एक सर्वाधिक जीवन्त राष्ट्र हैं।
विस्तृत विवरणसामान्य रूप से जितनी भी तांत्रिक क्रियायें और अनुष्ठान किए जाते है, उन्हें किसी विशेष दिन, तिथि तथा योग नक्षत्रों को आधार मानकर किया जाता है। हमारे यहाँ जितने भी त्यौहार या पर्व मनाए जाते है, वे सब प्रकार से सिद्ध योग, नक्षत्रों को मानकर ही निर्धारित किए गए है।
विस्तृत विवरणलाल-किताब के अनुसार जब ग्रह किसी खाना में अकेला बैठा हो व् किसी और ग्रह से दृष्ट भी न हो तो वह शुभ प्रभाव वाला होगा। प्रत्येक ग्रह के शुभाशुभ प्रभाव जानने के लिए निम्न तालिकाओं का प्रयोग करें। अ) कौन- सा ग्रह केवल अकेला ही बैठा हो तो कौन क्या प्रभाव करेगा।
विस्तृत विवरणशिशु रूप में जब मानव गर्भावस्था में होता है, तब नाभि ही एकमात्र वह मार्ग होता है, जिसके माध्यम से वह अपनी सभी महत्वपूर्ण क्रियाओं, जैसे सांस लेना, पोषक तत्वों को ग्रहण करना तथा व्यर्थ और हानिकारक पदार्थों का निष्कासन करता हहै। जन्मोपरांत शिशु के गर्भ से बाहर आते ही सबसे पहला कार्य
विस्तृत विवरणमेष एवं वृश्चिक राशि वालों को जिनकी राशि का स्वामी मंगल है। मां भगवती भुवनेश्वरी देवी की आराधना पूजा करना सुख व् फलदायक है। दीपावली पर गुलाब एवं कनेर के पुष्पों को तथा बेसन एवं गुड से निर्मित मिष्ठान से लक्ष्मी पूजन संपन्न करें एवं स्थान-सिद्धि यंत्र स्थापित करें।
विस्तृत विवरणमनुष्य के जीवन में धन एक बहुत बड़ी आवश्यकता है। धन के बिना कोई भी पारिवारिक, सामाजिक अथवा आध्यात्मिक कार्य करना संभव नहीं है। धन का आगमन होता है कठोर परिश्रम, लगन एवं भाग्य से, परन्तु कुछ मनुष्य कठोर परिश्रम, लगन से कार्य करते है, परन्तु भाग्य के मंद होने के कारण धनवृद्धि नहीं हो पाती।
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