पुराणों के अनुसार शंख की उत्पति समुद्र मंथन से हुई थी. शंख समुद्र में लगभग सभी जगह पाए जाते है. शंखनाद से अनेक प्रकार के कीटाणुओं का नाश होता है. वराह पुराण में कहा गया है कि मंदिर के दरवाजे खुलने व कोई धार्मिक कार्य प्रारम्भ करने से पहले.....
विस्तृत विवरणअनेक मनीषियों ने शंख ध्वनि में सरे ब्रह्माण्ड कों समाहित माना है. अखिल विश्व – ब्रह्माण्ड का संक्षिप्त रूप है.कुछ ऐसा ही भाव “ शंखनाद – ब्रह्मा “ शब्द से भी प्रकट होता है. जिस प्रकार किसी पदार्थ से , रासायनिक – प्रक्रिया द्वारा उसमें निहित तत्वों कों पृथक करके उनका विश्लेषण किया जाता है. ...
विस्तृत विवरणकहा जाता है की शंखनाद से शिला वृष्टि कों भी रोका जा सकता है. शंख नाद के इस चमत्कारी प्रभाव के बारे में तर्क दिया जाता है. की ऐसा करने के लिए कुछ मन्त्रोच्चारण की आवश्यकता होती है और दो महीने तक विशेष धार्मिक अनुष्ठान के बाद ही इस प्रकार के परिणाम संभव होते है...
विस्तृत विवरणपुराणों में शंख की उत्पत्ति के बारे एक रोचक प्रसंग में कहा गया है की भगवान और शंखचूंड राक्षस में जब युद्ध हो रहा था. तब भगवान शंकर ने भगवान विष्णु से प्राप्त त्रिशूल से शंखचूंड का वध कर, उसके टुकड़े कर अस्थि पंजरों से शंख की उत्पत्ति पंजरों से शंख की उत्पत्ति हुई....
विस्तृत विवरणसंसार में जितने भी प्रकार के शंखों की प्रजातियां पाई जाती है. अधिक़तर वामावर्ती ही होती है. लेकिन जो शंख दाहिनी तरफ खुलता है, उसे दक्षिणावर्ती शंख के नाम से जाना जाता है....
विस्तृत विवरणदक्षिणावर्ती शंख का अपने चमत्कारी गुणों क कारण अपना विशेष महत्व है. यह शंख विदेश दुर्लभ तथा सर्वाधिक मूल्यवान होता है. असली दक्षिणावर्ती शंख कों प्राण प्रतिष्ठित कर के उद्दोग – व्यवसाय स्थल, कार्यालय, दुकान अथवा घर में स्थापित कर उसकी पूजा करने से दुःख:- दारिद्रय से मुक्ति मिलती है...
विस्तृत विवरणशास्त्रों में शंख कों निधि माना गया है. इसे घर में पूर्ण श्रद्धा व विश्वास के साथ स्थापित करने से पारिवारिक सुख-समृद्धि प्रबल होती है, तथा अनिष्टों का शमन होता है. पूजा, अनुष्ठान, यज्ञ तथा तांत्रिक क्रियाओं में विशेष उपयोग किया जाता है. .....
विस्तृत विवरणपूजा अनुष्ठान तथा अन्य मांगलिक कार्यों के अवसर पर शंखनाद किया जाता है. शंखनाद से आसपास के हानिकारक जीवाणु नष्ट हो जाते है. इस बात कों विद्वानों ने प्रयोग करके सिद्ध कर दिया है. अक्सर देखा गया है की नित्य शंखनाद करने वालों का स्वास्थ्य उत्तम रहता है...
विस्तृत विवरणमोती शंख कों रात्रि में पानी से भरे किसी कांच के बर्तन में रखे. प्रात: उस पानी कों पी लें. यह क्रिया रोज करें, चेहरे पर चमक व कांति आएगी और आँतों के रोग दूर होते है. इसके अतिरिक्त इस शंख कों रोज चेहरे पर हल्के –हल्के फेरने से चेहरा सोंदर्य पूर्ण होता है....
विस्तृत विवरणशंखों के उचित उपयोग से हमारी सभी कामनाएं पूरी हो सकती है. कामना विशेष की पूर्ति के लिए शंख विशेष का प्रयोग किया जाता है. घर में शंख की स्थापना करते समय यह ध्यान रखना चाहिए. की शंख दोषमुक्त, अखंडित और शुभ रंग वाला हो....
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